Bewafa Shauhar Dagabaz Saheli-1


मेरा नाम फराह परवीन है, मैं अहमदाबाद में रहती हूँ। अन्तर्वासना पर मेरी यह पहली कहानी है। मुझे पता नहीं कि यहाँ सारी कहानियाँ वास्तव में सच्ची हैं या कल्पना मात्र लेकिन जो भी हो जब से नगमा ने मुझे अन्तर्वासना के बारे में बताया, तब से मैं लगभग दो कहानी यहाँ रोज पढ़ती हूँ। यहाँ कहानियाँ पढ़कर मैं काफी रोमांचित महसूस करती हूँ और अच्छा टाइमपास भी हो जाता है।

आज मैं आपको अपनी सच्ची कहानी बताने जा रही हूँ और इसमें कल्पना का लेशमात्र भी नहीं है। सेक्स के मामले में मैं काफी फ्रैंक हूँ लेकिन एक हद तक। यह अल्लाह का दिया एक खूबसूरत तोहफा है। प्रेम ही विश्व में केवल एक ऐसी चीज है जो हमें जीवित रहने के लिए उत्साह प्रदान करती है।

दो साल पहले मेरा निकाह हुआ और मैं यहाँ आ गई। मेरे शौहर किराने की एक दुकान चलाते हैं और मैं और मेरी एक सहेली नगमा हम दोनों एक बुटीक चलाते हैं।
नगमा काफी अच्छी लड़की है बस उसमें एक ही कमी है वह बोलती बहुत है और कहीं भी कुछ भी बोल देती है। खैर वह मुझे बहुत पसंद है और हम दोनों बहनों की तरह रहते हैं।

मेरे शौहर मुझे बहुत प्यार करते हैं और हम अपनी जिन्दगी में बहुत खुश हैं। बस कभी-कभी पैसों की बहुत तंगी आ जाती है पर जहाँ मुहब्बत हो, वहाँ ये सब समस्याएँ बहुत छोटी हैं। मुझे फेसबुक चलाने और ऑनलाइन फ्रेंड बनाने का बहुत शौक है इसलिए अधिकतर टाइम फेसबुक पर बिताती हूँ।

मेरी लम्बाई 5 फीट 3 इंच है, मेरा फिगर 32-28-32 है। मुझे सजना संवरना काफी अच्छा लगता है और इसीलिए मुहल्ले के बहुत सारे लड़के मुझे घूरते रहते हैं।
उन्हीं में से एक लड़का था आसिफ… कई बार इनकी अनुपस्थिति में मुझे दुकान पर बैठना पड़ता है, खासकर जब वे नमाज के लिए जाते हैं, तब वह दुकान पर बहुत बार आता है और सिगरेट वगैरा खरीद के चला जाता है।
उसकी लम्बाई लगभग 6 फीट है और साँवले रंग का औसतन शरीर है। मुझे पता था कि वह भी मुझसे फ्रेंडशिप करना चाहता है पर वह बोलता बहुत कम है पर उसकी आँखें बहुत कुछ बयाँ कर देती हैं।

दो माह पूर्व में अब्बू का इंतकाल हो गया और मुझे घर जाना पड़ा। व्यस्तता के चलते मेरे शौहर मेरे साथ नहीं आ पाए।
मैं तीन दिन घर पर रुकी और फिर मुझे बुटीक के लिए वापस आना पड़ा। अब्बू के इंतकाल की वजह से मैं काफी परेशान थी वह मुझे बहुत प्यार करते थे।

दोपहर में लगभग एक बजे मैं घर पहुँची दुकान बंद थी तो मैंने सोचा शायद सिराज मार्किट गये होंगे तो मैंने सोचा नगमा भी अकेली होगी तो इससे अच्छा बुटीक चली जाती हूँ और मैं बुटीक चली गई।

मेरे घर से बुटीक तक जाने में लगभग 10 मिनट लगते हैं। मैं सीधे अंदर जाने वाली थी पर मैंने अंदर से आ रही कुछ आवाज सुनी और मैं रुक गई। मेरे अंदर का जासूस सक्रिय हो गया था, मैं सीढ़ी से उतरकर नीचे आई और बाढ़ पार किया और बैक साइड की खिड़की पर पहुँची और आँख टिकाकर अंदर देखा तो मैं सन्न रह गई।
मेरे शौहर की बेवफाई

नगमा नीचे लेटी हुई थी और मेरे शौहर उसके ऊपर चढ़े हुए थे। क्षण भर में मेरे दिल से शौहर के लिए सारी इज्जत निकल गई। मुझे बहुत गुस्सा आया पर मैंने खुद पर काबू किया और चुपचाप देखने लगी।

मेरे शौहर खड़े हुए उनका 6 इंच का लिंग पूरा तना हुआ था। उन्होंने नगमा को खड़ा किया और उसे पीठ के बल झुका दिया और उसके नितम्बों पर एक जोर की चपत मारी तो नगमा कराह उठी। उन्होंने लिंग पर थोडा थूक लगाया और पीछे से एक ही झटके में नगमा की योनि में प्रवेश करा दिया।
नगमा की सिसकारी निकल गई और हल्के हल्के अपने नितम्बों को आगे पीछे हिलाने लगी। मुझे नगमा पर काफी गुस्सा आ रहा था पर उस वक्त वह दृश्य देख कर मैं भी कामुक होने लगी।

