Gaanv Ki Chhori Ki Chut Kori


सभी नियमित एवं नवागंतुक लंड पाठक एवं चूत पाठिकाओं को अदिति ग्वालानी का आनन्दमयी चुम्बन के एहसास जैसा नमस्कार!
जैसा कि आप सब जानते हैं अन्तर्वासना में मेरी कहाकी प्रकाशित हो चुकी है जिस वजह से बहुत से मेल आये और उनमें से कुछ बहुत अच्छे दोस्त भी मिले।
उन दोस्तों में से ही एक अज़ीज़ दोस्त जिनका नाम तृप्तेश मानसरोवर है, उन्होंने आग्रह कर मुझे उनकी आपबीती कहानी अन्तर्वासना पर भेजने का कहा।
तो आइये अब सुनते हैं आपबीती कहानी तृप्तेश की ज़ुबानी:

दोस्तो, मैं तृप्तेश 22 साल का गठीला नौजवान। एक या डेढ़ साल ही हुए होंगे मुझे अपने ग्रेजुएशन की पढ़ाई आरम्भ किए हुए।

मैं रायपुर, छत्तीसगढ़ का रहने वाला हूँ और स्कूली शिक्षा वहाँ के ही एक बहुप्रतिष्ठित स्कूल से की है। ऐसा नहीं है कि मेरी स्कूल लाइफ में कोई अफेयर्स नहीं थे, पर वो अलग बात थी या यूँ कहूँ कि बचपना था, सेक्स और यौनांगों के प्रति उतनी गंभीरता से जानकारी नहीं थी।
खैर यह तो रही स्कूल की बात, अब असल मुद्दे पे आता हूँ।
हुआ यूँ कि मैं कोलंबिया कॉलेज के इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांच के चौथे सेमेस्टर का विद्यार्थी था, पास ही स्थित एक टपरी (छोटी झोपड़ीनुमा चाय, पान की दुकान) थी, रोज कॉलेज छुटने के बाद हम सब दोस्त मिलकर छुट्टी के बाद सिगरेट के कश लगाने अक्सर वहाँ जाया करते और मौज मस्ती किया करते थे।
चूंकि रायपुर के सभी इंजीनियरिंग कॉलेज गाँव जो की रायपुर से लगे हुए हैं वहीं थे।
जब भी हम टपरी पे जाते तो गाँव की कुछ लड़कियां टपरी के पास स्तिथ बोरिंग में पानी लेने आती थी। हम लोगों को ये सब करता देख आपस में कुछ खुसफुसा कर खी खी कर हँसा करती थी और चली जाया करती थी।

कई दिनों तक यही सिलसिला चलता रहा। उनमें से एक लड़की मुझे कुछ अलग तरह से देखती थी थोड़ा घूर घूर के ध्यानपूर्वक…
पहले तो मैंने गौर नहीं किया लेकिन मेरे कुछ दोस्तों के कहने पर मैं ध्यान देना चालू किया।

दोस्तो, जवानी की आग ऐसी होती है कि बस जैसे प्यासे को पानी चाहे कहीं का भी हो।
आपको और एक चीज़ बता दूँ कि गाँव की लड़कियाँ भले ही देखने में उतनी खूबसूरत न हों पर घरेलू काम करते करते उनका फिगर बहुत ही गठीला हो जाता है।

उस गाँव के बीच में हमारा कॉलेज था और उस गाँव के दोनों और से रास्ते थे कॉलेज के लिए।
मैं अक्सर पीछे वाले रास्ते से आया करता था क्यूंकि थोड़ा धूल भरा लेकिन शॉर्टकट था।
एक दिन मैं यूँ ही कॉलेज से जा रहा था पीछे वाले रास्ते से कि अचानक कुछ दूर चलते ही मुझे वो लड़की दिखाई दी, वो रास्ता छोटी पगडण्डी सा था, ज्यादा चहल-पहल वाला नहीं था।
इत्तेफाक से उस दिन उस रास्ते पर सिर्फ हम दोनों ही थे, वो टोकरी सर पर लिए आगे आगे चल रही थी, रास्ता संकरा होने की वजह से मैं उसे ओवरटेक नहीं कर पा रहा था। मैंने गाड़ी का हॉर्न मारा तो वो पलटी, देख कर मुस्कुराई, फिर चलने लगी।

2-3 बार यही हुआ, फिर मैंने उसे आवाज़ दी, पूछा- तुम्हारा नाम क्या है?
पहले तो वो कुछ नहीं बोली, फिर लगा जैसे मुझसे यही आशा कर रही हो, तपाक से बोली- गीता!
मैंने पूछा- इसी गाँव में रहती हो?
तो उसने बहुत ही आश्चर्यजनक जवाब दिया, कहा- आप रोज़ तो देखते हैं, टपरी के पास पानी लेने जाती तो हूँ।
मैं दो मिनट के लिए मौन रह गया, फिर पूछा- अभी कहाँ जा रही हो?
तो उसने जवाब दिया- रात को पकाने के लिए सब्जी लेने…
पगडण्डी ख़त्म होते ही मेन रोड पर एक दो लोग सड़क किनारे सब्जी बेचा करते थे।

मैंने उससे पूछा- वहाँ छोड़ दूँ तुम्हें?
बोली- नहीं गाँव के किसी ने देख लिया तो गलत समझेगा।
मुझे यूँ लगा जैसे कोई इशारा मिल रहा हो मुझे, मैंने उसे समझाया- गाँव तो थोड़ा पीछे रह गया और इस पगडण्डी पर तो बहुत कम लोग आते जाते हैं।
मेरे समझाने पर उसने मान लिया, अपने दुपट्टे को मुँह पर बांध लिया और पीछे बैठ गई।
मैंने उसे वहाँ छोड़ दिया, उसने धन्यवाद कहा और मैं आगे निकल गया।

यह सिलसिला कुछ एक दो बार हुआ, तीसरी बार मैंने देर न करते हुए उससे कह दिया- गीता, मुझे तुम बहुत अच्छी लगती हो। मुझे तुमसे प्यार होने लगा है।

तो वो हंस कर शर्मा कर वहाँ से चली गई, फिर एक दो दिन नहीं दिखी, फिर 3 या 4 दिन बाद दिखी तो उसने कहा- आप तो पढ़े लिखे हो और मैं कहाँ…

मैंने उसे समझाया कि ये सब मायने नहीं रखता।
वो मान गई पर बोली- मुझे कभी धोखा मत देना, मैं नहीं सह पाऊँगी।
मैंने भी हाँ कर दी। फ़िर हम दोनों यूँ ही मिलने लगे।

एक दिन मैंने उसके होटों पर बातों बातों में ही चुम्बन कर दिया… क्या मस्त स्वाद था… बता पाना मुश्किल है!
मेरे उस चुम्बन से वो घबरा गई, शायद उसका पहली बार था बोली- यह क्या कर रहे हो आप?
मैंने कहा- गीता यह भी प्यार जताने का एक तरीका है।

लेकिन वो ये सब से मना करने लगी… लेकिन साहब जवानी की आग न शहर देखती है न गाँव… न पढ़ा लिखा देखती है न अनपढ़… वो तो बस लगती है तो सब कुछ जला कर रख देती है।
बस कुछ आग तो मेरे चुम्बन ने लगा दी, कुछ मैंने उसे मोबाइल वीडियोज़ और मूवीज के ज़रिये लगा दी।

बस फिर क्या था, एक दिन उसके घर वाले शादी में बाहर गये हुए थे लेकिन मैं उसके घर नहीं जा सकता था क्यूंकि गाँव में ये सब बहुत ज्यादा रिस्की होता है इसलिए मैंने उसे गाड़ी में बिठाया और पगडण्डी वाले रास्ते होते हुए उस रास्ते में ले आया जो रायपुर शहर और गाँव को जोड़ता है, वहाँ बस दूर दूर तक वीरान खेत थे, कुछ छोटी नदी टाइप की थी बस और एक दो झोपड़ी थी, किसानों ने बना रखी थी क्यूंकि उस समय गर्मी का समय था, खेती कुछ ख़ास नहीं होती, ख़ास कर शाम होते होते बिल्कुल वीरान हो जाता था वहाँ…

खैर साब, मैं उसे पीछे बिठा कर उसके गाँव से पगडण्डी वाले रास्ते होते हुए निकल गया।
उसने मुझे पूछा- आप जो मुझे मोबाइल में दिखाते हो, क्या वो सब प्रेमी आपस में करते हैं?
मैंने कहा- हाँ, यह भी प्यार करने का तरीका है।

तो उसने शरमाते हुए मुझसे पूछा- तो क्या हम भी ये सब करेंगे?
मैंने कहा- बिल्कुल करेंगे।

और मैंने तो कोशिश भी की थी पर तुमने मना कर दिया तो उसने कहा कि उसे अब कोई ऐतराज़ नहीं है।
बस फिर क्या था, मैं उसे उस वीरान जगह पर ले गया, खेत में बाइक उतार दी और अन्दर जितना हो सके उतना अन्दर ले गया, वहाँ बाइक खड़ी कर कुछ दूर और पैदल चलना पड़ा, तब पास जाकर एक खेत में खाली झोपड़ी दिखाई दी और आस पास दूर दूर तक न बंदा था न बन्दे की जात…
सच कहूँ तो चोदने के मूड के साथ साथ फटी भी पड़ी थी कि कहीं कोई जंगली जानवर न आ जाये…

फिर हम उस झोपड़ी में गए और ज़मीन पर बैठ गए क्यूंकि वो एकदम खाली थी।
फिर मैंने उसके बदन को छूना चालू किया और किस करने ही वाला था कि उसने रोक दिया, कहा- गर्मी लग रही है, पानी पीना है।
तो मैंने अपने बैग से बोतल निकाल कर उसे पानी पिलाया और खुद भी पिया, फिर चूमाचाटी का दौर चालू हुआ, मुझे उसे सिखाना पड़ा कि फ्रेंच किस कैसे करते हैं, होंट से होंट, जीभ से जीभ, सब कुछ देर चलता रहा फिर हम दोनों पूरे तरीके से गरम हो चुके थे।

मैंने उसका दुपट्टा निकाल कर ज़मीन पर बिछाया और धीरे धीरे उसके पूरे कपड़े निकाल दिए, अब वो सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी, अब मैंने भी अपने पूरे कपड़े निकल दिए।

उसे फिर मैं किस करने के साथ साथ उसके बटले जिन्हें स्तन भी कहा जाता है, दबाने लगा।
वो मस्त होती जा रही थी और मादक आवाजें निकाल रही थी। मैंने उसकी ब्रा भी निकाल फेंकी और अपनी भी अंडरवियर निकल दी।

मेरा लंड उसके सामने था और मैं पूरा नंगा था।
अब उसने हाथों से अपना चेहरा ढक लिया और नज़रें चुरा चुरा कर मेरा लंड देखने लगी, मैं बाहर जाकर मूत कर आया और बिना लंड धोये अन्दर आ गया क्यूंकि पानी ख़त्म हो चुका था और वहाँ पर था नहीं।

वो ठहरी बेचारी गाँव की छोरी, उसे क्या पता कि अब क्या होना है या क्या करना है…
मैंने उसे अपने मोबाइल पर ब्लू फिल्म दिखाई और कहा- देखो, इसमें जो औरत है, वो जैसा करेगी वो तुम्हें मेरे साथ करना है।

पहले तो वो शर्माने लगी लेकिन थोड़ा गर्म करने पर उसने मेरा लंड हाथ में पकड़ा, हिलाया, थोड़ा बड़ा होने पर मुख में लेकर चूसने लगी। मैं खड़ा था और वो नीचे बैठी मेरा लंड चूस रही थी।

क्या बताऊँ कितना आनन्द आ रहा था।
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करीब 5 मिनट चूसने के बाद मैं कण्ट्रोल न कर सका और उसके मुख में ही झड़ गया, उसने खांसते हुए पूरा वीर्य बाहर जाकर थूक दिया, मेरा लंड अब थोड़ा शांत हो चुका था।

मैंने अब उसे लिटाया और उसे यहाँ वहाँ चूमते हुए उसकी पैंटी उतारने लगा।

जब मैंने उसकी पैंटी उतारी तो देखा नीचे पैंटी में कुछ हरा सफ़ेद सा दाग था और पैंटी के ऊपर एक हल्के पीले रंग का कपड़ा था जिसमे लाल रंग का दाग था, शायद माहवारी का था… बाकी उसके पैंटी वाले हरे सफ़ेद से दाग के बार में पूछे पर उसने बताया कि कभी कभी उसकी चूत से कुछ अजीब सा द्रव गाढ़ा सा कुछ निकलता है, उसे भी नहीं पता कि क्या था।

खैर मैंने उसकी पैंटी उतार दी लेकिन चूत चाटने में थोड़ा संकुचाया, वो दाग वाग का सोच कर…

फिर मुझे याद आया कि मैं अपने बैग में हमेशा सैनीटाईज़र रखता हूँ, मैंने वो निकाला और उसकी चूत के ऊपरी हिस्से में लगाने लगा क्यूंकि उसकी उम्र ज्यादा नहीं लग रही थी, शायद इसलिए उसकी चूत पर ज्यादा बाल भी नहीं थे, जब मैंने सैनीटाईज़र लगाया तो उसकी चूत में जलन होने लगी, वो तड़पने लगी।
मुझे कुछ सूझ नहीं रहा था कि क्या करूँ… पानी भी ख़त्म हो गया था तो मैंने थूक थूक कर उसके चूत की जलन शांत करने की कोशिश की और उसे मूतने को बोला।
जब वो मूत के आई तो थोड़ा रिलैक्स लगी।

अब फिर चुम्बन चालू कर उसे गर्म करने लगा मैंने उसकी चूत चाटना चालू किया, अब वो और भी गर्म हो चुकी थी और मैं उसकी चूत के दाने को रगड़ने मसलने लगा, वो उत्तेजना में तड़पने लगी, मेरे लंड को हिलाने लगी नीचे हाथ डाल कर!

मेरा लंड थोड़ा और खड़ा हो गया, मैंने फिर से लंड उसके मुंह में दे दिया, इस बार उसने शर्म छोड़ मस्त चुसाई की।

अब मैं पूरे जोश में था, मैंने उसकी टाँगे चौड़ी की और लंड चूत के छेद पर सेट कर लंड अन्दर डालने लगा लेकिन असफल रहा।
मैं तो भूल ही गया था कि वो कुंवारी है!
फिर जैसे तैसे मैंने लंड अन्दर किया, सुपारा अन्दर गया ही था कि वो चीखने लगी, बोली- बहुत दर्द हो रहा है, निकालो इसे!