मेरी प्यास भी दो हफ्ते से नहीं बुझी थी। मेरा बयां हाथ अपने आप ही मेरी साड़ी के उपर से मेरी योनि को सहलाने लगा।

उधर मेरे शौहर जोर जोर से झटके मार रहे थे और नगमा की हल्की सिसकारियाँ उह उह आह आह ऊई आ आ आह पूरे कमरे में गूंज रही थी… मैं सेक्स में पूरी तरह खो चुकी थी।

जहाँ पर मैं खड़ी थी वहाँ से मुझे सामने मेरे शौहर के नितम्ब दिखाई दे रहे थे वह पूरी ताकत के साथ नगमा के नितम्बों के साथ टकरा रहे थे। मेरी योनि ने रस छोड़ना प्रारम्भ कर दिया और मेरी सांसे तेज होने लगी तभी मैंने अपनी पीछे चबूतरे पर आहट महसूस की, मैंने हाथ योनि से हटाया और झट से पीछे देखा।
वहाँ आसिफ खड़ा था और मुस्कुरा रहा था। मुझे कुछ बोलने को नहीं आया पर उसने तुरंत बोला- भाभीजान, जरा दुकान पर चलियेगा कुछ सामान चाहिए था।
वह फिर मुस्कुराया।

‘ह्म्म्म…’ मैंने सहमति में सिर हिलाया और हल्के से फिर अंदर देखा, मेरे शौहर नगमा के गुदाद्वार पर वेसलीन लगा रहे थे।
मुझे अपने गुदा द्वार पर हल्की सी टीस महसूस हुई और मैंने अपने नितम्ब सिकोड़ लिए।

मैं तेजी से चबूतरे से होती हुई रोड पर आई, आसिफ मेरे पीछे पीछे चल रहा था।

मैं दुकान पर पहुँची, दुकान खोली, मुझे काफी उत्तेजना हो रही थी कि कब आसिफ जाए और मैं ऊँगली करके अपनी प्यास बुझाऊँ।

‘एक गोल्ड फ्लैक देना।’ आसिफ धीरे से बोला।

‘और…?’ मैंने डिब्बी से सिगरेट निकालते हुए पूछा।

‘जो आप दे सको!’ आसिफ कातिल मुस्करहट से मुस्कुराया।
मैं उसका व्यंग्य समझ चुकी थी, उसे सब कुछ पता था।
मैंने एक बार सोचा कि क्यों ना इससे अपनी प्यास बुझा लूँ।
मेरे शौहर की बेवफाई ने मुझे पागल कर दिया था, मेरे सर पर गुस्सा और सेक्स एक साथ सवार थे।

जवाब में मैं हल्के से मुस्कुराई।

मेरे अंदर का डर और समझ सब गायब हो चुके थे, मैं बस सेक्स करना चाहती थी… जी भर कर सेक्स, मुझे मेरी योनि में गर्माहट महसूस हो रही थी ऐसा लग रहा था जैसे हजारों चीटियाँ मेरी योनि में काट रही हों।

आसिफ मेरी मनोस्थिति समझ चुका था। वह काउन्टर से अंदर आया और मुझे लगभग पकड़ते हुए बोला- भाभीजान, ऐसा हो जाता है जोश में।
कहानी जारी रहेगी।

Darr Ke Aage choot Hai


डर के आगे चूत है? आप सोच रहे होंगे कि मैंने गलत लिख दिया क्योंकि कहावत तो यह है कि ‘डर के आगे जीत है’
लेकिन मेरी यह कहानी पढ़ कर आप समझ जायेंगे कि ‘डर के आगे चूत है’

दोस्तो! यह मेरी पहली कहानी है आशा करता हूँ कि आप सब को ज़रूर पसंद आएगी।

मेरा नाम शिवम है और मैं यूपी का रहने वाला हूँ। मेरी उम्र 18 साल और मैं एक मस्त पर्सनालिटी वाला लड़का हूँ।
यह बात अभी 3 महीने पहले की है।
मेरी आंटी जो की मेरे घर के पड़ोस में ही रहती हैं दिखने में एकदम मस्त हैं, बॉडी फिगर 34-30-34 होगा। मैं हमेशा से ही उनको चोदने के बारे में सोचा करता था। आंटी का स्वाभाव एकदम सीधा था।

एक दिन की बात है मैं उनके घर गया, आंटी चुप चाप बैठी हुई थी, आंटी शायद अकेली थी फिर भी मैंने औपचारिकता में पूछा- आंटी, चाचा नहीं हैं क्या?”

आंटी ने कहा- नहीं, वो बाहर काम से गए हैं।

मैंने कहा- कोई बात नहीं।
और उनसे इधर उधर की बातें करने लगा।

हम लगभग आध घंटे यूं ही बात करते रहे। तभी आंटी उठी और कहा कि मुझे खिड़की में अखबार लगाना है क्योंकि कमरे में धूप बहुत आती है।
वो अन्दर गई और अखबार लाकर खिड़की पर लगाने लगी।
जब अखबार लग गया तो आंटी ने मुझसे कहा- देख सही लगाया ना?