मैंने उसकी एक न सुनी और ताकत लगाई, आधा लंड अन्दर था और उसकी चूत से खून बह कर जो नीचे बिछे उसके दुपट्टे में लग रहा था, वो ज्यादा जोर न चीखे इसलिए उसके होठों में अपने होंठ दबा दिए मैंने।

2-3 मिनट रुक कर मैंने फिर से धक्का लगाना चालू किया, अब उसे भी मज़ा आने लगा।
क्यूँकि कंडोम मैं लाया नहीं था, इसलिए ऐसे ही पेल दिया, अन्दर थोड़ा दर्द शुरू में मुझे भी हुआ पर बिना कंडोम का मज़ा तो शादीशुदा व्यक्ति ही जानता है, अच्छे से मैंने उसे जम कर चोदा, वो अकड़ गई, टांगें मेरी कमर पे कसते हुए झड़ गई।

फिर मैंने उसे अपने ऊपर आने को कहा, वो मेरे ऊपर आकर उछाल मारने लगी, मैं उसके स्तन हाथ में लेकर दबा रहा था।

फिर मैंने उसे घोड़ी स्टाइल में चोदा और अन्दर ही झड़ गया।
उसने कहा- आपने अपना मेरे अन्दर ही निकाल दिया? अगर मैं माँ बन गई तो बहुत बदनामी होगी।

मैंने कहा- तुम चिंता मत करो, ऐसा कुछ नहीं होगा।

फिर रात करीब आठ बजे तक मैंने उसे छोटी नहर जो किसानों के खेत में पानी पहुंचाने के लिए होती है, वहाँ किनारे ले जाकर और पानी में भी चोदा।
क्या ज़न्नत का नज़ारा था वहाँ, हरे भरे पेड़, खेत, पानी और चुदाई… आप अंदाज़ा भी नहीं लगा सकते जी…

अगले दिन मैंने उसे गर्भनिरोधक गोली ले जाकर दी और उसे नित्य मौका मिलने पर उन्ही प्राकृतिक दृश्यों वाली जगहों में चोदता रहा।
आगे और भी बहुत कुछ हुआ वो अगले भागों में !
मेरी कहानी थोड़ी लम्बी ज़रूर है मगर उम्मीद करता हूँ कि आपको पसंद आएगी।
आपका तृप्तेश
aditigwlani.cutie@gmail.com
Ice Cube Disc Me Mili Teena-1दोस्तो, मैं एक बार फिर से आपके पास अपनी एक नई कहानी लेकर आया हूँ, कोशिश यही है कि आपको कहानी पसंद आएगी।

जैसा मैंने अपनी पहली कहानियों में बताया कि मैं पेशे से एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूँ, मेरा काम अक्सर ऑफ़िस के छोटे से कॅबिन में बैठ कर होता है पर कभी भी जब मुझे मौका मिलता है तो मैं घूमने के लिए अपनी कार से बाहर निकल जाता हूँ।

यह वाकया उस टाइम का है जब मैं अपने फ्लैट पर अकेला था और बोर हो रहा था। मेरे दिल को लगा कि मुझे कहीं घूमने निकलना चाहिए।
यही सोच कर मैं लोंग ड्राइव के लिए निकल पड़ा, पता नहीं था कि कहाँ जाना है पर मौसम सुहाना था और मन थोड़ा मस्ती करने का था।
मैंने सोचा कि कुछ देर किसी पब में बैठूँ और बियर पी लूँ, मैं नोयडा के एक क्लब में जाकर पीने लगा। आपको बता दूँ कि मैं द ग्रेट इंडिया प्लेस माल में जाकर आइस क्यूब नामक पब में जाकर बैठ गया, वो दिन फ्राइडे का था तो वहाँ बहुत सारे ग्रुप आए हुए थे जो दिखने में स्टूडेंट लग रहे थे।

मैंने दो बियर निपटा ली थी और स्मोक ज़ोन में एक सिगरेट पीने के लिए गया, लाइटर जला कर सिगरेट जलाई और पीने लगा।
तभी देखा कि स्मोक ज़ोन में एक लड़की आई, वो बहुत तेज रो रही थी। वो मेरे पास वाले स्पेस पर आकर बैठ गई, वो टिशू पेपर से अपने आँसू साफ कर रही थी।

एक पल के लिए उसने मुझे देखा पर मुझे अवायड करके अपने काम में लग गई। मैं अपनी आधी सिगरेट पी चुका था और फ़ोन पर अपने मैसेज चेक कर रहा था, तभी किसी ने मुझे आवाज़ दी- कॅन ई हॅव आ सिगरेट प्लीज़?

मैंने सिर उठा कर देखा तो वही लड़की मुझे सिगरेट माँग रही है, मैंने पूरा पेकेट उसके हाथ में दे दिया और लाइटर जला कर उसकी सिग्रेट जलवाई।
उसने 2-3 लंबे लंबे कश भरे और हाथ आगे बढ़ा कर हेलो बोला और अपना नाम टीना बताया।
मैंने भी हाय किया और अपना परिचय दिया.

वो बैठ कर सिग्रेट के कश मारने लगी, मेरे मन में कोई ऐसी बात नहीं थी पर उसने खुद से बोला- सॉरी, मैं किसी पर्सनल बात से परेशान थी और रो रही थी।
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मैं कुछ नहीं बोला, मैंने वेटर को इशारा किया, वो मेरे लिए एक बियर और लेकर आ गया।
शराफ़त के नाते मैंने उसे बियर ऑफर की तो उसने पहली बार में ना कर दिया पर जब मैंने बियर का एक घूंट पीया तो बोली- ठीक है आप कहते हैं तो मैं ले लेती हूँ।
मैंने वेटर से एक और बियर लाने को कहा।

वो थोड़ी परेशान थी तो मैंने पूछा- कोई ऐसी बात है कि आप परेशान हैं? पर उसने कुछ ठीक से नहीं बताया। कुछ टाइम बाद जब बियर फिनिश हो गई, हम लोग स्मोक ज़ोन से बाहर आने लगे, वो मेरे पीछे थी, मैं ठीक उसके आगे था।
मैं फर्स्ट फ्लोर की तरफ़ जाने लगा तो मुझसे उसने पूछा- आप कहाँ जा रहे हो?

तो मैंने बोला- मेरी सीट ऊपर है।
वो बोली- ठीक है।

मैं ऊपर आकर अपने लिए एक और ड्रिंक ऑर्डर करने वाला था कि देखा टीना ऊपर की ओर चली आ रही है, वो आई और उसने पास आकर मुझसे पूछा कि क्या वो मेरे साथ बैठ सकती है?
मैंने बहुत ही सरल जवाब दिया- ज़रूर!

वो मेरे पास सोफे पे आकर बैठ गई और हम दोनों ड्रिंन्क एंज़ोय करने लगे।
रात के करीब साढ़े दस बज चुके थे और हम बस इधर उधर की बातें कर रहे थे।

एक बार मैंने उससे फिर से पूछा- आप रो क्यों रही थी?

तब उसने एक लम्बी सांस भरी और बोली- मेरा बॉयफ़्रेंड मेरे साथ डिस्क में आया था और किसी बात पे वो मुझे धक्का देकर मुझे अकेला छोड़ कर चला गया और मैं अपसेट होकर रोने लगी। वो हमेशा मेरे साथ ऐसा ही करता है।

मैंने तसल्ली की सांस ली और पूछा- तुम कहाँ रहती हो?
उसने जवाब दिया- ग्रेटर नॉयडा एक्सप्रेस वे पे अपने फ्रेंडस के साथ फ्लैट शेयर करके रहती हूँ।

फिर मैंने पूछा- वो जगह तो यहाँ से बहुत दूर है, कैसे जाओगी?
तो बोली- ऑटो हायर करके चली जाऊँगी।

अब हमारी बातें स्टार्ट हो गई। धीरे धीरे पता चला कि वो बी.टेक स्टूडेंट है और वहीं किसी कॉलेज में पढ़ती है।
जब उसने मेरे बारे में जाना कि मैं एक मल्टी नॅशनल कंपनी में काम करता हूँ तो वो मेरी बातों को ध्यान से सुनने लगी और मुझसे पूछा- आप अकेले डिस्क में क्या कर रहे हैं?

तो मैंने बोला- फ़्राईडे होने के कारण मैं यहाँ चला आया थोड़ा मूड ठीक करने को…
तो मज़ाक में उसने मुझसे कहा- आपका मूड अब ठीक हो गया?
तो मैंने तपाक से जवाब दिया- इतनी सुंदर लड़की के साथ ड्रिंक करके मूड तो सही होना ही था।

हमारी काफ़ी देर तक बातें चलती रही, इस बीच हमने 2-2 बियर और निपटा ली। डिस्क का फाइनल सॉंग्स चलने का टाइम आ गया था तो टीना ने मुझे डान्स के लिए ऑफर किया और हम दोनों नीचे फ्लोर पे डॅन्स करने के लिए चले आए।
सॉंग भी मेरे पसंद का था- ‘दिल तेरी दीवानगी में खो गया है…’

उसने मेरे साथ पूरा साथ देकर डान्स किया, फिर जब डिस्क क्लोस होने लगी तो मैं बाहर जाने लगा तो उसने कहा- क्या हम थोड़ी देर कहीं बैठ सकते हैं?
मैं अकेला था तो मुझे कोई परहेज नहीं था, हम वहीं माल में एक सीढ़ी पे बैठ गये और बातें करने लगे।
टाइम 12:45 हो चुका था और उसे अच्छा नशा भी हो रहा था, उसका सिर मेरे कंधे पे था और वो थोड़ा धीरे धीरे बोल रही थी।
मुझे उसकी हालत ठीक नहीं लगी और मैंने उससे कहा- चलो आपको बाहर से ऑटो करा देता हूँ, काफ़ी लेट हो गया है।

मेरे मन में अभी तक कोई ग़लत भावना नहीं आई थी, मुझे बस चिंता इस बात की थी की कहीं मेरे कारण वो किसी प्राब्लम में ना आ जाये।
मेरे बात सुनकर उसने कहा- आप कैसे घर जाएँगे?
तो मैंने कहा- मेरे पास कार है, मैं निकल जाऊँगा।
तो मेरे हाथ पकड़ कर टीना मुझसे बोली- आप ही मुझे क्यों नहीं ड्रॉप कर देते?
मुझे यह ठीक लगा और हम लोग पार्किंग की तरफ चल दिए।

पार्किंग में अपनी कार में बैठने के बाद मैंने उसे पानी ऑफर किया, उसने वो पी लिया।
हम लोग पार्किंग से निकालने के बाद एक्सप्रेस वे की तरफ चलने लगे पर उसकी आँखें देख कर यह नहीं लग रहा था कि वो अपने फ्लैट पर वापस जाना चाहती है।

कुछ देर सॉंग सुनने के बाद उसने अपनी पसंद का आशिक़ी-2 का सॉंग सेलेक्ट किया और हम दोनों सॉंग सुनने लगे।
तभी उसने मेरे कंधे पे सिर रख कर धीरे धीरे मेरे सीने पर अपने हाथ चलाना शुरु कर दिया।
मेरे अंदर का मर्द अब जागने लगा था पर चाह कर भी कुछ नहीं करना चाहता था क्योंकि वो हसीन थी, मासूम थी…
पर दिल तो दिल है…

हम लोग एक्सप्रेस वे पे पहुँचने के बाद धीरे धीरे अपनी मंज़िल की तरफ जा रहे थे। मेरा दिल अब बेईमान होने को कर रहा था, तभी उसने मुझसे बोला कि उसके बॉयफ़्रेंड ने उसके धोखा दिया है, उसके साथ कई बार सेक्स किया है पर फिर भी वो उसका ना होकर किसी और के पीछे पड़ा है।

मैंने उसे बोला- तुम उसे छोड़ क्यों नहीं देती?
तो उसने बात टाल दी। टीना पे नशा सवार हो गया था और वो अब धीरे धीरे मेरे पास आने की कोशिश कर रही थी और मेरे गालों पे और चेहरे पे अपना हाथ फेर रही थी।
मैंने उत्सुकतावश पूछ लिया- क्या दिल बेईमान हो रहा है?
तो बोली- मुझे प्यार चहिए किसी भी कीमत पे… क्या तुम मुझे प्यार दे सकते हो?
कहानी जारी रहेगी।
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Part of a series:


शशि रसोई से गिलास लेने चली गई.. जब वो चल रही थी.. तो विमल बिना किसी शरम के शशि के मादक और ठुमकते हुए चूतड़ों को निहार रहा था और ये अवी भी देख रहा था।

‘विमल यार तू तो बहुत बेशरम हो गया है, बहनचोद.. अपनी बहन की ही गाण्ड घूर रहे हो? साले.. शशि मेरी पत्नी है। तेरी बिन्दू यहाँ है.. उसको देख अच्छी तरह।’

विमल भी हंस कर बोला- अवी.. मेरे यार.. यारों में तेरा क्या और मेरा क्या.. जो मेरा है.. वो तेरा है और जो तेरा है.. वो मेरा है.. अब तेरी पत्नी पर मेरा भी तो कुछ हक है कि नहीं? जब तू बिन्दू को आलिंगन में ले रहा था तो मैंने कुछ बोला? यारों में सब कुछ बाँट लिया जाता है.. अगर किसी को एतराज़ ना हो.. चल एक और पैग बना.. आज का दिन यादगार बना देते हैं।’
तभी शशि आ गई और उसने दो पैग बना लिए- मैं बहुत कम पीती हूँ और मुझे जल्दी ही नशा हो जाता है।
शराब कड़वी थी तो मैंने कहा- शशि साथ में कुछ नमकीन नहीं है? ये बहुत कड़वी है।
मैंने घूँट भरते हुए कहा।

शशि बोली- चल हम रसोई में जा कर एग्स फ्राई कर लेते हैं.. ये भी खा लेंगे.. क्यों अवी एग्स खाओगे?

अवी नशे में हंस कर बोला- जानेमन आज तो तुम लोगों को खा जाने का मन कर रहा है.. अगर खिला ही है तो अपने आम चुसवा लो हम दोनों से.. क्यों विमल? और आपको कुछ खाना है.. तो हमारे केले हाज़िर हैं।’

मेरा तो शरम से बुरा हाल हो गया.. उसकी बेशरमी की बात सुन कर।

‘हाँ हाँ.. खा लेंगे.. आपके ‘केले’ भी अवी.. लेकिन अगर केले में दम ना हुआ तो? वैसे मैं और बिन्दू भी बहुत भूखी हैं.. हम केले के साथ आपके लुकाट भी चूस लेंगी।’

सभी हंस पड़े और मैं और शशि रसोई में एग्स फ्राई करने लगीं।

शशि ने मेरे ब्लाउज में हाथ डाल कर मेरी चूचियाँ मसल डालीं और बोली- बिन्दू.. मेरी जान.. क्यों ना आज ही पति बदल कर टेस्ट क्या जाए.. अवी और विमल अब नशे में हैं.. हमको कुछ करने की ज़रूरत नहीं है.. विमल भैया तो कब से मुझे सेक्सी नज़रों से घूर रहे हैं और अवी तो कल्पना में तेरे कपड़े उतार रहा है। क्यों ना देखा जाए कि विमल को मैं कैसी लगती हूँ.. और तुझे अवी का लंड कैसा लगता है.. एक बार खुल गए तो हम लोग बिना किसी डर के फ्री सेक्स की दुनिया में प्रवेश कर सकते हैं। मेरी रानी.. आजकल ग्रुप सेक्स का बहुत चलन है.. खूब मज़े करेंगे ओके?

मेरे अन्दर तो एक आग भड़क उठी थी..
मुझे अवी एक कामुक मर्द नज़र आ रहा था और मेरी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था। उत्तेजना में आ कर मैंने शशि को आलिंगन में ले लिया और उसके होंठों को चूमने लगी।

‘साली.. तूने मुझे आज बहुत गरम कर दिया है और ऊपर से शराब का नशा.. आज जो होना है.. हो जाने दो.. मुझे तू अपने पति के साथ चुदाई कर लेने दे.. और तू मेरे पति से चुदवा ले.. सखी।’ ये कहते हुए मैंने शशि की चूचियाँ मसल डालीं।

मेरी साँस बहुत तेज़ी से चल रही थी.. मेरा अपने आप पर काबू ना रहा।

‘चल बिन्दू.. पहले हम कपड़े बदल लें.. इससे काम और आसान हो जाएगा।’

शशि मुझे अपने कमरे में ले गई और उसने सारे कपड़े उतार कर एक खुला हुआ घुटनों तक पहुँचने वाला पाजामा और बिना बाज़ू की शर्ट पहन ली और मुझे भी ऐसी ही एक और ड्रेस दे दी।

पाजामा और शर्ट के नीचे हम बिल्कुल नंगी थीं.. मैंने देखा कि शशि ने भी मेरी तरह अपनी चूत ताज़ी शेव की हुई थी।

जब मैंने अपनी साड़ी और ब्लाउज उतारा तो वो मस्ती से भर गई.. और मेरी चूत को मुठ्ठी में भर कर कस दिया।

‘अरे मादरचोदी.. तू भी बहुत गरमा गई है.. मेरे पति को चोदने के विचार से.. अवी ठीक चोदेगा तुझे.. मेरी बन्नो.. साली तेरी चूत से तो नदियाँ बह रही हैं.. मेरे लिए भी पति बदलने का पहला मौका है। चल अन्दर चल कर देखते हैं.. इन कपड़ों में क्या बिजली गिराती है तू.. मेरे पति देव पर?’

इस शर्ट का गला इतना लो-कट था कि कल्पना की कोई ज़रूरत ना बची थी.. जब मैं अन्दर जाने के लिया मुड़ी.. तो शशि ने मेरे नितम्ब पर ज़ोर से चाँटा मारा.. तो मेरी चीख निकल गई- ओह्ह.. शशि साली कुतिया.. मार क्यों रही है साली?

शशि शर्त से मुस्कुराती हुई बोली- क्योंकि मेरे पति.. तेरी डबल रोटी जैसी गाण्ड पर चांटे ज़रूर मारेंगे और शायद तेरे पिछवाड़े का भी आज ही महूरत कर दें.. भारी गाण्ड का बहुत रसिया है अवी।

जब हम कमरे में गईं तो मर्दों की आँखें खुली की खुली रह गईं.. विमल के मुँह से निकल गया- ओह्ह.. भेंचोद.. कितनी सेक्सी हैं ये दोनों औरतें।

अवी तो बस मुझे देखता ही रह गया।

‘यार गर्मी बहुत थी.. तो हमने चेंज कर लिया.. पसीने से भीग रही थीं हम दोनों.. तुम तो यहाँ एसी में बैठे हो.. हम औरतों को रसोई में काम करना पड़ता है.. मेरे तो मम्मों से पसीना नीचे तक जा रहा था.. ओह्ह.. बिन्दू यहाँ आराम है.. बैठ जाओ और शराब के मज़े लो।’

तभी विमल के ताश की गड्डी उठा ली और बोला- चलो कार्ड्स खेलते हैं.. सभी का मनोरंजन हो जाएगा.. क्यों बिन्दू खेलोगी?

मैं भी अब इस सेक्स के गेम में शामिल होने को तैयार थी।

‘विमल यार आज जो गेम भी खेलोगे.. मैं साथ हूँ.. मुझे लगता है कि आज का दिन हम भुला नहीं पाएँगे.. लेकिन गेम की शर्त क्या होगी? हारने वाला कितने पैसे देगा जीतने वाले को? भाई मेरे पास तो बस 500 रुपये हैं..’ मैंने कहा।

तो अवी बोल उठा- मेरी प्यारी साली साहिबा.. अँग्रेज़ लोग एक गेम खेलते हैं.. स्ट्रीप पोकर.. वो ही क्यों ना खेला जाए? जो हारता है.. अपने जिस्म से एक कपड़ा उतारेगा.. शशि को ये गेम पसंद है.. क्यों शशि?
शशि हंस पड़ी- यार नंगी तो होना ही है.. फिर ताश की गेम में क्यों ना हुआ जाए?

मुझे लगा कि अवी और विमल भी वो ही प्लान बना चुके थे.. जो मैं और शशि बना कर आए थे।
हम चारों बैठ गए और विमल ने कार्ड्स बाँट दिए।

‘बिन्दू.. अभी से सोच लो.. अगर हार गईं तो सभी के सामने कपड़े उतारने पड़ेंगे..’

मैं भी अब शराब के नशे में टुन्न हो चली थी, ‘पति देव को अगर अपनी पत्नी को नंगा दिखाने में कोई शरम नहीं है.. तो पत्नी को क्या एतराज़ होगा.. पति देव?’

सभी हंस पड़े.. पहली बाजी विमल हारा.. शशि ने आगे बढ़ कर कहा- विमल भैया की पैन्ट उतारी जाए.. ठीक है?’
हम सभी ने मंज़ूरी दे दी और शशि ने विमल की पैन्ट की बेल्ट खोली और नीचे सरका दी।

मेरा पति अब कच्छा पहने हुए बैठा था.. उसको कोई शरम नहीं थी। क्योंकि उसका लंड तो तना हुआ था.. शशि ने विमल की जाँघों पर हाथ फेरा.. तो अवी बोल उठा- शशि मेरी रानी.. विमल का तो पहले ही खड़ा है.. अगर तुमने हाथ फेरा तो कहीं छूट ही ना जाए।

सभी हंस पड़े।

दूसरी बाजी में हार हुई शशि की.. अवी ने कहा- विमल यार अब बारी तेरी है.. ले लो बदला.. मेरी बीवी से.. मेरी मानो तो इसका पजामा उतार दो.. कम से कम अपनी बहन की चूत के दर्शन तो कर लो।

विमल मुस्कुराते हुए उठा- ठीक है यार.. अगर तू अपनी बीवी की चूत दिखवाना ही चाहता है.. तो देख ही लेते हैं.. क्यों शशि.. मेरी बहना.. कहीं नीचे पैन्टी तो नहीं पहन रखी?

शशि भी बेशरामी से बोली- भैया.. अपनी बहन की चूत देखने का शौक है.. तो पजामा उतार कर ही देखनी होगी.. मुझे भी लगता है कि तुम बहुत बरसों से मेरी चूत के दीदार करने के इच्छुक हो.. क्यों बिन्दू से दिल नहीं भरा?

विमल ने शशि को होंठों पर किस किया और फिर पजामे का एलास्टिक नीचे को खींच दिया।

जब वो एलास्टिक नीचे सरका रहा था तो उसने जानबूझ कर उंगलियाँ उसकी फूली हुई चूत पर रगड़ डालीं।

अवी मुस्कराते हुए बोला- विमल.. साले तू हरामी का हरामी रहा.. साले शशि की चूत को स्पर्श करने की इजाज़त तुझे किसने दी? साले अपनी बहन की चूत पर हाथ फेरते हुए कैसा लगा?

शशि बोली- अवी.. मैं अपनी चूत पर जिसका हाथ फिरना चाहती हूँ.. फिरा सकती हूँ.. मेरे विमल भैया से शिकायत मत करना.. जब तेरी बारी आएगी.. तो बिन्दू पर हाथ साफ़ कर लेना।

तीसरी बाज़ी अवी हारा.. विमल ने मुझे उसकी पैन्ट उतारने को बोला.. जब मैंने उसकी पैन्ट उतारी तो वो बोला- शशि.. तेरी सहेली के हाथ से नंगे होना मज़े की बात है।

तभी मेरे हाथ अवी के नंगे लंड से जा टकराए।
‘उइईए माँ… ये क्या? आपने कच्छा नहीं पहना?’

अवी हंस पड़ा- क्यों साली साहिबा.. हमारा हथियार पसंद नहीं आया.. जो चीख मार दी आपने? आपकी सखी इसकी पर्फॉर्मेन्स से तो काफ़ी खुश है।

उसका लंड किसी गुस्साए नाग की तरह फुंफकार रहा था।
अवी ने जानबूझ कर पैन्ट के नीचे कुछ नहीं पहना था.. उसका लंड विमल के लंड से थोड़ा बड़ा था।

ताश के खेल के साथ शराब के पैग भी सबके गलों को निरन्तर तर करते जा रहे थे जिससे माहौल और भी नशीला होता जा रहा था।

अगली बाजी शशि फिर हार गई और बिना कुछ बोले विमल ने उसकी शर्ट उतार डाली।
अब शशि के मोटे-मोटे मम्मे सबके सामने खुल गए थे और मेरी सखी मादरजात नंगी हो गई थी।

विमल ने आगे झुक कर उसके एक निप्पल को चूम लिया।
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‘बहनचोद.. विमल.. ये फाउल है.. मादरचोद तेरी बीवी एक भी गेम नहीं हारी और मेरी को तू नंगा कर चुके हो.. और ये ही नहीं साले.. तुम अपनी ही बहन का दूध भी पी रहे हो..’ विमल बोला।

‘अवी यार.. हिम्मत है तो मेरी बीवी को हरा दो और कर दो उसको नंगा.. मुझे कोई एतराज़ नहीं.. मेरी बीवी भी हम सभी के बराबर ही है।’

अब की बारी मैं हारी.. तो सभी बहुत खुश हुए।

यह मदमस्त कहानी आपके जिस्मों की उत्तेजना को और बढ़ाएगी.. बस अपने हाथ चलाते रहो.. और झड़ जाओ तो जल्दी से कमेन्ट लिख देना.. प्लीज़।
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दोस्तो, मेरा नाम कबीर है.. मेरी उम्र 25 वर्ष है.. अन्तर्वासना पर मेरी यह पहली कहानी है.. मुझे एक दोस्त ने मुझे कुछ दिन पहले ही अन्तर्वासना साइट के बारे में बताया था।

मैं नोएडा का रहने वाला हूँ.. मैंने दो साल पहले ही अपनी एम.बी.ए. की पढ़ाई पूना से पूरी की है.. उसके बाद 10 महीने तक सिंगापुर की एक मार्केटिंग कंपनी में ट्रेनिंग लेकर मैं 8 महीने पहले ही अपने घर नोएडा आकर फैमिली बिजनेस देख रहा हूँ।
हमारा बिजनेस काफी बड़ा है.. हमारी छह बड़ी फैक्ट्री हैं.. जो उत्तर भारत में अलग-अलग शहरों में हैं।

हमारी फैमिली सम्मिलित रूप से ही रहती है.. मेरे परिवार के सदस्यों में मेरे पापा-मम्मी.. मेरे बड़े भाई-भाभी.. जिनकी शादी एक साल पहले हुई थी.. भाई का नाम कुनाल और भाभी का नाम मानसी है.. मेरी एक सगी बड़ी बहन काजल.. जिनकी शादी दो साल पहले जयपुर हुई थी। मेरे चाचा-चाची और चाचा के दो बेटे हैं.. जिनमें एक की शादी 3 साल पहले हुई थी.. भाई का नाम विशाल और भाभी का संजना है और दूसरे बेटे का नाम वरूण है.. भाभी का नाम पल्लवी है।
हमारे यहाँ मेरे मामा की बेटी सौम्या भी रहती है.. जो नोएडा में रहकर पढ़ाई कर रही है।

मैं आपको इन पात्रों से विस्तृत परिचय किसी दूसरी कहानी में कराऊँगा.. फिलहाल मैं अपनी कहानी सुनाता हूँ।

मेरे चाचा के छोटे बेटे और मेरे बड़े भाई वरूण भैया जो कि जेट एयरवेज में पायलट हैं। उनकी शादी 8 माह पहले जनवरी 2013 में पल्लवी भाभी से हुई थी। उनकी उम्र 27 साल है.. जो शादी से पहले एयर होस्टेस थीं.. और उनसे भाई की शादी अरेंज़्ड थी।

वैसे तो मेरी तीनों भाभियां ही बहुत ही खूबसूरत हैं.. पर पल्लवी भाभी कुछ ज्यादा ही मैंटेन किए हुए है।

मैं घर में छोटा होने के कारण सभी का लाड़ला हूँ। पल्लवी भाभी से मेरी उनकी शादी के बाद से ही सबसे ज्यादा दोस्ती हो गई थी.. क्योंकि उनका हनीमून खत्म होने के बाद ही भैया अक्सर काम पर हवाई-जहाज पर रहते थे.. तो भाभी और मैं अक्सर मूवी.. मार्केट जाते रहते थे।
कभी-कभी डिस्को भी जाते.. भाभी को शॉपिंग का बहुत शौक है.. तो हम अक्सर मॉल जाकर शॉपिंग करते।

पल्लवी भाभी मेरी गर्लफ्रेण्ड से भी कई बार मिलीं.. मतलब मैं और भाभी बहुत अच्छे दोस्त हो गए थे और बहुत खुलकर बातें शेयर करने लगे थे।
वो मुझे बतातीं कि तुम्हारे भैया अक्सर टूर पर रहते हैं.. मुझे अच्छा नहीं लगता है..
मैं उनको एन्टरटेन करता रहता था.. जैसे एक दोस्त अपने दोस्त के साथ करता है.. और वह भी मुझे अच्छा दोस्त मानती थीं।

यह बात है मई 2013 की.. जब वरूण भैया को ट्रेनिंग के लिए एक माह को जर्मनी जाना पड़ा। उनको गए 20 दिन हो चुके थे भाभी उदास रहती थीं।
तभी हमारे एक रिश्तेदार के यहाँ दिल्ली में शादी थी। पल्लवी भाभी अकेली घर में बोर होती थीं.. तो वह शादी में दो दिन पहले चली गईं।

अगले दिन रविवार था.. तो भाभी का दिल्ली से मुझे कॉल आया- कबीर तुम क्या कर रहे हो.. आज तो तुम्हारा ऑफ़ है न?

मैंने कहा- जी भाभी.. घर पर ही हूँ और शादी कल है.. तो मैं कल आऊँगा.. आज शायद अपनी जीएफ (सोनम) से मिलने जाऊँ.. और आप कैसी है वहाँ?

वह बोली- यार मैं बहुत बोर हो रही हूँ यहाँ.. सब आंटी है यहाँ.. आज मुझे कुछ शॉपिंग करनी है और मैंने जो डिजाइनर साड़ी बनने दी है.. वह लेने जाना है.. तुम आ सकते हो क्या? तुम सोनम से शाम को मिल लेना..

मैंने कहा- जी भाभी.. आप इतना बोल रही हैं.. तो आता हूँ।

मैं वहाँ 12 बजे पहुँचा.. शादी वाले मैरिज हाँल से पल्लवी भाभी को साथ लिया.. भाभी ने हल्के लाल रंग का डिजाइनर सूट पहना था।
वैसे तो वह हमेशा ही सुन्दर लगती हैं क्योंकि वह है ही सुन्दर.. बिल्कुल मॉडल जैसी.. पर आज उनके फिगर पर.. जो कि 34ए-27-36 है.. पर ये सूट बिल्कुट फिट था।

मैंने बोला- भाभी आज तो आप बिजली गिरा रही हैं।

वह हँसने लगीं.. मैं उनको लेकर पास के मॉल में गया.. उन्होंने शॉपिंग की.. कुछ टी-शर्ट, जींस मैंने भी ले लीं।
भाभी ने जो डिजाईनर साड़ी बनने दी थी वह भी उन्होंने ले ली। हम वहाँ से दो घंटे में फ्री हो गए।

भाभी बोलीं- मुझे यह नई साड़ी ट्राई करनी है।
मैंने कहा- तो चलो मैं आपको शादी वाले घर छोड़ देता हूँ।
वह बोलीं- वहाँ नहीं जाना अभी से.. मैं बोर हो जाती हूँ वहाँ.. हम कहीं और नहीं जा सकते? मुझे साड़ी पहनने में टाइम लगेगा।

मेरे एक दोस्त का घर उधर से कुछ ही दूर दिल्ली में ही था.. भाभी भी वहाँ चलने को तैयार हो गईं..
मैंने उसे फोन लगाया तो उसने बताया कि वो ऑफिस के काम से बाहर है.. रात तक आएगा.. और चाबी बिल्डिंग के वॉचमैन के पास है।

पहले भी मैं वहाँ अक्सर जाता रहता था.. जब दोस्त नहीं होता था.. सो मुझे कुछ भी गलत नहीं लगा। मैं और सोनम अक्सर वहीं मिलते थे।

मैंने कहा- चलो भाभी वहीं चलते हैं.. जहाँ मैं और सोनम मिलते हैं। आज अपनी भाभी गर्लफ्रेन्ड को भी वहीं ले चलते हैं।
वह मुस्कुरा कर बोलीं- जी ब्वॉय-फ्रेण्ड देवर जी।

रास्ते मैं हमारा बहुत हंसी मजाक होता रहा.. कुछ देर बाद हम दोनों वहाँ पहुँचे.. उसका बड़ा सा घर पूरा खाली था।
बिल्डिंग की लिफ्ट खराब थी.. तो सीढ़ियों से जाने के कारण हम दोनों ही थक गए थे।

भाभी जाकर सोफे पर बैठ गईं.. मैं उनके लिए पानी लाया.. एसी ऑन किया तो मालूम हुआ कि ड्रांइग-रूम का एसी शायद खराब था… तो हम बेडरूम में चले गए.. जो कि काफी सुन्दर था।

वहीं एसी ऑन करके बैठे गए।

मुझे गर्मी लग रही थी तो मैंने अपनी टी-शर्ट उतार दी.. अब मैं जींस और बनियान में था।

भाभी बोलीं- बहुत गर्मी लग रही है.. फ्रिज में देखूँ क्या है।
उन्होंने देखा फ्रिज में पानी और बियर थी.. बस उन्होंने मुझे बताया.. मैं खुश हो गया मैंने बीयर खोली और पीने लगा।

वो बोलीं- कबीर तुम्हें पता है.. जब मैं एयर होस्टेस थी.. तब मैंने भी एक-दो बार बियर व वोदका पी है।
तो मैंने कहा- आप भी लो न.. किसी को थोड़ा पता चलना है।
उन्होंने भी एक गिलास में ले ली और हम दोनों बेडरूम के सोफे पर बैठ गए और बात करने लगे।

उस दिन भाभी मुझे कुछ ज्यादा ही हॉट लग रही थीं। मैंने भी ट्राई मारने की कोशिश कि बीयर पीकर मूड सा बन गया था।

भाभी ने सूट से दुपट्टा भी हटा दिया था.. तो उनके तने हुए मम्मे बहुत सैक्सी लग रहे थे.. और उनकी बहुत ही गोरी क्लीवेज भी दिख रही थी।
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मैं अपने चारों भाईयों में सबसे ज्यादा हैंडसम था.. तो भाभी भी मेरी तारीफ कर रही थीं।

अब मेरी हिम्मत और बढ़ गई, मैंने कहा- भाभी यह वही बिस्तर है.. जहाँ मैं और सोनम मिलते हैं।
वो बोली- सिर्फ मिलते हो.. या कुछ करते भी हो!