मैं चारपाई पर बैठा था, मैं उठा और जाकर आंटी के पीछे खड़ा हो गया और कहा- हाँ आंटी, एकदम ठीक लगाया।

और धीरे धीरे थोड़ा और आगे बढ़ गया जिससे मेरा शरीर उनके जिस्म से छू गया। वो थोड़ी देर खड़ी रही फिर पीछे घूम गई।
मैंने भी सोचा कि मौका अच्छा है, क्यों न फायदा उठाया जाये!
फिर भी हिम्मत नहीं पड़ रही थी आंटी से कुछ कहने की… मेरी साँसें और धड़कनें दोनों तेज़ हो रही थीं, मैंने हिम्मत बाँधी और मैंने आंटी से कहा- आंटी, एक बात कहूँ पर किसी से कहना मत और नाराज़ भी मत होना।

आंटी ने कहा- बोलो, क्या बात है?

मैंने फिर आंटी से हामी भरवाई। फिर मैंने आंटी के दूध की तरफ इशारा करते हुए कहा- क्या मैं आपके ये देख सकता हूँ/

इतना कहते ही मेरी तो फट गई लेकिन मेरी किस्मत अच्छी थी, आंटी ने कहा- देख लो।

मुझे विश्वास नहीं हुआ कि वो इतनी जल्दी और आसानी से तैयार हो जाएँगी। ये सब मेरे साथ पहली बार हो रहा था इसीलिए मैं बहुत ही जल्दी और जोश में था, खड़े-खड़े ही मैंने उनके ब्लाउज के हुक खोल दिए।
हुक खोलते ही उनके सावले रंग के स्तन बाहर लटक गए, मैंने तुरंत ही उनको मुँह में लेकर पीना शुरू कर दिया।
पहली बार जन्नत का एहसास धरती पर हुआ।

पीने के बाद मैंने उनके रसकलशों को हाथ में लिया और मसलना शुरू किया, दबाने से उनके दूधों में दर्द हो रहा था इसलिए वो थोड़ा विरोध कर रही थी फिर भी मैं उन पर ज्यादा ही हावी था।
अब मैं नीचे झुका और उनकी साड़ी ऊपर उठा दी जिससे उनका लंड प्रवेश द्वार यानि की चूत साफ़ दिखने लगी, उनकी चूत पर हल्के काले बाल थे।
मैंने पहली बार किसी की बुर देखी थी, मैंने तुरंत उनकी बुर में एक ऊँगली खोंस दी। तभी आंटी ने साड़ी नीचे कर ली और जाकर बिस्तर पर लेट गई।
मैं भी जाकर बिसर पर बैठ गया उअर आंटी की साड़ी उनके पेट तक उठा दी जिससे उनकी सांवली चूत साफ़ दिखाई देने लगी।

दोस्तो, वो भी क्या नज़ारा था… पेट तक उठी साड़ी ब्लाउज के खुले हुक… एक दूध इधर और दूसरा उधर लटक रहा था।

पहली बार होने के कारण मैं बहुत जल्दी में था इसलिए मैंने तुरन्त अपनी पैन्ट उतारी और फिर निक्कर ने उतारते ही मेरा साढ़े छः इंच लम्बा काला भुजंग पेड़ में लड़के बैंगन की तरह लटक गया।

तुरन्त ही आंटी ने उसे अपने हाथों में ले लिया और आगे पीछे करने लगी।
मैंने भी समय का ध्यान करते हुए अपना लंड उनके हाथों से छुड़ाया और उनको पीने के लिए कहा, उन्होंने मना कर दिया, बोली कि मुझे उलटी आ जाती है।
मैंने भी जोर जबरदस्ती नहीं की।

अब मुझसे भी नहीं रहा जा रहा था, मैंने अपना लौड़ा उनकी सांवली चूत पर टिका दिया और एक जोर का धक्का मारा, मेरा लंड अन्दर चला गया था और मैं धक्के मारने लगा लेकिन यह मेरा वहम था कि मेरा लौड़ा उनकी चूत में है, अभी मेरा लौड़ा फिसलकर उनकी जांघ के किनारे पर बैठ गया था।
मेरे साथ ये सब पहली बार हो रहा था इसीलिए मुझे अनुभव नहीं था।

फिर आंटी ने मेरा लौड़ा अपना हाथ में पकड़ा और उसका गुलाबी सुपाड़ा अपनी बुर पर रखा और धक्का मारने को बोली। मैंने भी एक जोर का धक्का मारा और मेरा आधा लंड उनकी चूत में घुस गया। मुझे भी बड़ी जल्दी थी चुदाई की, इसलिए मैं आधे घुसे लंड से ही धक्के मारने लगा।