अब भाभी मूड में सी लगने लगी थीं.. मुझे भी उनमें एक चुदाई का माल दिखने लगा था.. आगे क्या हुआ.. अगले भाग में कहानी इतनी अधिक रसीली है कि आप मस्त हो जाओगे।

आप अपने विचारों से अवगत कराने के लिए मुझे ईमेल जरूर कीजिएगा।
bansal.kabir@yahoo.com
हेलो दोस्तों, मैं राज हु. मेरी उम्र ३५ के ऊपर है अभी और मेरे लिए सेक्स एक नशा है बीमारी है, जो मुझे १४ साल की उम्र से लग गयी थी, जब मैं हॉस्टल में था. मुझे तभी सेक्स कहनिया पढ़ने और ब्लू फिल्म देखने का शौक था. पहले मैं सेक्सी किताबे पढता था और जब इन्टरनेट आ गया, तब इन्टरनेट पर सेक्सी कहानिया पढ़ने लगा. मैंने २००४ में एक सेक्स डेटिंग की वेबसाइट ज्वाइन की. जिस पर मुझे बहुत सारे खट्टे – मीठे और कड़वे अनुभव हुए. मेरी बहुत से लोगो से फ़ोन पर बात हुई और बाद में, मैं कई लोगो से मिला भी, कुछ सही निकले और कुछ लड़की के बजाय लड़के भी निकले. लेकिन, मैंने वेबकैम और फ़ोन सेक्स का बहुत मज़ा लिया. आज मैं आपको अपने जीवन ऐसा ही सेक्स वृतांत सुना रहा हु. जो मैंने एक कपल के साथ किया. वो लोग एम्पी के एक शहर में थे और मैं इंदौर में.
उस डेटिंग वेबसाइट पर मेरा प्रोफाइल बहुत सेक्सी बना हुआ था और मैंने अपने रियल फोटो, नंगे फोटो भी डाले हुए थे. फिर के दिन चैट करते हुए, मैंने उस कपल को पिंग किया और उस आदमी से बात होने लगी. उन्होंने कभी किसी के साथ ३स्म नहीं किया था. लेकिन, वो आदमी बहुत एक्साइट था और चाहता था, कि कोई और उसकी बीवी को उसके सामने चोदे. उसकी बीवी इस बात के लिए तैयार नहीं थी. तो उसने मुझसे उसकी बात करवाई और मेरी कुछ बातो के बाद, वो तैयार हो गयी. मैंने उनको अपने शहर आने के लिए कहा और एक होटल में उनके लिए कमरा बुक करवा दिया और अपने लिए भी, बिलकुल उनके पड़ोस में. मुझे ये तो मालूम था, कि पति तो तैयार है, पर बीवी कितनी वो पता नही था. लेकिन पति ने अपनी बीवी को ३सम और कपल सेक्स की ब्लूफिल्म बहुत दिखाई थी.
मैं उस दिन फ्री था, तो समय से पहले ही पहुच गया. उनके २ छोटे बच्चे थे. मैं उनके लिए कुछ गिफ्ट भी ले गया था. मैंने शाम को एक बड़ी सी सिल्क चॉकलेट खा ली थी. चॉकलेट खाने से थोड़ा सेक्स का टाइम बड जाता है और कंडोम भी एक्स्ट्रा टाइम वाले ही लिए थे. फिर, मैं सो गया था; की अचानक से उसका फ़ोन आया. वो आ चुके थे और मुझे खाने के लिए बुला रहे थे. हम सबने मिलकर खाना खाया और आपस में बात करके थोड़ा कम्फर्ट हुए. फिर मैंने अपने रूम में चले गया और पति ने कहा, कि बच्चो के सोने के बाद, वो मेरे कमरे में आ जायेंगे. रात को करीब ११ बजे, मेरे दरवाजे पर खटखट हुई और वो दोनों मेरे दरवाजे खोलने पर अन्दर आ गये. पति टीशर्ट और बरमुड़े में था और पत्नी रेड कलर की सेक्सी नाईटी में.
हम तीनो साथ में ले गये. पत्नी हम दोनों के बीच में थे. हम तीनो ने ऊपर एक ही चादर ले ली थी. पत्नी अपने पति के ऊपर चढ़ गयी और उसे किस करने लगी. मैंने थोड़ी देर तो उनको देखा और फिर आगे बढकर उसके बदन को सहलाने लगा. किसी अजनबी के हाथ लगते ही, उसके मुझे से एक सिसक निकली. फिर मैंने उसके पति की और देखा और उसने मुझे हाँ में सिर हिला दिया. मैंने अपने हाथो से उसकी पत्नी की नाइटी का नाडा खोकर उसके ऊपर का भाग निकाल दिया और अब वो सिर्फ शमीज़ में थे और उसने अन्दर ब्रा और पेंटी नहीं पहनी थी. मैंने आगे बड़ते हुए, अपने हाथ उसके बूब्स पर रख दिए और उसके बूब्स को तेजी से मसलने लगा. अब उन दोनों के होठ आपस से छुट गये और वो बिस्तर पर गिर पड़ी.
पत्नी के बिस्तर पर गिरते ही, मैंने अपने होठो को उसके होठो पर रख दिया और उसके चेहरे को पकड़ लिया और मस्ती में चूसने लगा. मैंने अपनी जीभ उसके मुह के अन्दर डाल दी और उसकी लार को पीने लगा. मैंने अपने होठो को उसकी जीभ के इर्द-गिर्द लपेट लिया और चूसने लगा. उसके मुह से सिसकिया निकलने लगी थी और उसकी सांसे उनका साथ नहीं दे रही थी. मैंने एक ही झटके में अपने आप को नंगा किया और अपने सारे कपड़े उतार दिए. मेरा लंड को पागलो की तरफ झटके मार रहा था. फिर उसके पति ने भी अपने कपड़े उतारे और उसको अपने से चिपटा लिया. शायद पहली बार चुदाई की वजह से और अपनी पत्नी को गैर मर्द की बाहों में देखने की वजह से ऐसा महसूस कर रहा था. मैंने अपनी जीभ को उसके कंधो और गर्दन पर लगा दिया. मेरी जीभ अब मस्ती में पूरी की पूरी उसकी गर्दन पर चल रही थी. वो पगला रही थी और उसका शरीर झूम रहा था और वो कामुक सिसकिया भरने लगी थी अहाहह अहहः अहहहः ह्म्म्मम्म ह्म्म्मम्म उम्म्मम्म…
उसके पति के चेहरे पर एक उदासी आने लगी थी, फिर भी वो हम दोनों को देख रहा था. अचानक से उसकी पत्नी पलटी और मुझे अपनी बाहों में भर लिया और कसकर दबोच लिया. मैं तो हक्काबक्का रह गया. उसने अपने एक हाथ से मेरे लंड को पकड़ा और उसको दबाने लगी. मैंने अपने हाथ में उसका एक निप्पल पकड़ा और उसको अपनी जीभ से चाटने लगा. वो मस्ती में मचलने लगी थी. फिर मैंने अपनी पूरी जीभ से उसके शरीर को चाटा और एकदम से उसकी चूत पर आ गया. फिर मैंने अपने को नीचे खिसकाया और अपनी जीभ को उसकी चूत पर रख दिया और उसको मस्ती में चाटने लगा. मैं उसको मस्ती चाट रहा था. मेरी जीभ उसकी चूत पर चल रही थी और मेरी उंगलिया उसके गांड के छेद को दबा रही थी. उसके मुह से मस्ती भरी आहे फुट रही थी अहहाह अहहः अहहहः अहाहह्हा.. ऊऊओ मर गयी. वो अपने पति की बाहों में लिपटी हुई सिस्कारिया ले रही थी.
माहौल बहुत ही गरम हो गया था. वो दम से उठी और मुझे पीछे धक्का दे दिया और मेरे ऊपर आ गयी और मेरे को अपने हाथ से मसलने लगी. कुछ देर अपने हाथो से मेरे लंड को मसलने के बाद, उसने मेरे लंड पर कंडोम चढ़ाया और उसको अपने मुह लेकर चूसने लगी. उसने मेरे लंड को अपने होठो से कस लिया और अपने दातो को मेरे लंड पर गडा दिया और मस्ती में चूसने लगी. वो मस्ती में मेरे लंड को चूसने लगी थी. कुछ देर मेरे लंड को चूसने के बाद, मैंने उसे लंड निकालने का इशारा किया और वो अपने पति की छाती पर सिर रख कर लेट गयी और उसके पति ने अपनी उंगलिया उनके मुह में घुस दी और मैंने अपने लंड को उसकी चूत पर सेट किया और एक जोरदार धक्का मारा. उसकी चूत कोई ख़ास टाइट नहीं थी और मेरा लंड एकदम से पूरा का पूरा उसकी चूत में उतर गया. उसने दर्द के मारे, अपने दांत अपने पति के हाथ में गडा दिए.
फिर उसने अपनी टांगो को कस कर बंद कर लिया और मैंने भी धक्के मारने शुरू कर दिए. वो भी अपने पति को पकडे हुए थी और अपनी गांड को हिलाकर मेरे हर धक्के का जोरदार जवाब दे रही थी. मैंने उसको करीब ३० मिनट तक चोदा. उस बीच वो करीब ३ बार झड़ चुकी थी. लेकिन, मैंने अभी तक नहीं पूरा हो पाया था. तो उसके पति ने मुझे अपना लंड निकालने को बोला. मैंने अपना लंड निकाला और उसको मुठ मारने को कहा. उसने ५ मिनट तक अपने टाइट हाथो से मेरे लंड की मुठ मारी तो एकदम से मेरा सारा पानी कंडोम में निकल गया. मैंने झटके से कंडोम निकाला और उसके साइड में गिर गया. वो अपने पति से चिपटी हुई थी और मैं उससे. मैंने अपने लंड को कुछ देर उसकी गांड पर रगडा और मज़ा लिया. फिर हम तीनो सो गये और फिर उसके पति ने मुझे रात में जगाया और मैंने उसको दुबारा से उसके सोते ही उसको चोदा. फिर अगले दिन, हम सब अपने – अपने घर चले गये.
दोस्तों, अब हम दोस्त है और मौका मिलने में मस्ती करते है. तो दोस्तों, कैसी लगी आपको मेरी ये कहानी…
Bhanji Ki Chikni Chut -1
नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम सुरेश है, मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ, मेरा कद 5 फुट 6 इंच है, 40 साल का हूँ, मेरा लण्ड 6 इंच लंबा और 2 इंच मोटा है।

यह कहानी मेरी जिंदगी में हुई सच्ची घटना है।
8 महीने पहले जब मैं रक्षाबंधन के अवसर पर अपनी दीदी के घर गया था। मेरी दीदी मुझसे उम्र में बड़ी है, वो अपने परिवार के साथ राजस्थान में रहती है।
मेरे जीजाजी ख़ुश मिजाज़ हैं और उनके 2 बच्चे हैं, बेटे की शादी हो चुकी है और बेटी जयपुर में इंजीनियरिंग पढ़ रही है। उसकी उम्र 22 साल है, उसका नाम सौम्या है।

मैं रक्षा बंधन से एक दिन पहले ही दीदी के घर पहुँच गया था, तब शाम होने को थी, और दीदी परिवार समेत मेरी राह देख रही थी।

मेरी नज़र सबसे पहले मेरी भांजी के ऊपर पड़ी, इसकी वजह यह थी कि मेरी भांजी अब मॉडर्न बन गई थी, उसने उस दिन नीले रंग का जीन्स शॉर्ट्स पहना हुआ था और ऊपर से एक सफ़ेद रंग की शर्ट… बाल भी खुले थे, ऐसा लग रहा था कि सामने कोई मॉडल खड़ी है।
उसका फिगर 34-28-36 है, स्माइल बड़ी अच्छी है उसकी।

फिर मैं घर के अंदर गया तो पता चला कि मेरे जीजाजी ने पार्टी का प्रबंध किया है।
मेरी दीदी मुझसे बोली- तुम नहा धोकर फ्रेश हो जाओ, जल्दी आ जाना, तुम्हारे जीजाजी कब से तुम्हारी राह देख रहे हैं।

मुझे हॉल के पास वाला कमरा ही दिया, मैंने अपना सामान कमरे के अंदर रखा, तभी वहाँ मेरी भांजी सौम्या तौलिया लेकर आई, मुझसे कहने लगी- मामू आप जल्दी से नहा कर आ जाओ।

मैं जब नहाने लगा तब सौम्या के फिगर उसकी चिकनी चूत के बारे में सोचने लगा और मेरा लंड खड़ा हो गया। लेकिन बाहर सब मेरी राह देख रहे थे, इस वजह से में जल्दी नहाकर बाहर आ गया।

मैं शॉर्ट्स और टी शर्ट पहन के बाहर आगया तो वहाँ महफ़िल सजी थी।

सब लोग वहाँ पहले से थे और मेरी खुशनसीबी से मुझे सौम्या के बगल वाली जगह खाली मिली, मैं उसके पास जाकर बैठ गया।

थोड़ी देर में पार्टी में मदहोशी छा गई, अब सौम्या और भी सुन्दर लगने लगी, मैंने मौके का फायदा उठाते हुए सौम्या की कमर को हाथों से पकड़ा और उसके बदन का आनन्द लेने लगा। क्योंकि में उसका मामा था इस वजह से किसी को यह बात गलत नहीं लगी लेकिन शायद सौम्या को कुछ अजीब लगा होगा, क्योंकि थोड़ी देर में वो वहाँ से उठी और अपना मोबाइल लेकर बाहर गई।

मुझे लगा कि मेरी चेष्टा से सौम्या को बुरा लगा होगा लेकिन थोड़ी ही देर में वो फिर से हॉल में आई और फिर से मेरे पास आकर बैठ गई और इस बार मेरे और भी करीब बैठ गई, अब उसने अपना एक हाथ मेरी जांघ के ऊपर रखा था, मैंने फिर से उसकी कमर सहलाना शुरू किया, उसके शॉर्ट्स और टॉप के बीच में उसकी नंगी कमर पर हाथ से सहलाने लगा, मेरे ख्यालों में मेरी भांजी सौम्या की चिकनी चूत ही थी…

बड़ी मुलायम चिकनी थी सौम्या की कमर।

मेरे जीजाजी को अगले दिन उनकी बहन के घर राखी बंधवाने जाना था, इस वजह से वो बोले कि वो जल्दी खाना खाकर सोएँगे।
दीदी ने उन्हें खाना परोसा।

तब सौम्या अपनी माँ से बोली- आप भी खाना खाकर सो जाओ, मैं मामाजी के साथ थोड़ी देर और रहूँगी और उनको खाना में ही दे दूँगी, आप जाकर सो जाओ।

थोड़ी देर बाद दीदी और जीजाजी अपने कमरे में सोने गए और हॉल में सिर्फ मैं और सौम्या थे।

थोड़ी देर में हमने भी खाना खाया और सौम्या ने सब काम निपटा लिया।
तब तक मैं सोफे पर बैठ कर टीवी देख रहा था।

थोड़ी देर में सौम्या भी किचन से हॉल आई और दूसरे सोफे पर लेट के अपनी मोबाइल में कुछ करने लगी।

उसे देख कर मेरे मन में कुछ हलचल हो रही थी, मुझे सौम्या की चिकनी चूत के और उसके साथ सेक्स करने के ख्याल आ रहे थे। मैं बाथरूम गया और वापिस आने पर वहीं सोफे पर जिस पर सौम्या लेटी हुई थी, आकर बैठ गया, सौम्या के दोनों पैरों को अपनी जांघों पर रखा और टीवी देखने लगा।

असल में टीवी से ज्यादा मेरा ध्यान सौम्या पर था जो अब मेरी बहुत करीब थी, उसके नंगे पैर मेरे ऊपर थे, देखने में बहुत मुलायम लग रही थी।
मैंने अपना एक हाथ उसके दोनों पैरों पर और दूसरा हाथ उसके पेट पर रखा था।
वो मोबाइल में व्यस्त थी और मैं उसे देखने में व्यस्त था, ऐसे में मेरा लंड खड़ा हो गया और सौम्या के पैरों को चुभ रहा था। मेरा आवेश बढ़ रहा था, अब मैं एक हाथ से सौम्या के नंगे पैर और दूसरे हाथ से उसका पेट सहलाने लगा और उसके मुलायम बदन का आनन्द लेने लगा।

थोड़ी देर ऐसे ही चलता रहा, फिर सौम्या ने अपना हाथ मेरे हाथ पर रख दिया जो हाथ उसके पेट सहला रहा था।
और अब उसने मेर्रा हाथ अपने हाथ में लिया उसे दिशा दिखा रही थी तो अब मेरा हाथ उसके टॉप के अंदर था उसकी ब्रा से थोड़ा ही नीचे।
पार्टी के वजह से हम दोनों मदहोश थे। सौम्या के चेहरे पर भी एक मुस्कान दिख रही थी लेकिन उसकी वजह मेरी हरकत थी या मोबाइल पर आया हुआ कोई सन्देश, इसका पता नहीं लग रहा था।

मैंने अपना हाथ उसके ब्रा से थोड़े ही नीचे रख के उसे फ़िराना बंद किया लेकिन दूसरे हाथ से उसके पैरों को सहलाना चालू रखा।
थोड़ी देर में फिर से सौम्या ने अपना हाथ मेरे हाथ के ऊपर रखा और उसे ऊपर की दिशा दिखाने लगी।
अब मुझे पक्का यकीन हो गया कि सौम्या भी मेरी तरह उत्तेजित स्थिति में है।

अब मैंने मेरा हाथ ऊपर की तरफ लेते हुए उसके ब्रा के ऊपर रखा और दबाने लगा।
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अब सौम्या भी अपना मोबाइल बंद रख के मेरी हरकतों का आनन्द ले रही थी। उसके चेहरे का हाव-भाव मुझे और बढ़ावा दे रहे थे।
अब मेरे हाथ ब्रा के अंदर जाने की कोशिश कर रहे थे।

मैंने उसकी एक चूची ब्रा से बाहर निकाला और उसे दबाने लगा और साथ साथ उसके निप्पल भी उँगलियों से छेड़ रहा था।
उसका निप्पल पूरा तना हुआ था, मैं हल्के से उसके निप्प्ल को नोचने लगा।

अब सौम्या की सांस तेजी से चलने लगी, मैंने उसे पूछा- कैसा लग रहा है?
कहानी जारी रहेगी।

Part of a series:

Chut Aur Gand Ki Sealen Toot Gayin-2
मैं सुबह उठा तो देखा कि साढ़े आठ हो गए थे.. 9 बजे से शीतल का एग्जाम था.. मैंने जल्दी से शीतल को उठाया और दोनों बाथरूम में नहा कर.. बिना ब्रेकफास्ट के ही निकल गए।

सेंटर में पहुँच कर देखा तो साढ़े नौ हो गए थे.. शीतल को एंट्री से मना कर दिया गया.. फिर वहाँ पर मुझे अपना एक परिचित सीनियर डॉक्टर रवि गेरा दिखाई दिया..

मैंने उससे बात की तो वो शीतल को पहले तो घूरने लगा उसने शीतल के मम्मों और उठी हुई गांड को ऐसे देखा कि अभी पटक कर चोदने के मूड में हो.. फिर वो शीतल को अन्दर ले गया और एग्जाम में बैठा दिया।
मुझे रवि की आँखों में एक वासना भरी कामुक चमक दिख चुकी थी।
बारह बजे शीतल बाहर आ गई.. तो डॉक्टर मेरे सीनियर रवि गेरा जिद करने लगे कि आज मेरे पास रुक जाओ।
मैंने बहुत मना किया.. लेकिन वो नहीं माना.. मुझे समझ आ गया कि आज यह शीतल का बाजा बजाने के मूड में है।

मैंने शीतल की तरफ देखा तो मुझे उसकी आँखों में रवि का अहसान चुकाने की ललक सी दिखी।
फिर मैंने शीतल के पिता जी से बात की तो वो बोले- कोई बात नहीं.. रुक जाओ.. सुबह आ जाना।

दोपहर में हम सब ने लंच किया और तीनों सो गए।

शाम को उठ कर रवि हमें घुमाने ले गया.. रात को रवि के कमरे पर आकर हमने थोड़ा ड्रिंक किया.. आज शीतल ने भी थोड़ी बियर लगा ली थी।

मैंने रवि से सीधे सीधे पूछा- शीतल से एन्जॉय तो नहीं करना है?
रवि ने ‘हाँ’ कर दी.. फिर मैंने शीतल से पूछा.. तो वो तुरंत मान गई।
वो हम दोनों से चुदने को राजी थी।

अब हमने खाना खाया और अपना पुराना काम शुरू कर दिया.. उस कमरे में हम तीनों नंगे हो कर पूरा मज़ा ले रहे थे।
एक बार में शीतल की चूत में अपना लंड डाल रहा था.. एक बार डॉक्टर रवि चोद रहा था।
हमने लैपटॉप में ब्लू-फिल्म लगा रखी थी.. एक बार चूत चोदने के बाद तीनों बात करने लगे।

फिर एक आईडिया आया कि बारी-बारी से चुदाई में मज़ा नहीं आया.. दोनों एक साथ करते हैं।

मैंने रवि से बोला- सुन्न करने वाली जैली ले लो..
तो वो क्लिनिक से जैली उठा लाया.. फिर हमने दूसरे राउंड की शुरूआत की.. इस बार हमारा प्लान शीतल की दूसरी सील तोड़ने का था।
पहले हमने शीतल को गरम किया.. हम दोनों भी गरम थे.. अब रवि नीचे लेट गया शीतल उसके लंड पर बैठ गई.. रवि का पूरा लंड शीतल की चूत के अन्दर था।

अब शीतल के मम्मे रवि की छाती से लगे हुए थे और उसकी गांड ऊपर की तरफ मेरे लौड़े की तरफ थी।
शीतल उछल उछल कर चूत चुदाई के मज़े ले रही थी..।

मैंने शीतल को बताया- शीतल अब में तेरी गांड मारूंगा.. थोड़ा दर्द हो सकता है..
शीतल ने ‘हाँ’ कर दी.. फिर मैंने रवि को बोला- दोनों हाथों से शीतल को कमर के पीछे से अच्छे से पकड़ लो।

मैंने सुन्न करने वाली क्रीम ली और आधी क्रीम शीतल की गांड में लगा दी.. पांच मिनट तक मैंने उसकी गांड को रगड़ा.. अब उसकी गांड सुन्न हो चुकी थी।
मैं शीतल के पीछे बैठा और अपना लण्ड शीतल की गांड के छेद पर लगा कर उसके ऊपर चढ़ गया।

मैंने सुपारा छेद में फंसा कर एक जोर का धक्का लगाया.. मेरा पूरा लण्ड शीतल की चिकनी गांड में बैठ गया और दूसरी और रवि का पूरा लण्ड शीतल की चूत में था।

इस प्रकार शीतल सैंडविच की तरह दो लौड़ों के बीच फंसी थी.. शीतल की पिछली वाली सील भी टूट चुकी थी.. लेकिन सुन्न होने के कारण उसे ज्यादा दर्द नहीं हुआ।

फिर जम कर धकापेल चुदाई हुई और शीतल की चुदाई कुछ इस तरह से हो रही थी कि मैं धक्का मारता तो रवि अपना लौड़ा बाहर को करता और जब रवि चूत में ठोकर मारता तो मैं लवड़े को शीतल की गांड से बाहर खींच लेता..
शीतल भी मजे से चुद रही थी.. उसको दोनों छेद एक साथ बजवाने में बहुत मजा आ रहा था। उसका सही वाला मेडिकल टेस्ट हो रहा था।

थोड़ी देर बाद तीनों झड़ गए.. और निढाल होकर बिस्तर पर आड़े हो कर लेट गए।
थोड़ी देर बाद फिर से ड्रिंक का दौर चला और अबकी बार शीतल ने भी दो पैग लगा लिए थे..

अब तीसरा ट्रिप चालू हो गया.. इस बार मैं आगे चूत की तरफ था और रवि पीछे उसकी गांड मारने को तैयार था।
शीतल खूब चुदी तीनों ने नशे में खूब चुदाई की। फिर सब झड़ गए और थकान के कारण नंगे ही लेट गए।
तीसरे ट्रिप के बाद मैं सो गया.. रात के 2 बज गए थे.. पर रवि और शीतल ने सुबह पांच बजे तक चुदाई करते रहे।

फिर मैं उठ गया.. मैं और शीतल नहाए और इस वक्त बस स्टैंड से अम्बाला की स्लीपर बस पकड़ कर सुबह दस बजे अम्बाला पहुँच गए।

इस प्रकार दो रातों में शीतल अपनी दोनों तरफ की सील मुझसे तुड़वा चुकी थी.. अम्बाला आने के बाद तो चुदाई हमारा रोज का काम हो गया।
बीच-बीच में शीतल सैंडविच बनने के लिए बोलती तो ग्रुप-सेक्स के लिए मुझे उसे लेकर चंडीगढ़ जाना पड़ता था।
इस प्रकार शीतल एक अच्छी चुदक्कड़ खिलाड़ी बन चुकी थी।

मेरा दिल भी शीतल की चूत चोदे बिना नहीं रह पाता था.. लेकिन अब शीतल ने बंगलोर में एडमिशन ले लिया तो हम नहीं मिल पाते हैं

शीतल मेरे साथ साथ लगभग दस से ज्यादा लंड ले चुकी थी.. जिसमे पांच इंच से दस इंच तक के लम्बे लौड़े थे।
मैं पहली बार ये अपनी कहानी बता रहा हूँ कहानी के बारे में आपके विचार जरूर जानना चाहूँगा जरूर लिखिएगा।
kanumalik994@yahoo.com

Part of a series:

Nangi Ladki Dekhne Ki Jigyasa-4
पिछले भाग में आपने पढ़ा कि नीलम अपने भाई भाई की सुहागरात की चुदाई का आँखों देखा हाल सुना रही थी।
अब आगे:
उनको खिड़की की तरफ आता देख मैं भी अपने रूम के ओट में हो गई यह देखने के लिये कि अब भैया भाभी क्या करेगें।
देखा कि भैया ने भाभी को उठा कर खिड़की पर बैठा दिया और बोले लो अब मूत लो लेकिन ध्यान रखना कि सुबह सबसे पहले बारजा धो लेना।
जब भाभी मूत ली तो भैया बोले- मैं तेरे लिये सोने के कंगन और सेक्सी ब्रा और पैंटी लाया हूँ, कल सुबह पहन लेना।
इतना कहकर दोनों सोने के लिये चले गये।

एक बार मैं फिर उनकी खिड़की की तरफ चल दी तो दोनों ही नंगे एक-दूसरे से चिपक कर को रहे थे।
उसके बाद मैंने भी अपने पूरे कपड़े उतरे और सोने के लिये चल दी।

भैया-भाभी की चुदाई की कहानी सुनाने के बाद नीलम ने मेरे होंठो को चूमना शुरू कर दिया। एक तरीके से वह मेरी जीभ का भी रसास्वादन कर रही थी।
रसास्वादन करते-करते नीलम बोली- शरद आज मैं तुमसे चुदने ही आई हूँ, आज मुझे जी भर के चोदो… मेरी जन्म-जन्म की प्यास बुझा दो।
मैं अगर अपनी बात कहूँ तो नीलम के अलावा उस तरह का सेक्स का मजा मुझे फिर कभी नहीं आया।

नीलम धीरे से मेरे निप्पल को चाट रही थी और बीच-बीच में वो दाँत गड़ा देती जिसका असर यह होता कि मैं भी उसके निप्पल को पकड़ कर मरोड़ देता, जिससे वो सिसकारने लग जाती।

‘शरद मेरी एक बात मानोगे?’
‘हाँ बोलो…’

‘जैसा-जैसा मैं कहूँ, वैसा-वैसा तुम करना, मैं तुम्हें स्वर्ग का आनन्द दूँगी। और यह मत बोलना यह गन्दा है, वो गन्दा है… बस करते जाना।’
‘ठीक है आज मैं तुम्हारी सब बात मानूगा। मैं साथ हि साथ उसकी बुर मैं उँगली करने लगा, वो गीली हो चुकी थी और उसका रस मेरे हाथो में था।
यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !
तभी उसने मेरा हाथ पकड़ा और अपने पूरे बदन को टच करते हुए उँगली को अपने मुँह में ले गई और रस को चूस लिया और अपनी जीभ मेरे में डाल दी।

हम लोग 69 की अवस्था में आ गये, वो मेरा लण्ड चूस रही थी और मैं उसकी चूत को चाट रहा था और उसकी चूत से आते हुए रस का मजा ले रहा था, ऐसा लग रहा था कि जैसे मैं कोई मलाई चाट रहा हूँ।

इतने में मैं भी झर गया और उसने भी मेरी मलाई को पूरा चाट गई। फिर हम दोनों एक दूसरे से अलग हुए और थोड़ी देर निढाल होकर जमीन पर ही लेटे पड़े रहे और नीलम बड़े प्यार से मेरे लौड़े को पकड़ कर सहला रही थी और मैं उसकी चूची को दबाता तो कभी उसके निप्पल मैं चिकोटी कटाता।

नीलम मुझसे बिल्कुल सट कर लेटी थी और अपनी एक टांग मेरे जांघों के ऊपर रखे हुए थी।
कभी-कभी तो मेरे सुपाड़े के आवरण को बड़ी बेदर्दी से इस प्रकार नीचे की ओर करती थी कि मेरे मुँह से हल्की सी सीत्कार निकल जाती थी और फिर अपने नाखून से उस कटी हुई जगह को कुरेदती थी।
उसकी इस हरकत से जहाँ मीठा-मीठा दर्द होता था वहीं एक अजीब सी उत्तेजना बढ़ती जाती थी और इस कारण मेरा लण्ड फिर से खड़ा होकर के अकड़ने लगा।

लण्ड महराज को अकड़ता देख वो धीरे से मुस्कुराई और बोली- बड़ा अकड़ रहा है, रूक जा थोड़ी देर मैं तेरी अकड़ निकालती हूँ।
इतना कहते ही नीलम उठी और तेजी से रसोई की ओर गई और वहाँ से एक कटोरी में तेल ले आई, धार बनाकर मेरे लण्ड पर तेल उड़ेली और लण्ड को तेल से सरोबार कर दिया।
फिर खुद भी जमीन पर लेट कर अपनी टांगों को उठा कर अपने सर से मिलाते हुए बोली- मेरे राजा, अपनी उँगली से तेल ले-ले कर मेरे चूत के छेद में डालो ताकि यह भी चिकनी हो जाये।

मैंने उसके कहे अनुसार किया, उसके बाद बबली ने पास पड़ी पलंग से रजाई जमीन पर बिछाई और अपने चूतड़ के नीचे तकिया रखा, उसके ऐसा करते ही उसकी चूत उपर की ओर उठ गई और चूत का मुहाना दिखने लगा।

मैंने भी घुटने के बल बैठ कर अपनी पोजीशन पकड़ी और अपने लण्ड को सेट करके धक्का मारा, लेकिन लण्ड अन्दर न जाकर ऊपर निकल गया।

फिर नीलम ने अपने हाथ से अपनी चूत को थोड़ा सा फैलाया और मैंने लण्ड को धीरे से सेट करके अन्दर झटके से डाला।
नीलम एक बारगी तो चिल्ला उठी और मुझे धक्के देकर हटाने लगी और बोली- कमीने हट… कमीने बहुत दर्द हो रहा है।

लेकिन मुझे लगा कि मैं अपना लण्ड निकाल नहीं सकता हूँ, इसलिए मैं थोड़ा रूक कर उसके दूध के निप्पल को चूसने लगा।
जब कुछ देर बाद उसका दर्द कम हुआ तो अपने चूतड़ को उठाकर मेरे लण्ड को अन्दर लेने की कोशिश करने लगी और मेरे कान में बोली- मेरे राजा, इसको फाड़ दो।

उसकी इस बात को सुनकर मैं भी लण्ड को अन्दर-बाहर करने लगा।
धीरे-धीरे वो बड़बड़ाने लगी- चोद मेरे को चोद, फाड़ दे मेरी बुर को। कब से तड़पा रही थी ये मादरचोद।
और पता नहीं क्या-क्या बोले जा रही थी।

थोड़ी देर बाद मेरा शरीर अकड़ने लगा और मैं खलास होकर उसके ऊपर गिर गया और थोड़ी देर उसके ऊपर लेटा रहा। फिर उसने मुझे धीरे से हटाया और खड़ी हुई और जब उसकी नजर निकले हुए खून पर पड़ी तो हँस कर बोली- देख तूने तो मेरा खून बहा दिया…

इतना कहकर वो पानी से भरा हुआ मग लाई और अपनी चूत को साफ करने लगी फिर बड़े प्यार से मेरे लण्ड को साफ किया और ऊपर से मेरा कुर्ता पहन कर चादर को लेकर बाथरूम में गई और चादर को अच्छे से साफ किया।

बाथरूम से निकल कर उसने क्रीम को उँगली में लेकर अपने बुर में डालकर क्रीम लगाने लगी।
मैंने पूछा- यह क्या कर रही हो?