15-20 झटकों के बाद मेरा लण्ड झटकों के दौरान ही उनकी बुर में पूरा घुस गया। अब मैं और जोर जोर से झटके मारने लगा। उनके मुख से कामुक सिसकारियां निकल रही थी- आह आआह ऊउह आह स्स्स्स हम्म।
ये मुझे और उत्तेजित कर रही थीं। आंटी भी अपनी गांड उठा-उठा कर चुद रही थी। चुदाई के दौरान झटके मारते मारते उनकी चूत इतनी आग हो गई थी कि अगर मैं कंडोम लगाता तो शायद वो भी फट जाता।
चूत की गर्मी से मेरा लंड और ज्यादा फूल सिकुड़ रहा था, ऐसा लगता था कि कहीं मेरा लंड चूत के अन्दर फट के विस्फोट ना कर दे।
चुदाई के दौरान मैंने आंटी से पूछा कि मेरा छोटा तो नहीं है? मज़ा तो आ रहा है ना?
वो मुस्कुरा दी।
मैं भी झटके मारे जा रहा था।

लगभग दस मिनट बाद आंटी ढीली पड़ गई मैं समझ गया कि वो झड़ चुकी हैं।
बस फिर कुछ देर बाद मेरा भी झड़ने वाला हुआ, मैंने कहा- आंटी, मेरा आने वाला है, कहाँ निकालूँ?
आंटी ने कहा- मेरी चूत में ही निकाल दे।

दो चार झटकों के बाद जब मेरा निकलने वाला हुआ तो मैं आहिस्ता-आहिस्ता मजे-मजे से अन्दर बाहर करने लगा और फिर फच्च से मेरा रस उनकी चूत में भर गया।
जब मेरा रस निकला तब मुझे कैसा और कितना मज़ा आया मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकता।
अब मैंने अपना भुजंग बुर से बहार निकाला तो उसकी सूरत देखने वाली थी। लौड़े का पूरा मांसल हिस्सा खून सा लाल हो गया था और लंड में हल्का सा दर्द भी हो रहा था। शायद पहली बार था मेरा… इसलिए?

आंटी उठी और मुझे एक पुराना कपड़ा दिया, मैंने उससे अपना लंड पोंछकर साफ किया और अपने कपड़े पहन लिए।
आंटी ने भी अपनी चूत पोंछी और अपनी साड़ी नीचे कर ली और ब्लाउज के हुक बंद कर लिए।

अब मेरे भी बदन में जान नहीं बची थी। आंटी ने फैन चलाया और हम ठन्डे हुए।

फिर मैं उठकर अपने घर चला गया बिना आंटी से कुछ कहे क्योंकि मुझे बहुत अजीब लग रहा था शायद पहली बार था इसलिए।