तो बोली- थोड़ी जलन हो रही है, इसलिये क्रीम लगा रही हूँ।
फिर मेरे लण्ड की तरफ देखकर मुस्कुरा के बोली- देख कैसा मुरझाया सा लटका है, अभी थोड़ी देर पहले कैसे अकड़ रहा था। अब देखो तो पूरी अकड़ निकाल दी ना।

‘नीलम क्या मेरे लिये चाय बनाओगी? और यह क्या… मैं पूरा नंगा हूँ और तुम कुर्ता पहनी हो?’

‘लो बाबा, ये लो… कहकर कुर्ता उतार कर मुझे दे दिया और चाय बनाने लगी।

चाय बनाते समय जब नीलम के कूल्हे हिल रहे थे तो उसको देखकर मेरे लण्ड ने फिर से फुँफकार मारनी शुरू कर दी।

नीलम ने चाय दी और मेरी गोद में बैठते हुए बोली- लो चाय के साथ बिस्कुट भी खा लो।

इतना कहकर उसने लपक कर के मेरे लौड़े को पकड़ा और अपनी चूत में डाल लिया- राजा तुम मेरे को आज चोद के मस्त कर दो।
फिर वो मेरे कानों को अपने होंठों से किटकिटाए जा रही थी।

मैंने थोड़ी देर के बाद नीलम को उसी तरह गोद में उठाया और डायनिंग टेबल पर पटक दिया और उसके दोनो पैरों को अपने कंधे पर रखकर जोर से धक्के पे धक्के देता गया।
चोदते हुए उसकी हिलती हुई चूची देखना बड़ा ही खूबसूरत था।

उस दिन वास्तव में मेरी जिज्ञासा शान्त हुई थी कि मैंने नीलम को कई आसनों से चोदा और चुदाई का पहला पाठ सीखा।

तो दोस्तो, अगली कहानी में नीलम और मैंने क्या-क्या मस्ती की और बबली यानी नीलम की भाभी किस प्रकार मुझसे चुदी,
यह मैं आप लोगों को बताऊँगा।

तो दोस्तो, मेरी कहानी कैसी लगी। मुझे नीचे दिये ई-मेल पर अपनी प्रतिक्रिया भेजें।
आपका अपना शरद…
saxena1973@yahoo.com

Jija Sali Bhai Bahan Mast Chudai-1


हाय मेरा नाम बिन्दू साक्षी है, मेरी शादी आज से 3 साल पहले विमल से हुई थी। विमल मेरी माँ की सहेली का बेटा है.. वो एक बिजनेस कंपनी में जॉब करता है और अक्सर टूर पर रहता है।

हमारी सेक्स लाइफ ठीक-ठाक ही चल रही थी। शादी से पहले मैं बिल्कुल कुँवारी थी.. यानि किसी मर्द ने मुझे चोदा ना था। मेरा रंग गोरा है.. कद 5 फीट 5 इंच और जिस्म भरा हुआ है.. मेरी चूचियाँ 36 सी नाप की हैं.. चूतड़ों का उभार 36 इंच और बलखाती हुई कमर 28 इंच की है।

शादी से पहले मेरी एक सहेली थी शशि.. जो की मेरी सहेली भी थी और विमल की रिश्ते की चचेरी बहन भी थी।
शशि की शादी आज से दो साल पहले अविनाश से हुई थी.. अविनाश भी टूरिंग जॉब पर रहने वाला बन्दा था। शशि एक चालू लड़की थी.. जिसका कई लड़कों के साथ अफेयर चल रहा था। उसकी ससुराल दिल्ली में थी.. लेकिन अब उसके पति का ट्रान्स्फर हमारे शहर यानि गुड़गाँव में ही हो गया था।

उसका ट्रांसफर जब होने वाला था उससे पहले.. एक दिन मुझे शशि का फोन आया- साली बिन्दू.. मैं तेरे शहर आ रही हूँ.. खूब मज़े करेंगे दोनों.. अगर विमल भैया से मन भर गया हो.. तो मेरे पास बहुत हट्टे-कट्टे मुस्टंडे यार हैं.. जो मेरी तस्सली खूब अच्छी तरह करवाते हैं.. अगर विमल भैया के लंड से बोर हो गई हो.. तो बता देना.. मैं इस इतवार को ही पहुँच रही हूँ.. मेरा एड्रेस लिख लो.. वहीं मिलते हैं.. और बता.. विमल भैया का 6 इंच का लंड अभी तक तुझे खुश रख रहा है या नहीं?

मैं शशि की बात सुन कर शरम से लाल हो रही थी और कहीं विमल ना सुन ले.. इस लिए बोली- अच्छा यार.. मिलते हैं..

‘क़िसका फोन था.. बिन्दू..?’ विमल ने पूछा।
‘मेरी सहेली और आपकी बहन शशि का.. वो बता रही थी कि अविनाश का ट्रान्स्फर भी गुड़गाँव में हो गया है.. जल्द ही वो यहाँ रहने आ रहे हैं।’

अचानक ही मेरी नज़र विमल की पैन्ट के सामने वाले हिस्से पर गई.. जहाँ मुझे नज़र आ रहा था कि उसका लंड खड़ा हो रहा था।

‘अच्छा.. तब तो अच्छा है.. तेरी सहेली आ जाएगी और तेरा मन भी बहल जाएगा.. शशि बहुत हँसमुख लड़की है.. अच्छी कंपनी मिल जाएगी हम लोगों को..’
विमल स्वभाविक होकर ही बात कर रहा था लेकिन मुझे लगा कि वो शायद शशि के प्रति आकर्षित हो रहा है।

मेरी आँखों के सामने शशि का मांसल जिस्म उभर आया.. मेरी सहेली के नितंब भरे हुए थे.. जिनको अक्सर मैंने अपने पति को निहारते हुए देखा था।

आज कल मेरी और विमल की सेक्स लाइफ बोरियत भरी हो चुकी थी.. लेकिन शशि के नाम पर मेरे ठरकी पति का लंड तन गया था।
खैर.. देखेंगे क्या होता है..

मेरे घर में मेरी माँ और छोटा भाई संजय हैं.. संजय 20 साल का है और माँ का नाम रजनी है.. जो कोई 46 साल की हैं। पिता जी का देहांत हो चुका है.. शशि के घर में उसका भाई जिम्मी था।

इतवार के दिन मैं और विमल.. शशि से मिलने गए।

शशि ने बहुत टाइट जीन्स पहनी हुई थी जिससे उसके नितम्ब बहुत उभरे हुए थे। ब्लू जीन्स के ऊपर उसने सफेद टी-शर्ट पहनी हुई थी.. जिसमें से उसके भारी वक्ष बाहर आने को तड़प रहे थे।
उसके निप्पल कपड़े से बाहर निकलने को बेताब दिख रहे थे।

‘विमल भैया.. कैसे हो.. अपनी शशि की कभी याद नहीं आई.. भैया.. ऐसा लगता है.. आप तो हमको भूल ही गए.. लगते हो।’ ये कहते हुए शशि मेरे पति के गले लग गई और विमल ने उसको अपने आलिंगन में ले लिया।
दोनों ऐसा मिल रहे थे जैसे बिछड़े आशिक मिल रहे हों..

अविनाश ने इसका बिल्कुल बुरा नहीं माना और वो मेरी तरफ बढ़ा और मैं उसकी बाँहों में समा गई।

‘जीजाजी जी.. क्या हाल हैं? आपने तो कभी फोन भी नहीं किया.. क्या बात है.. शशि ने ऐसा क्या जादू कर दिया है.. जो हम याद ही ना रहे.. जीजाजी जी..?’
जीजा साली आपस में गले मिले !

अविनाश ने मुझे अपने आलिंगन में लेकर प्यार से मेरी पीठ पर हाथ फेरा।

‘क्या बताऊँ बिन्दू.. काम में इतना व्यस्त हो गया था.. कि टाइम ही नहीं मिला.. अब आराम से मिलेंगे.. बस इस हफ्ते मुझे टूर पर जाना है.. फिर अगले हफ्ते मैं फ्री हूँ.. विमल भैया.. क्या आप फ्री होंगे अगले हफ्ते? यार पार्टी करेंगे.. इसी बहाने हमारी बीवियाँ खुश हो जाएँगी और हम भी दो-दो पैग पी लेंगे।’

विमल हंस कर बोला- ठीक है.. मैं भी इस हफ्ते टूर कर लेता हूँ और अगला हफ़्ता फ्री रख लेता हूँ।

मैंने देखा कि विमल का हाथ शशि की चूचियां पर रेंग रहा था.. उधर अविनाश ने भी मेरी चूचियां को अंजाने में दबा दिया।

मेरे जिस्म में एक करेंट सा लगा और मैं थरथरा सी गई.. थोड़ी देर में विमल और अवी पीने लग पड़े और हम दोनों सहेलियां गप्पें मारने में लग गईं।

‘अब बता.. मेरी बन्नो.. कोई नया यार बनाया कि नहीं.. और या फिर सिर्फ़ भैया से ही चुदवा रही है? भैया तो नए शिकार की तलाश में लग रहे हैं.. बिन्दू.. मेरी रानी.. मर्द एक औरत से बंध कर नहीं रह सकता..’

मैं हंस कर बोली- और तेरे जैसी चालू लड़की एक मर्द से खुश नहीं रह सकती.. अब यहाँ मेरे पति को पटाने आई है? साली.. याद रखना.. विमल तेरा भाई भी है.. कहीं अपनी आदत से मजबूर हो कर मेरे पति को बहनचोद ही ना बना देना.. वर्ना मैं भी तेरे पति को पटा लूँगी..’

शशि मेरे गले में बाँहें डालती हुई बोली- बिन्दू.. मेरी रानी.. तेरा पति तो है ही बहनचोद.. ना जाने कब से बहन-बहन बोल कर मेरे साथ ठरक करता रहा है.. अभी भी भैया मेरी चूचियों पर हाथ फेर रहे थे.. और फिर मर्द का कोई धर्म नहीं होता.. जहाँ औरत देखी.. ये लोग चोदने का प्लान बना लेते हैं। अविनाश कौन सा कम है.. अगर मौका मिले तो अभी तुझे चोद डाले.. मर्द ज़ात तो होती ही है कुत्ता.. और मैं हूँ सेक्स से भरी हुई कुतिया.. जिसकी तसल्ली एक लंड नहीं करवा सकता.. खैर छोड़.. मेरी जान तू बता.. कोई यार बनाया है कि नहीं?’

मैंने बता दिया कि विमल के साथ सेक्स में अब वो मज़ा नहीं रहा.. लेकिन मैंने कोई यार नहीं बनाया.. बनाती भी किसे?

‘यार मैं तो चुदाई की भूखी हूँ और अगर तू भी असली औरत है.. तो तेरा भी मन तरह-तरह के लंड लेना चाहता होगा.. हम ऐसा करेंगे कि तू अवी को पटा लेना और मैं विमल भैया को पटा लूँगी.. एक-एक बार चुदवा कर हम परमानेंट स्वैपिंग करने का माहौल बना लेंगे। जब अवी तुझे और विमल मुझे चोदना चाहेगा.. तो हम दोनों ये काम खुल्लम-खुल्ला करने की शर्त रखेंगे.. बस फिर तो सब हमाम में नंगे हो जाएँगे.. उसके बाद हमारी चाँदी हो ज़ायगी मेरी रानी.. दिल्ली में मेरे यार रघु.. जगन.. वीरू और शाहिद रहते हैं.. सभी के साथ ऐश करवाऊँगी तुझे.. रघु और जगन का तो 10-10 इंच का लौड़ा है.. मेरी जान चुदाई क्या होती है.. तुझे सब पटा चल जाएगा.. तेरी चूत का भोसड़ा ना बन जाए तो कहना..’

मैं तो शशि की बात सुन कर दंग ही रह गई.. मेरी चूत से भी पानी बहने लगा और मुझे अपनी चूचियों पर अवी जीजाजी के हाथ अब भी स्पर्श करते महसूस होने लगे।

‘शशि.. साली तू बहुत गंदी है.. बिल्कुल रंडी.. एकदम कुतिया.. तू पटा लेगी विमल को?’

शशि तैश में आकर बोली- साली.. अगर शर्त लगाएगी.. तो 5 मिनट में विमल को बहनचोद ना बना दिया.. तो मेरा नाम बदल देना.. अभी बोल.. वो 5 मिनट में वो मुझे चोदेगा भी.. और दीदी भी बोलेगा.. तू घबरा मत.. बस अपने जीजाजी को पटाने की सोच.. खैर.. एक प्लान है मेरे पास.. हम भी अन्दर जा कर शराब पी लेते हैं.. और नशे का बहाना बना कर.. आज ही पति बदलने का काम कर लेते हैं..’

मैं कुछ समझ ना सकी तो बोली- वो कैसे?
शशि बोली- ये मुझ पर छोड़ दे.. अब चल..
मैं मन्त्र-मुग्ध सी उसके पीछे चल दी।

हम दोनों जब अन्दर गईं.. तो शशि शरारत से बोली- अवी.. यार हम को भी महफ़िल में शामिल नहीं करोगे? भैया.. क्या हमको शराब ऑफर नहीं करोगे?

शशि जानबूझ कर अपनी गाण्ड मटकाती हुई विमल के सामने गई और बैठ कर उसकी जांघों पर हाथ फिराती हुई बात करने लगी।
मेरा पल्लू भी सरक गया और अवी मेरे नंगे उरोज़ एक भूखे जानवर की तरह देखने लगा।

‘मेरा भी मन कर रहा है कि मैं एक पैग पी ही लूँ.. पीना कोई मर्दों का ही अधिकार नहीं है.. क्यों जीजू?’ ये कहते हुए मैं आगे की तरफ और झुक गई.. जिससे मेरी चूचियां अवी के सामने पूरी नंगी हो गईं।

उधर विमल ने भी शशि को अपनी तरफ खींच लिया और शशि ने अपना सिर उसके सीने पर रख दिया।

‘मुझे कोई एतराज़ नहीं.. अगर तुम लोग पीना चाहते हो.. क्यों अविनाश.. हो जाए थोड़ी सी मस्ती? लेकिन मेरी बहना.. कहीं पी कर बहक मत जाना..’

शशि ने भी अपनी बाँहें विमल के गले में डालते हुए कहा- भैया.. अगर बहक भी गई तो क्या होगा..? यहाँ मैं आपकी बहन हूँ और बिन्दू लगती है.. अवी की साली.. भाई-बहन में कोई भेद होता नहीं और साली तो होती ही आधी घरवाली.. क्यों अवी?’

वो बस हंस पड़ा और मेरे कंधों पर हाथ फेरने लगा।
मेरा बदन अब सेक्स की आग से जलने लग पड़ा था।

‘भैया.. हमको भी दो ना.. मैं गिलास ले कर अभी आई..’

शशि रसोई से गिलास लेने चली गई.. जब वो चल रही थी.. तो विमल बिना किसी शरम के शशि के मादक और ठुमकते हुए चूतड़ों को निहार रहा था और ये अवी भी देख रहा था।

‘विमल यार तू तो बहुत बेशरम हो गया है, बहनचोद.. अपनी बहन की ही गाण्ड घूर रहे हो? साले.. शशि मेरी पत्नी है..। तेरी बिन्दू यहाँ है.. उसको देख अच्छी तरह..’

विमल भी हंस कर बोला- अवी.. मेरे यार.. यारों में तेरा क्या और मेरा क्या.. जो मेरा है.. वो तेरा है और जो तेरा है.. वो मेरा है.. अब तेरी पत्नी पर मेरा भी तो कुछ हक है कि नहीं? जब तू बिन्दू को आलिंगन में ले रहा था तो मैंने कुछ बोला? यारों में सब कुछ बाँट लिया जाता है.. अगर किसी को एतराज़ ना हो.. चल एक और पैग बना.. आज का दिन यादगार बना देते हैं..’