खैर बाद में सब सही हो गया और अब जब भी मौका मिलता है तो मैं उनकी फुददी ज़रूर सुजाता हूँ।
मेरी कहानी आप सबको कैसी लगी, ज़रूर बताइयेगा।
Hello dosto y myri phle story h antarvasna.com per umid karta hu sayd aap logo ko y pasnd aae gai…….
मने अंतर्वसना पेर बहुत सी मजेदार स्टोरी रेड की ह. उन सब स्टोरी मूज़े बहुत पसन्द आइ.तो मने सोचा की म बी अपनी स्टोरी आप लोगो से शियर करू. उमिद करता हू आप को य पसन्द आए गई बहुत.ये स्टोरी मयरी ओर मयरी गर्लफ्रेंड की हे. मने उसको बी इस अंतर्वसना . कॉम क बारे मे ब्टाया था. उसे बी य साइट बहुत पसन्द आइ.ओर फिर हम दोनो एक साथ इस पेर स्टोरी रेआद करते थी.
हेलो दोस्तो मी हरयाणा मे गुरगाओं से हू, मी नामे विपिन ह, मने अबी अपनी इंजिनियरिंग कंप्लीट की ह, मयरी लाइफ मे भूत सी गर्ल्स आई ह, पेर म किसी बी गर्ल की किस नही ले स्का, एक बार म अपने घर से गुरगाओं किसी कम से जा रा था बस मे, तब मूज़े एक गर्ल ंाएर आई उससी बस मे., म उसकी तरफ़ अट्तरत हुआ ओर वो मयरी साइड.
फिर म डेली उसी बस मे आने ल्गा उस गर्ल क लिए, पेर इस बार मने सोच लिया था की म इस गर्ल को कम से कम किस तो करू गा. फिर मने प्लान बनाया उसे प्ताने क.वो गुरगाओं कलाज मे फ्दती करती ह. उसका नामे नि बीटीये स्कता सॉरी दोस्तो. मने उसका पीछा स्टार्ट किया, ओर ३ दिन बाद मने मोका देख कर उसे बाते स्टार्ट की. फर्स्ट मने उसकी फ़ेसबुक ईद लि.ओर फिर उसे बाते करी पेर उस ने मूज़े अपना ने. नही दिया. ३ दिन बाद उसने कूद मूज़े अपना न. दियं उस से रूज बाते करता.१ मंत बाद मने उसे मिलने का प्लान ब्नांया,हम मिले एक पार्क मे पेर व्हा कुछ नही हो स्का. मूज़े ल्गा म इस बार बी कुछ नि कर स्कू गा. तो फिर मने १ वीक बाद व्हा मिलने का प्लान बनाया. इस बार मने अल्ग ट्राइक से कम लिया. फ्ले मने उसे बतो मे ल्गया ओर बतो बतो मे म अपना एक हॅंड उसके बूब्स पेर ले गया,उसे टा बी नही ल्गा, फिर म दिहरे दिहरी उसके बूब्स को ंसलता रा…उसे सेक्स जाग गया थ.फिर मने उसके बूब्स को ओर ंसला उसे मजा आने ल्गा ओर वो मुजसे से पार्क मे ही लिप्त गई. ओर बोली बस करो अब ओर ष्ण नही होता जानू…. फिर उसके लीप मयरे लीप का पास आ गे…मने अपनी किस पूरी की…. ओर य मयरी लाइफ की फर्स्ट किस थी….
मूज़े ंजजा आरा था ओर साहयद उसे बी… ओर फिर उसकी पूरी ब्दान एक दम आकड़ गया.. ओर वो मूज़े से दूर हो गई…हम काफ़ी देर तक कुछ नि बोल स्के दे दूसरे को.फिर म उसे बोला च्लो घर चलते ह ह फिर हम घर आ गये…. ओर हम ने सी बारे मे ओर बाते नि की…….. इस ले म इसे स्टोरी मे ही ब्ताना कहता हू की बाद मे म उसे मोविए क लीय लेयकर गया था व्हा मने उस को फ्ले ही बोल दिया था की तूम अपनी पॅंटी मत फॅन कर आन.उस्ने आसा ही किया,ओर फिर मोविए क स्टार्ट होते ही म बी स्टार्ट हो गया फ्ले मने उसे भूत किस किय. पेर वो साथ न्ही दे र्ही थी मयरा. फिर मने उसे पहले बूब्स को मसलना स्टार्ट किया तब वो धीरे धीरे ग्राम होने लग गई ओर माइरा पूरा साथ देने लगी. फिर मने उसका एक हाथ अपने लॅंड पेर लाइ गया ओर उस से बोला की ये त्यरा ह, ओर वो पंत क उपरे से ही मयरे लॅंड को पाकड़ र्ही थी. टा न्ही एक दूं उसे क्या हुआ ओर उसने मयरे पंत मे अपना हाथ दल दिया ओर उसे भर निकालने लगी. बोली आज मे इसको अपना ब्ना कर र्हू गी. ओर पंत से भर लाते ही उस ने अपने मूह मे ले लिया. मूजे भ्हुत अछा ल्गा. ओर दोनो को मजा आ रा था. ओर वो बोले आज तो इसका सारा माल टेस्ट करू गई.. ओर तब तक लगी र्ही जब तक सारा माल निकल कर पी न्हही गई.. फिर उसने माइरा हाथ अपनी स्लावार मे डाल दिया ओर बोली य टाइयर ह आज इसका बी पानी निकल दे अपने हाथ से…. म बोला पानी तो हाथ से नही लॅंड से निकलता ह…बोले प्ल्ज़ अब कंट्रोल नही हो रा ..तब मने बी अपनी उगाली से ही उसका पानी निकल दिया सारा…. ओर तोड़ा सा टेस्ट किया उसका माल.. माल का टेस्ट अछा था.. ओर फिर हम ने किस की एक दूसरे को ओर घर आ गे… दोस्तो कसी ल्गी मयरी खान्हि.. प्ल्ज़ सेंड मैल मी. मे फिर जल्दी ही लोटू गा एक न्यू स्टोरी क साथ