यह मदमस्त कहानी आपके जिस्मों की उत्तेजना को और बढ़ाएगी.. बस अपने हाथ चलाते रहो.. और झड़ जाओ तो जल्दी से कमेन्ट लिख देना.. प्लीज़..
jaincharly5880@gmail.com

Chut Aur Gand Ki Sealen Toot Gayin-1

हैलो मेरा नाम कनु है, मैं पेशे से डॉक्टर हूँ, मैं त्वचा-विकार, चर्म-रोग, कॉस्मेटिक सर्जरी और गुप्त रोगों से सम्बंधित बीमारियों का इलाज करता हूँ.. इस कारण मेरे पास ज्यादातर सुंदर लड़कियां ही आती हैं।

मेरे उम्र 29 साल है.. मैंने आज तक बहुत सेक्स किया और हर प्रकार का किया है.. जैसे थ्री-सम.. फ़ोरसम.. ग्रुप-सेक्स.. आदि लेकिन मैं सुरक्षा का बहुत ध्यान रखता हूँ क्योकि आजकल सेक्स से होने वाली बीमारी बहुत ज्यादा हो गई हैं.. इसलिए अपनी सुरक्षा में ही आपकी भलाई है।

अब मैं अपनी कहानी पर आता हूँ..
मेरे एक मिलने वाले हैं, उनकी उम्र मुझसे काफी ज्यादा है, वो मेरे नजदीक ही रहते हैं।
उनकी एक लड़की शीतल है.. जिसने अभी साइंस से 12वीं क्लास पास की है। उसकी उम्र लगभग 18 साल होगी.. वो दिखने में बहुत ही सुंदर है.. करीब 47 किलो वजन.. गोरा रंग.. आकर्षक छवि.. 5’2″ लम्बाई है.. उसकी फिगर 32-26-34 का है।

वैसे तो हम रोज साथ मिलते रहते थे.. लेकिन मेरा उसके बारे में ऐसा कोई विचार नहीं था।

एक बार फरवरी में उसकी योनि में फंगल इन्फेक्शन हो गया.. जिससे वहाँ पर खुजली होने लगी.. सफ़ेद पानी आने लगा और कुछ दाने भी निकल आए थे।
उसकी मम्मी मुझे दिखाने के लिए उसको लाईं।

मैंने उसकी सलवार निकलवाई और चैक करके उसको दवाई दे दी।
इस तरह से वो 3 बार मुझसे दवाई लेकर चली गई।
अब तक मैं उस बारे में ऐसा-वैसा कुछ भी नहीं सोच रहा था।

कुछ दिनों बाद उसके एग्जाम खत्म हो गए थे.. तो उसने प्री-मेडिकल एंट्रेंस का फॉर्म भर रखा था.. उसका सेंटर दिल्ली कैंट मिला था। किस्मत ऐसी थी कि जिस दिन उसका एग्जाम था.. उसके पिता जी की चंडीगढ़ में कोई मीटिंग थी.. इसलिए वो उसके साथ नहीं जा सकते थे।

उन्होंने मुझसे रिक्वेस्ट की कि आप शीतल के साथ एग्जाम के लिए चले जाओ.. एक दिन की ही बात है।
तो मैंने भी ‘हाँ’ कर दी.. मैं और शीतल शाम को अम्बाला से गुड़गाँव वाली बस में बैठ गए।
करीब रात 9 बजे बस ने हमें धौलाकुंआ उतार दिया, हमारा सारा सफ़र लैपटॉप के सहारे कट गया।

वहाँ जाकर हम दोनों कैंट में एक होटल में कमरा लेकर रुक गए।
मैंने अपने लैपटॉप को ऑन किया और नीचे आर्डर देने के लिए चला गया।
मैं वापिस आया तो शीतल लैपटॉप में इन्टरनेट पर कुछ देख रही थी।

मैंने तौलिया लिया और बाथरूम में चला गया.. वहाँ मुझे ब्लू-फिल्म जैसी सीत्कारों की थोड़ी आवाज़ सी सुनाई दी.. मैं समझ गया कि शीतल ब्लू-फिल्म देख रही है.. लेकिन मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा था।

थोड़ी देर में मैं बाहर निकला तो शीतल ने लैपटॉप बंद कर दिया था। इतनी देर में वेटर एक बियर.. एक पैग व्हिस्की.. कोल्ड ड्रिंक और आइस लेकर आ गया।
मैंने बियर मग में डाली और पीना चालू कर दिया.. शीतल बाथरूम में फ्रेश होने के लिए चली गई।

थोड़ी देर में शीतल बाहर आई तो उसने एक लूज टी-शर्ट और एक निक्कर पहन रखा था।
मैंने उसको कोल्ड ड्रिंक दिया.. हम दोनों का ड्रिंक खत्म हुआ तो मैंने खाना मंगवा लिया।
हम दोनों ने खाना खाया.. फिर मैं बोला- चलो शीतल सो जाओ.. सुबह एग्जाम देना है।

हम दोनों बिस्तर पर लेट गए.. मुझे भी हल्का-हल्का नशा सा होने लगा था।
थोड़ी देर में शीतल ने अपना टॉपिक चालू कर दिया- मेरी वेज़िना में खुजली क्यों होती है.. पानी क्यों निकलता है।

वो मेरे पास आ गई.. धीरे-धीरे टॉपिक सेक्स पर आ गया और बातों-बातों में हम दोनों एक-दूसरे से सट गए।

मैंने शीतल को चूमना चालू कर दिया.. उसके गर्दन पर चुम्बन करना चालू कर दिया.. एक हाथ से उसकी चूची को दबाना चालू कर दिया।
फिर मैंने उसको उठा कर उसकी टी-शर्ट निकाल दी और उसके मिल्की मम्मों को अपने मुँह में ले लिया और दूसरे हाथ को उसकी पैन्टी में डाल दिया।
उसकी चूत पर हल्के-हल्के से रेशमी बाल थे।

मैंने उसके दाने को अपनी ऊँगली से रगड़ना शुरू कर दिया.. जिससे वो बहुत ज्यादा गरम हो गई।
फिर मैंने उसकी निक्कर और पैन्टी को निकाल कर साइड में रख दिया।
अब मैंने अपने भी सारे कपड़े निकाल दिए.. वो आंख बंद करके चित्त लेटी थी और ‘सी-सी’ की आवाज़ निकाल रही थी।

फिर उसने मेरी छाती को चूमना शुरू कर दिया। मैंने देखा कि उसकी चूत एकदम गरम थी और उससे पानी निकलने के कारण चूत चिकनी हो गई थी।
मैंने उसकी चूत पर अपने होंठों को रख दिया और अपनी जीभ चूत के अन्दर घुसेड़ दी.. इससे उसकी सिसकारी और तेज हो गई।

अब उसने अपनी आँखें खोल दीं और नीचे मेरे लिंग की तरफ देखा और खड़ी हो गई.. बोली- ओह माय गॉड.. इतना बड़ा.. मुझे और कुछ नहीं करना.. मैं मर जाऊँगी।
लेकिन मेरा सुरूर बन चुका था और ऊपर से शीतल एक कच्ची कली थी.. फिर कैसे छोड़ता उसे।
मैंने 5 मिनट तक शीतल को समझाया.. तो वो मान गई.. लेकिन बोली- धीरे-धीरे करना।

मैं उठा और बाथरूम से तेल की शीशी उठा कर ले आया.. तेल निकाल कर मैंने शीतल की चूत में अन्दर तक ऊँगली डाल कर खूब अच्छे से लगा दिया।
फिर अपने 7 इंच के कड़क औजार पर तेल लगाया।

मैंने शीतल की दोनों टाँगें चौड़ी करके उनके बीच में आ गया.. मैंने एक तौलिया शीतल के चूतड़ों के नीचे लगा दिया.. ताकि खून से बिस्तर गन्दा न हो सके।

फिर मैंने अपने लंड का सुपारा शीतल की चूत के सुराख पर लगा कर उसकी दोनों टाँगों को अपनी दोनों टाँगों के बीच फंसा लिया और उस पर चुदाई की मुद्रा में लेट गया। मैंने उसके होंठों को अपने होंठों में ले लिया ताकि वो चिल्ला न पाए।
अब सुपारा चूत में फंसा कर.. एक जोर का झटका लगा दिया.. जिससे शीतल चिल्ला उठी.. लेकिन उसके हिलने का कोई रास्ता नहीं था।

फिर मैंने एक धक्का और लगाया और अब पूरा लवड़ा शीतल की बुर के अन्दर था.. शीतल रोने लगी.. मैंने उसको समझाया-थोड़ी देर में सब ठीक हो जाएगा।
फिर धीरे-धीरे शीतल नार्मल हो गई और चुदाई के मज़े लेने लगी.. थोड़ी देर बाद दोनों का पानी छूट गया।

मैंने अपना लण्ड शीतल की चूत से बाहर निकाला.. तो शीतल खून से सना मेरा लौड़ा देख कर डर गई कि इतना खून कहाँ से आ गया।
मैंने समझाया- रानी.. यह आपका ही है मेरा नहीं।

फिर शीतल ने नीचे देखा तो पूरा तौलिया लाल हो गया था.. उसी तौलिया से मैंने शीतल की चूत को साफ़ किया और दोनों ने बाथरूम में जा कर धुलाई की।

फिर दोनों नंगे हो कर बिस्तर पर लेट गए..थोड़ी देर में फिर काम शुरू हो गया।
इस बार शीतल ने पूरा मज़ा लिया.. इस तरह हम दोनों सुबह के पांच बजे तक चुदाई करते रहे और फिर अचानक आँख लग गई और नंगे ही सो गए।

मैं सुबह उठा तो देखा कि साढ़े आठ हो गया था.. 9 बजे से शीतल का एग्जाम था.. मैंने जल्दी से शीतल को उठाया और दोनों बाथरूम में नहा कर.. बिना ब्रेकफास्ट के ही निकल गए।

सेंटर में पहुँच कर देखा तो साढ़े नौ हो गए थे.. शीतल को एंट्री से मना कर दिया गया.. फिर वहाँ पर मुझे अपना एक परिचित सीनियर डॉक्टर रवि गेरा दिखाई दिया।
मैंने उससे बात की तो वो शीतल को पहले तो घूरने लगा उसने शीतल के मम्मों और उठी हुई गांड को ऐसे देखा कि अभी पटक कर चोदने के मूड में हो.. फिर वो शीतल को अन्दर ले गया और एग्जाम में बैठा दिया।
मुझे रवि की आँखों में एक वासना भरी कामुक चमक दिख चुकी थी।

आगे क्या हुआ.. क्या रवि गेरा की वासना पूर्ण हो सकी? शीतल की सील दूसरी बार कैसे टूटी.. इसका क्या रहस्य था..? इस सब को जानने के लिए अन्तर्वासना पढ़ते रहिए.. अगले भाग में कहानी समाप्य है।
मुझे अपने विचारों से अवगत कराने के लिए मुझे ईमेल अवश्य लिखें।
kanumalik994@yahoo.com

Part of a series:


Meri Ma-Beti Ko Chodne Ki Ichcha-33कहानी के पिछले भाग में आपने पढ़ा..

मैं तुरंत ही बैठ गया और वो उठी और मेरे सामने अपने घुटनों के बल जमीन पर बैठकर मेरे लौड़े को पकड़ कर अपने मुँह में डालकर चूसने लगी।

बीच-बीच में वो अपनी नशीली आँखों से मुझे देख भी लेती थी.. जिससे मुझे भी जोश आने लगा।
और यह क्या.. तभी उसकी बालों की लटें उसके चेहरे को सताने लगी.. जिसे वो अपने हाथों से हटा देती।
तो मैंने खुद ही उसके सर के पीछे हाथ ले जाकर उसके बालों को एक हाथ से पकड़ लिया।

हय.. क्या सेक्सी सीन लग रहा था.. ओह माय गॉड.. एक सुन्दर परी सी अप्सरा आपके अधीन हो कर.. आपकी गुलामी करे.. तो आपको कैसा लगे.. बिल्कुल मुझे भी ऐसा ही लग रहा था।

फिर मैंने दूसरे हाथ से उसकी ठोड़ी को ऊपर उठाकर उसकी आँखों में झांकते हुए.. उसके मुँह में धक्के देने लगा.. जिससे उसके मुँह से ‘उम्म्म.. उम्म्म्म.. गगग.. गूँ.. गूँ..’ की आवाजें आने लगीं।
इस तरह कुछ देर और चूसने से मेरा भी माल उसके मुँह में ही छूट गया और वो बिना किसी रुकावट के सारा का सारा माल गटक गई।
अब आप लोग सोच रहे होंगे कि ऐसा कैसे हो सकता है.. पहली बार में बिना किसी विरोध के कोई कैसे माल अन्दर ले सकता है?
तो मैं आपको बता दूँ कि जैसे मैंने किया था.. वैसा ही उसने किया.. क्योंकि उसे कुछ मालूम ही नहीं था।

अब आगे:
फिर वो उठी और बाथरूम में जाकर मुँह धोया और वापस आकर मेरे पास बैठ गई और इस समय मैं और रूचि दोनों ही नीचे कुछ नहीं पहने थे जिससे मुझे साफ़ पता चल रहा था कि रूचि का चूत रस अभी भी बह रहा है।
तो मैंने उसे छेड़ते हुए पूछा- अरे तुम तो बहुत माहिर हो लण्ड चूसने में… कहाँ से सीखा?

तो बोली- और कहाँ से सीखूँगी… बस अभी अभी सीख लिया!
तो मैं बोला- कैसे?
तो वो बोली- जैसे तुम अच्छे से बिना दांत गड़ाए मेरी चूत को अपने मुँह में भर भर कर चूस रहे थे तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था, ऐसा लग रहा था कि तुम बस चूसते ही रहो… मुझे सच में बहुत अच्छा लगा और तुम्हारी उँगलियों ने तो कमाल कर दिया, जैसे तुमने अपनी उंगली नहीं बल्कि मेरे अंदर नई जान डाल दी हो! ठीक वैसे ही मैंने भी सोचा कि क्यों न तुम्हें भी तुम्हारी तरह मज़ा दिया जाये! बस मैंने तुम्हारी नक़ल करके वैसे ही किया और मुझे पता है कि तुम्हें भी बहुत मज़ा आया… पर यार, तुमने मेरी हालत ही बिगाड़ दी थी, मेरी तो सांस ही फूल गई थी पर अब दोबारा ऐसा न करना वरना… मैं नहीं करुँगी।

तो मैं बोला- फिर अभी क्यों किया?
वो बोली- क्योंकि तुमने मुझे इतनी मज़ा दिया था जिसे मैं अपने जीवन में कभी नहीं भुला सकती!

मैंने बोला- अच्छा अगर मैं इसी तरह तुम्हें मज़ा देता रहा तो क्या तुम भी मुझे मज़े देती रहोगी?
वो बोली- यह बाद की बात है पर सच में मेरे गले में दर्द होने लगा था!
मैंने बोला- अच्छा, अब आगे से ध्यान रखूँगा पर तुम्हें बता दूँ कि आने वाले दिनों में मैं बहुत कुछ देने वाला हूँ।
वो बोली- और क्या?

तब मैंने बोला- यह तो सिर्फ शुरुआत है, और अभी सब बता कर मज़ा नहीं खराब करना चाहता, बस देखती जाओ कि आगे आगे होता है क्या?

कहते हुए मैंने उसके होंठों को अपने होंठों में दबा कर उसके होंठों का रसपान करने लगा और वो भी मेरा पूर्ण सहयोग देते हुए मेरे निचले होंठ को पागलों की तरह बेतहाशा चूसे जा रही थी, मुझे तो ऐसा लग रहा था जैसे कि मैं जन्नत में हूँ, मुझे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि ये सब इतनी जल्दी हो जायेगा।
खैर मैं उसके पंखुड़ी समान होंठों को चूसते हुए उसकी पीठ सहलाने लगा और रूचि की मस्ती वासना से भरने लगी।
मैंने मौके को देखते हुए उसके चूचों पर धीरे से दोनों हाथ रखकर उन्हें सहलाने लगा और हल्का हल्का सा दबा भी देता जिससे रूचि के मुख से सिसकारियाँ ‘शिइइइइइइइ’ फ़ूट पड़ती जो आग में घी का काम कर रही थी।

फिर मैंने अपने दोनों हाथों को नीचे ले जाकर उसकी टी-शर्ट ऊपर की ओर उठाते हुए उसे किस करता रहा। तभी अचानक उसने मेरे दोनों हाथों को अपने हाथों से पकड़ लिया और बोली- यह क्या कर रहे हो? इसकी क्या जरूरत?

तो मैंने बोला- तुम्हें इसके पहले कुछ पता भी था या मुझसे सीखा?
वो बोली- तुमसे… पर तुम्हें तो मेरी चूत पसंद है न… वो तो कब की खुली है।
तो मैं बोला- जान असली मज़ा तो खुले में ही आता है न! मेरी बात मानो!

वो हल्की सी मुस्कान के साथ फिर से मेरी बाँहों में आ गई और मेरे कान के पास मुख ले जाकर फुसफुसाई- यार, मुझे शर्म आ रही है, अगर इसे न उतारा जाये तो क्या काम नहीं चलेगा?

मैं बोला- हम्म… बिल्कुल बिना टॉप उतारे वो मज़ा आ ही नहीं सकता।
तो वो बोली- क्यों?
तो मैंने मन ही मन खुश होते हुए अपने हाथों को ठीक से साध के उसके चूचों पर निशाना साधा और अचानक मैंने उसके गोल और मांसल चूचों को भींचते हुए मसक दिया जिससे उसकी दर्द भरी ‘अह्ह… ह्ह्ह्ह… आह्ह…’ निकल गई और मुझसे अलग हट कर अपने चूचों को सहलाने लगी और मुझसे गुस्सा करते हुए बोली- यार, ये क्या कर दिया तूने? मेरी तो जान ही निकल गई।

तो मैंने भी तुरंत बोला- इसी लिए तो कह रहा था कि बिना टॉप के मज़ा आता है और ऊपर से ग्रिप अच्छी नहीं बन पाती जैसा कि अभी तुमने खुद ही देखा, तुम्हें दर्द हुआ न?
तो बोली- सच में इसमें मज़ा आएगा?

तो मैंने उसको होंठों को चूसते हुए अपने होंठों को उसके कान के पास ले गया और एक लम्बी सांस छोड़ते हुए उसके कान में धीरे से बोला- खुद ही महसूस करके देख लो।
और एक बात मैंने जब सांस छोड़ी थी तो मैंने महसूस किया कि मेरी सांस ने रूचि के बदन की झुरझुरी बढ़ा दी थी जिससे उसके बदन में एक अजीब सा कम्पन महसूस हुआ था।

खैर फिर मैंने दोबारा धीरे से उसके कान के पास चुम्बन लेते हुए अपने हाथ उसकी टॉप में डाले और ऊपर की ओर उठाने लगा जिसमें रूचि ने भी सहयोग देते हुए अपने दोनों हाथ ऊपर की ओर उठा लिए जिससे उसकी चूचियाँ तन के मेरी आँखों के सामने आ गई।

दोस्तो, क्या गजब का नज़ारा था… जैसे सफ़ेद छेने पर गाढ़ी लाल रंग की चेरी रख दी हो!

मैं तो देख कर इतना मस्त हो गया कि मुझे कुछ होश ही न रहा और मैं उसके चूचों की घुंडियों को प्यार से मसलने लगा जिससे रूचि कुछ कसमसाई तो मैंने उससे धीरे से पूछा- क्या हुआ?

तो बोली- यार अच्छा भी लग रहा है और थोड़ा अजीब सा भी!

मैंने बोला- बस थोड़ी देर रुको, अभी तुम्हें मज़ा आने लगेगा।
तो वो बोली- अब क्या करने वाले हो?
यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !

मैंने बिना बोले ही उसके बायें चूचे के निप्पल को अपने मुँह में भर लिया और मस्ती में चूसने लगा जैसे लोग कोल्ड ड्रिंक में स्ट्रॉ डाल कर चुस्की लगाते हैं और दूसरे चूचे को अपनी हथेली से सहलाने लगा जिससे रूचि इतना मदहोश हो गई कि पूछो ही मत… वो ऐसे सीत्कार ‘शिइइइइइइ शीईईईईई आह्ह्ह ह्ह्ह अह्ह्ह’ कर रही थी जैसे रो रही हो !

पर जब मैंने उसके चेहरे की ओर देखा तो नज़ारा कुछ ओर ही था, वो अपनी गर्दन को पीछे किये हुए अपनी आँखें बंद करके निचले होंठों को दांतों से दबाते हुए मंद सीत्कार कर रही थी जैसे की पक्की रंडी हो!

अब आगे क्या हुआ जानने के लिए अगले भाग का इंतज़ार करें और मस्ती में रहें।
अपने सुझावों को देने के लिए आप मुझे मेल भेज सकते है और इसी आईडी के माध्यम से फेसबुक tarasitara28@gmail.com पर भी जुड़ सकते हैं।
सभी चिपचिपाती चूत वालियों और गीले लौड़े वालों को धन्यवाद।
तो अब आगे क्या हुआ.. जानने के लिए अगली कड़ी का इंतज़ार करें।
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बारिश में मिली चूत एक धोखा-1

Barish me Mili Choot Ek Dhokha-2
मैं उसके गले पर चुम्बन करता रहा और अपने एक हाथ को नीचे ले जाते हुए उसके पेटिकोट के अन्दर डाल दिया।
लेकिन अभी उसके रजस्वला अंग को नहीं छुआ था.. शनै: शनै: वो टूटने सी लगी.. और कामाग्नि में पूरी तरह डूब कर मेरे वशीभूत हो चुकी थी।

कुछ ही पलों के बाद वो सिर्फ़ पैन्टी और ब्रा में बची थी और उसके बालों से गिरता पानी.. उसको और ज़्यादा कामुक बना रहा था।
वो भी मेरे करीब आई और मुझे निर्वस्त्र करने लगी।

हम दोनों इस वक़्त सिर्फ़ अंतः:वस्त्रों में खड़े थे.. दोनों ही मानव जीवन के सबसे हसीन काम को पूरा करने के लिए.. मदन-मिलन के लिए तैयार थे..

मेरा मन तो उस पर टूटने का कर रहा था.. लेकिन माहौल की रंगीनी को समझते हुए मैंने सब्र करने का फैसला किया.. उसके कमरे में हलकी-हलकी सी रौशनी थी जो इस माहौल को और भी उत्तेजक बना रही थी।

वहाँ की हर एक चीज़ बड़ी ही लालसा-पूर्ण प्रतीत हो रही थी.. सुर्ख लाल गुलाब का एक पूरा गुच्छा टेबल पर रखा था.. तो परदे भी कुछ खजुराहो के मैथुनरत नायक-नायिकाओं के जैसे छाप के थे।

उसके कंधे पर बालों से पानी गिर रहा था.. मैंने अपने पूरे होंठों को खोल कर उसके कंधे पर हौले से काट लिया.. वो सिहर कर रह गई..
मैंने उसके शेष वस्त्रों को भी उसके जिस्म से विदाई दे दी। अब वो खुद एक नग्न अजंता की मूरत सी मेरे सामने खड़ी थी।
मेरी उंगलियां उसकी कमर से लेकर स्तनों तक लगातार चल रही थीं।

वो पूरी तरह से कामातुर हो चुकी थी.. फिर उसने भी एक-एक करके मेरे भी सभी कपड़े निकाल दिए।
हम दोनों इस वक्त पूर्ण प्राकर्तिक सौंदर्य यानि की नग्न अवस्था में एक-दूसरे को देख रहे थे। उसकी आँखें आधी ही खुली थीं.. क्यूंकि वो मस्त हो चुकी थी..

मैंने अपनी ऊँगली उसके रस से भीगे होंठों पर घुमाई तो उसने लपक कर उसको मुँह में ले लिया और चूसने लगी.. धीरे से उसने ऊँगली को काट भी लिया..

मुझे लगा कि साली यहाँ पर रोज़ यही करती होगी.. लेकिन अपना क्या.. मैंने तो सीखा ही यही था कि नंगी चूत और सांप जहाँ दिखे.. तुरंत मार देना चाहिए।

उस पूर्ण यौवना को मैंने अपनी गोद में उठाया और पास पड़े सोफे पर पटक दिया और उसके ऊपर लेट गया। मेरी जीभ उसके मुँह के अन्दर थी और वो उसको बेहद कामुकता से चूसने लगी। मेरा लंड उसकी चूत पर ही रखा हुआ था.. दोनों को एक गरम एहसास होने लगा था।

उसके बदन से खेलता-खेलता मैं 69 में पलट गया और उसकी चूत को चाटने लगा.. मेरे बिना कुछ कहे ही उसने मेरा लंड अपने मुँह में जड़ तक ले लिया.. मेरी तो सिसकारी ही छूट गई थी।
हम दोनों एक-दूसरे के मदन अंगों को चूस और चाट रहे थे।

थोड़ी ही देर में.. दोनों एक साथ झड़ गए.. उसने मेरे पूरे वीर्य को पी लिया।
लेकिन अभी हमारी हवस का अंत नहीं हुआ था.. चूसने की वजह से उसके होंठ और भी ज्यादा गुलाबी हो गए थे।
मैंने बिना मौका गंवाए उसके होंठों को मुँह में भर लिया और चूसने लगा।

हमारे बीच में एक संवाद-हीनता थी.. बस हम दोनों उन पलों को एन्जॉय कर रहे थे।

मैंने अपनी एक ऊँगली उसकी चूत में डाल दी थी.. जिससे वो मचल उठी और मुझे कस कर पकड़ लिया। मेरा लंड भी अब दुबारा अपनी जवानी पर आ रहा था।
फिर मैंने उसकी चूत में एक और ऊँगली घुसेड़ दी और उसके होंठों को चबाता रहा.. उसकी सिसकारी निकल नहीं पा रही थी.. वो पूरी तरह बेचैन थी..

उसकी मादक सीत्कारें मेरे जोश को और अधिक बढ़ा रही थीं। उसकी जीभ.. मेरे होंठों में दबी थी और मैं पूरी ढीठता से उसकी जीभ को अपने होंठों से चबा रहा था।

तभी उसने अपने मम्मों को मसलना शुरू कर दिया और मेरा ध्यान उसके मस्त मम्मों को चूसने का हुआ। शायद वो मुझे यही इंगित करना चाह रही थी कि मेरे इन मदनमोदकों को भी अपने अधरों से निहाल कर दो..

सच में उसके गोल स्तन.. जिन पर छोटे मुनक्का के दाने के बराबर उसके चूचुक एकदम कड़क होकर मुझे चचोरने के लिए आमंत्रित कर रहे थे।
मैंने अपने होंठों को उसके मदन-मोदकों की परिक्रमा में लगा दिया और जीभ से उसके उरोजों के बीच की संवेदनशील छाती पर फेरना आरम्भ कर दिया।

अनामिका एकदम से सिहर उठी और उसने मेरे सर को पकड़ कर अपने चूचुकों को चूसने के लिए लगा दिया। अब मेरे मुँह में उसके खजूर के फल के आकार के लम्बे चूचुक आ चुके थे.. मैं पूरी मस्ती से उनका मर्दन कर रहा था।

इधर मेरे मुँह में उसके चूचुक थे और उधर मेरा मूसल लण्ड.. पूर्ण रूप से तन कर उसकी चूत के दरवाजे पर अठखेलियाँ कर रहा था।

उससे भी अब रहा नहीं जा रहा था उसने अपना एक हाथ नीचे ले जाकर मेरे लौड़े पर लगाया और अगले ही पल मेरा लवड़ा उसकी चूत में पेवस्त होता चला गया।
ज्यों ही मेरा लवड़ा उसकी मदन-गुफा में घुसा उसकी एक मस्त ‘आह्ह..’ निकल गई।
मैंने भी ऊपर से जोर लगाया और उसने अपनी टांगें फैला दीं.. मेरा लण्ड उसकी चूत की जड़ तक पहुँच गया।

मैंने अपना चेहरा उठा कर उसकी आँखों में देखा.. वो किसी तृप्त बिल्ली जो मलाई चाट चुकी हो.. के जैसी अपनी आँखें बंद करके पड़ी थी और मेरे लण्ड को अपनी चूत में पूरा घुसा हुआ महसूस कर रही थी।

मैंने मुस्कुरा कर उसके माथे पर एक चुम्बन लिया और फिर उसकी चूत पर अपने लण्ड के प्रहारों को करना आरम्भ कर दिया।
आरम्भ में वो कुछ सिसयाई पर जल्द ही उसके चूतड़ों ने भी मेरे लौड़े की धुन पर नाचना शुरू कर दिया।

मैं अपनी कमर ऊंची उठाता.. वो भी अपनी कमर को नीचे कर लेती और ज्यों ही मैं अपना भरपूर प्रहार उसकी चूत पर करता.. वो भी मेरे लण्ड को लीलने के लिए अपने चूतड़ों को मेरी तरफ ऊपर को उठा देती।

इस सुर-ताल से हम दोनों का पूरा जिस्म पसीने से तरबतर हो गया था.. पर चूंकि एक बार मैं झड़ चुका था.. इसलिए मेरे स्खलन का फिलहाल कोई अहसास मुझे नहीं था और मैं पूरे वेग से उसकी चूत को रौंदने में लगा था।

अचानक अनामिका अकड़ने लगी और उसने एक तेज ‘आह्ह.. कम ऑन.. फ़ास्ट आई एम् कमिंग.. आह्ह.. ऊह्ह..’ सीत्कार की.. और उसने मेरी पीठ पर अपने नाख़ून गड़ा कर मुझे इस बात का संकेत दे दिया कि वो तृप्त हो चुकी थी।

उसके रस से चूत में मेरे लौड़े के प्रहारों से अब ‘फच.. फच..’ की मधुर ध्वनि गूँज रही थी।

कुछ ही पलों में मैं भी उसके ऊपर ढेर होता चला गया और मैं निचेष्ट हो कर एकदम से बेसुध हो गया.. मुझे सिर्फ इतना याद रहा कि उसने मेरे बालों में दुलार भरे अपने हाथ फिराए.. और मैं एक गहरी निंद्रा के आगोश में खो गया..
न जाने कितनी ही देर तक मैं सोता रहा.. मुझे कोई होश नहीं था..

फिर मुझे ऐसा लगा कि मेरे ऊपर तेज रोशनी और गरमी के कारण कुछ जलन सी हो रही है।
मैंने अपनी आँखें खोलीं.. सुबह हो चुकी थी.. पहले तो मुझे कुछ भी समझ में न आया.. तभी मोबाइल के बजने की आवाज आई.. तो मैं उठा..

मैं हतप्रभ था.. निर्वस्त्र था.. और एक खुली छत पर पड़ा था।

मेरा ध्यान मोबाइल कि घंटी की तरफ गया.. मैंने खुद को उठाने की चेष्टा की तो अपार दर्द के कारण गिर पड़ा।

फिर किसी तरह मैंने उठ कर अपने आप को संभाला तो देखा मेरा लण्ड खून से छिला हुआ था और मैं जगह से नाखून के निशानों से जख्मी था। एक बार के लिए मैं बहुत डर गया था तभी मेरा मोबाइल फिर बज उठा।

मैंने अपनी पैन्ट की जेब से मोबाइल को निकाला.. देखा स्क्रीन पर मेरे भैया का नम्बर था.. मैंने फोन उठाया और उधर से आवाज आई- किधर हो तुम कल रात से घर नहीं आए.. किधर रह गए.. तुम्हारा फोन कितनी बार लगाया पहले तो लग ही नहीं रहा था और अब जाकर लगा।

एक साथ इतने सवाल.. मेरा माथा घूम गया.. तभी मैंने कहा- मैं अभी आ रहा हूँ सब बताता हूँ। मैंने इतना कह कर फोन काट दिया।

मैं किसी तरह हिम्मत जुटा कर उठा.. देखा तो पाया कि यह एक अर्धनिर्मित बिल्डिंग की छत थी।

मैंने किसी तरह अपने कपड़े पहने और नीचे आया तो देखा.. इस निर्जन इलाके में मेरी बाइक सही-सलामत खड़ी थी.. मैंने लंगड़ाते हुए बाइक को स्टार्ट की और बैठ कर जैसे ही बाइक घुमाई.. एक तेज आवाज से वही रात वाली बाइक मेरे बगल से निकली और उस पर बैठे हुए व्यक्ति ने एक जोर का अट्टाहस किया।

मेरी गाण्ड फट गई.. मैं समझ गया कि रात को मैं किसी चुड़ैल को चोदता रहा.. मैं एकदम से डर कर भागा.. घर पहुँचा तो सबने मुझे घेर लिया।
मैं चुप था.. मेरी चोटों को देख कर भैया ने पूछा- क्या हुआ..? कोई दुर्घटना हो गई थी क्या..?
मुझे जैसे उत्तर सूझ गया मैं धीरे से कहा- हाँ..।

मैं उधर पड़े हुए एक दीवान पर सीधे गिर गया और घर वालों ने मेरी तीमारदारी आरम्भ कर दी।
मुझे सिर्फ उसका एक ही वाक्य याद आ रहा था ‘पर्सनल जरूरत.. हा हा हा..’

मित्रों यह मेरी सत्य घटना है.. मैं अपना नाम नहीं बताना चाहता हूँ। मुझे आपके कमेंट्स का भी कोई इन्तजार नहीं है हालांकि मेरे मन में था सो मैंने आप सभी को बता दिया है.. कृपया चुदास के चलते सुनसान रास्तों पर महिलाओं और युवतियों से खुद को बचाएं.. वे चुड़ैल हो सकती हैं।
sen.antarvasna@gmail.com