यह मेरे जीवन की सच्ची घटना है। मेरा नाम राजहै, मैं मुंबई में रहता हूँ। मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ। मेरी उम्र 30 साल है, मैं मुंबई में एक कम्पनी में जॉब करता हूँ। अपने बिजनेस के सिलसिले मे राजस्थान, गुजरात, भोपाल ,पुणे जॉता रहता हूँ ,मैं सेक्स का आदी हूँ। मेरा लन्ड 8″ का है जो महिलाओं को बहुत पसन्द है।
अब मैं अपनी हकीकत कहानी में आता हूँ। हाल ही में मेरे साथ यह घटना हुई।
एक दिन मेरे पास एक राँग नम्बर फ़ोन आया और मैं धीरे-धीरे उनसे बातें करने लगा। फ़िर पता चला कि उनका नाम कोमल है और उनकी उम्र लगभग 35 साल है। फ़िर उससे बातें करते करते 10 दिन निकल गये। फिर तो बातों का सिलसिला शुरू हो गया वो खुलने लगी।
फिर एक दिन मेरे लंड का साइज पूछा तो मैंने बता दिया। फिर मेरे चुदाई के स्टेमिना के बारे में पूछा तो मैंने बता दिया।
एक दिन उसने पूछा- फोन-सेक्स करोगे?
तो मैंने भी सहमति दे दी। फिर तो हम लोगों ने कई बार फोन-सेक्स किया। क्या लाजवाब बातें वो करती है। फोन पर ही रीयल सेक्स का मजा देती है। उसके आह-उह से वाकई ऐसा महसूस होता था कि मेरा लंड उसकी चूत में धीरे-धीरे अंदर जा रहा है और उसे भरपूर मजा आ रहा है।
फोन करते-करते उधर वो भी झड़ जाती थी इधर मैं भी झड़ जाता था। उसे फोन-सेक्स में महारत हासिल थी। जब लंड चूसने बात करती तो लगता कि सही में कोई मेरा लंड अपने मुँह में लेकर गपागप चूस रही है और मैं उसके मुँह में ही अपनी पिचकारी छोड़ रहा हूँ।
एक दिन उसने अनुनय किया कि कब तक हम लोग फोन से ही संतुष्ट होंगे, अब तो वास्तविक चुदाई भी होनी चाहिए।
मेरे मन में भी यह ख्वाहिश थी। लेकिन कहाँ मैं मुंबई में और कहाँ वो राजस्थान में!
फिर अचानक अपने बिजनेस के सिलसिले में राजस्थान का प्रोग्राम बना, तो मैंने सोचा कि एक दिन तो कोमल के लिए समय निकाला जा सकता है। मैंने उसे बताया तो वो खुश हो गई और उसने अपना पता दिया।
दो दिन बाद सुबह के सात बजे मैं उसके कस्बे में पहुँचा। वो बस-स्टैंड पर मुझे लेने आई। उसने मुझे पहले ही बता दिया था कि वो फिरोजी रंग के सूट में आएगी। बस-स्टैंड पर उसे देखकर मैं हैरान रह गया। हवा में लहराते हुए बाल, बगैर दुपट्टे के सूट में, साइज का तो पता नहीं पर करीब डेढ़-डेढ़ किलो के चूचे स्लीवलेस कुर्ते से निकली उसकी बाहें, साफ़ चिकनी बगलें,बड़ी-बड़ी आँखें, सुतवां नाक, रंग जैसे मक्खन में थोड़ा सा सिंदूर मिला दिया हो ! मैं तो जैसे उसकी सुंदरता में खो गया।
फिर वो पास आई और कहा कि इस कस्बे में उसे बहुत लोग जानते हैं तो बदनामी हो सकती है। मैं उसे लेकर करीब दस किलोमीटर दूर एक छोटे से मार्केट में ले गया।
वहाँ एक होटल में एक कमरा लिया। कमरा बहुत ही साधारण था पर साफ़ सुथरा था।
कमरे में जाते ही उसने मुझे बाहों में जकड़ लिया। फिर हम लोगों के होंठ मिले और लगभग दस मिनट तक एक दूसरे को चूमते-चूसते रहे। और फिर उसी अवस्था में मेरा हाथ उसकी चूची पर चला गया। मैंने उसे कपड़ों के ऊपर से ही दबाना शुरू किया।
कोमल मचलने लगी। उसने भी मेरे लंड को पैंट के ऊपर से पकड़ लिया और मसलने लगी। मेरा लंड तो तनकर बम्बू बन गया। उसने मेरा टी-शर्ट उठाना शुरू किया तो मैं समझ गया कि वो अब चुदना चाहती है। अगले दो मिनट में हम दोनों ही वस्त्रविहीन थे।
उसके फिगर को देख कर तो मैं पागल हो गया। अप्सरा को तो मैंने कभी देखा नहीं, पर यदि वाकई में अप्सरा होती है तो वो भी इससे सुन्दर नहीं होती होगी। इसकी काया को देखकर क्या ॠषि और क्या मुनि, शायद ऐसा कोई नहीं होगा जिसका लंड खड़ा ना हो।मेरे लंड में तो जैसे लग रहा था कि अब वो फट जाएगा। करीब दस मिनट तक हम दोनों ही एक-दूसरे के शरीर को सिर्फ सहलाते रहे और एक-दूसरे के सौंदर्य को महसूस करते रहे।
अचानक वो नीचे बैठ गई और मेरे लंड को गपाक से मुँह में ले लिया और चप-चप करके चूसने लगी। मैंने भी उसे जमीं पर ही लिटा कर बगैर अपना लंड उसके मुँह से निकाले घूमकर अपना मुँह उसकी चूत के पास ले गया और चाटने लगा।
वो सिसकारने लगी।
मैं चाटते-चाटते अपनी जीभ उसके चूत के दरार में घुसकर चोदने लगा। अधिक उत्तेजना के कारण लगभग एक ही साथ उसकी चूत ने भी और मेरे लंड ने भी अपना माल झाड़ दिया। हम लोगों ने एक-दूसरे के अंगों को चाट-चाट कर साफ कर दिया।
फिर हम लोग एक-दूसरे से लिपट कर बिस्तर पर आ गए और एक-दूसरे के अंगों को सहलाने लगे। थोड़ी ही देर में मेरे लंड में फिर से उफान आ गया। मेरे लंड के रूप को देखकर वो मुस्कुराने लगी और लंड पकड़ कर अपने चूत पर रगड़ने लगी। उसकी चूत तो चिपचिपी हो ही रही थी। मैंने थोड़ा सा दवाब दिया तो फक से मेरे लंड का सुपारा उसकी चूत में घुस गया।
वो मचल गई।
और उसने अपने पैरों का घेरा मेरे कमर के इर्द-गिर्द लपेट कर अपने चूत की ओर दवाब बढ़ाया। मैंने उसी अवस्था में उसे नीचे करके सही पोजीशन में आया और एक जोरदार धक्का दिया। मेरा पूरा का पूरा लंड एक बार में ही उसकी चूत में अंदर तक घुप गया। उसके चेहरे पर कुछ पीड़ा सी झलकी पर फिर भी वो खुश थी।
मैंने चूत में लंड घुसेड़े ही गोल-गोल घुमाने लगा। वो आह….आह…उह….उह…. करने लगी। उसने कहा कि उसका बॉय-फ्रेंड तो उसे इस तरीके से नहीं चोदता है। उसे चुदाई का एक नया अनुभव प्राप्त हो रहा है। करीब दस मिनट तक उसी तरह घुमाता रहा। फिर उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया।
अब उसकी चूत और मुलायम हो गई। अब मैंने धक्के लगाना शुरू किया। वो भी हरेक धक्के का जवाब धक्के से देने लगी, पूरे कमरे में फच-फच और थप-थप की आवाज गूंजने लगी।
आप सोचेंगे की थप-थप की आवाज कहाँ से? दोस्तों मेरे अंडकोष उसके चूतड़ों से टकरा रहे थे और थप-थप की आवाज निकल रही थी। करीब बीस मिनट तक मैं धक्के मारता रहा और चोदता रहा।
और कोमल भी- कस के चोदो… फाड़ दो चूत… जोर से… और जोर से… रगड़ के चोदो… और भी ना जाने क्या क्या कहती रही और मजे ले ले कर चुदवाती रही। इस बीच उसकी चूत ने दो बार पानी छोड़ा।
चूंकि मेरा माल एक बार निकल चुका था इसलिए मेरे लंड में अभी भी पूरा तनाव था। अब वो थक चुकी थी और कई बार उसकी चूत से पानी भी निकल चुका था, वो पूरी तरह पस्त हो गई।
कोमल ने कहा- मेरा तो हो गया पर तुम चोदते रहो जब तक तुम्हारा मन नहीं भरे, क्योंकि तुम बहुत दूर से सिर्फ मेरे लिए आए हो !यह सुनकर मेरा मन भाव-विभोर हो गया और मैं जोर जोर से धक्के मारने लगा। पन्द्रह-बीस धक्के के बाद मेरे लंड में तनाव और बढ़ गया और अगले छोड़ पर फूलकर थोड़ा और मोटा हो गया।
मैंने उससे पूछा- कहाँ निकालूँ?
तो उसने कहा- चूत में ही निकालो, मैं तुम्हारी पिचकारी को महसूस करना चाहती हूँ !
और फिर मैं पिचकारी छोड़ने लगा। उसने कसकर मुझे पकड़ लिया और प्रत्येक पिचकारी पर उसका दवाब बढ़ता गया। फिर हम लोग निढाल हो गए। मेरा लंड उसकी चूत में ही रह गया।
करीब पन्द्रह मिनट के बाद हम लोग अलग हुए तो उसने मेरे बालों भरी छाती पर चूम लिया और कहा- इतना मजा तो मेरा बॉय-फ्रेंड से कभी नहीं मिला, मैं तो डर रही थी कि मुझे मजा दे पाओगे या नहीं, पर तुम तो जबरदस्त मर्द निकले !
फिर हम लोग साथ-साथ बाथरूम में गए और एक-दूसरे को नहलाया। फिर बाहर निकल कर मैंने खाने का ऑर्डर दिया। कुछ देर तक टी.वी. देखने के बाद खाना आ गया और हमने खाना खाया।
फिर उसने अपनी आँखों से शरारती इशारा किया जैसे पूछ रही हो कि अब दूसरा राउंड हो जाए।
मैंने उसे अपने बाहों में कस लिया। फिर थोड़ी ही देर में हम दोनों नंगे हो गए और फिर एक दौर शुरू हो गया। शाम तक चार बार हम लोगों ने चुदाई की, कभी घोड़ी बना कर तो कभी किसी और पोज में ! एक बार उसकी गांड भी मारी। हालाँकि गाण्ड मारते समय उसकी गांड से खून भी निकल आया क्योंकि उसने गांड पहली बार मरवाई थी पर उसे बहुत मजा आया।
फिर शाम में जब मैं वापस लौटने लगा तो वो रोने लगी, उसने कहा- तुमने मुझे बहुत मजा दिया, तुम्हारे साथ यह चुदाई मैं जीवन भर नहीं भूलूँगी, पता नहीं फिर तुमसे मुलाकात होगी या नहीं !
मैंने भी भारी मन से उससे विदा ली और स्टेशन की ओर निकल पड़ा।
मेरी कहानी आपको कैसी लगी, जरूर बताना।

This story is part of a series:
ऐसी मौसी सब को मिले-1

Aisi Mausi Sabko Mile-2

अगले दिन दोपहर को देखा कि मौसी तो पंजाबी सूट पहने हुये थी। मतलब अब मैं उनका ब्लाउज़ नहीं खोल सकता था, तो क्या मौसी को सब पता चल गया, मुझे बहुत ग्लानि हुई।

अगले 3-4 रोज़ मैंने देखा कि मौसी हमेशा पंजाबी सूट ही पहनती थी और इसी वजह से मैं कुछ नहीं देख पाता था। हाँ कभी कभी उनके झुकने से उनकी वक्ष रेखा ज़रूर दिख जाती थी पर मैं उनके साथ उस दिन की वारदात भूल नहीं पा रहा था।

रात को मौसा जी ने मौसी के साथ सेक्स किया। दोनों की खुसुर पुसुर और कराहटें मैं सुन रहा था। मेरा भी लण्ड पूरा तना हुआ था, पर मैं क्या कर सकता था।

अगले दिन सुबह उठा और तैयार हो कर कॉलेज चला गया। जब दोपहर को वापिस आया तो देखा के मौसी नाइटी पहने घूम रही थी।
मैंने चलते फिरते उन्हें ध्यान से देखा तो पाया के नाइटी के नीचे उन्होंने न तो कोई ब्रा पहनी थी और न ही कोई पेटीकोट या सलवार।
मतलब नाइटी के नीचे वो बिल्कुल नंगी थी।

मेरा मन तो खुशी से भर गया। खाना खाते खाते मैं सोच रहा था के अगर आज मौका मिल गया तो मौसी की नाइटी उठा कर उसकी चूत के भी दर्शन करूंगा।

खाना खाकर मैं अपने कमरे में लेट गया और मौसी अपने कमरे में टीवी देखने लगी। करीब सवा तीन बजे मैं पानी पीने के बहाने मौसी के कमरे में गया तो देखा मौसी बिस्तर पे फैली पड़ी थी और खर्राटे मार रही थी।
मैं पानी पी कर वही खड़ा हो गया और मौसी को घूरने लगा। मौसी की नाइटी पंखे की हवा से थोड़ी थोड़ी उड़ रही थी। नाइटी के अंदर दोनों स्तन अगल बगल को बिखरे पड़े थे।
मैं चुपचाप से जाकर मौसी के पांव के पास जा कर बैठ गया। मैंने अपना सर झुका कर उनकी नाइटी के अंदर देखने की कोशिश की। नाइटी के अंदर मुझे दो गोरी गोरी और मोटी, गुदाज टांगें दिखीं, टाँगों पे थोड़े से बाल थे पर फिर भी चिकनी लग रही थी।

उसके ऊपर दो विशाल जांघें, पर जांघें आपस में जुड़ी पड़ी थी, तो चूत नहीं दिख पा रही थी, मैंने मौसी की टांग के नीचे दबी उनकी नाइटी निकालनी शुरू की, धीरे धीरे जितनी नाइटी मैं निकाल सकता था, मैंने निकाल दी।

अब जब मैंने मौसी की नाइटी तम्बू की तरह ऊपर उठाई तो वाह क्या नज़ारा था। दो खूबसूरत मोटी मोटी टांगें, उसके ऊपर ताज़ी शेव की हुई चूत, चूत के ऊपर गोरा गोरा गोल पेट, और पेट के ऊपर दो विशाल छातियाँ।

यह मेरी ज़िंदगी का पहला अनुभव था जब मैंने कोई औरत पूरी नंगी देखी थी। मैंने मौसी की नाइटी उनके पेट तक ऊपर उठा कर रख दी क्योंकि इससे ऊपर नाइटी जा नहीं रही थी।
मैंने अपना चेहरा पास ले जा कर बड़े करीब से चूत के दर्शन किए। शायद मौसी ने कल ही चूत शेव की होगी, क्योंकि रात मौसी मौसा ने अपना प्रोग्राम जो किया था, चूत के आस पास पाउडर लगा था।

मैं इस चूत को चूमना चाहता था पर डर रहा था, फिर भी मैंने हिम्मत करके धीरे से अपने होंठों से चूत की दरार को छुआ।

मौसी थोड़ी सी हिली, मतलब चूत को छू नहीं सकता था। मगर अब हिम्मत बढ़ती जा रही थी, मैंने अपना पायजामा खोल कर अपना तना हुआ लण्ड बाहर निकाला और मौसी के सामने हिला के धीरे से अपने मुँह में फुसफुसाया- उठो संतोष, तुम्हारा यार अपना लण्ड निकाल के तुम्हारे सिरहाने खड़ा है, इसका अभिवादन करो, अपने मुँह में लेकर इसे प्यार करो, अपनी टांगें फैला कर इस अपनी चूत में लो, उठो डार्लिंग, उठो।

पर मेरी आवाज़ इतनी धीमी थी कि सिर्फ मैं ही सुन सकता था।

कितनी देर मैं मौसी की चूत देख कर अपना लण्ड हिलाता रहा, जोश बढ़ता गया और मैं और ज़ोर से लण्ड हिलाता गया, पता तब चला जब मैं वहाँ खड़ा खड़ा ही झड़ गया।
मेरा जो वीर्य छूटा, उसके छींटे बहुत जगह पर फैल गए, मैंने जल्दी जल्दी सारी जगह से साफ किया, मगर एक बूंद मौसी की चूत के पास उनके पेडू पे गिरी जो बह कर चूत की दरार में समा गई, अब उसे तो मैं साफ नहीं कर सकता था, तो सारी तरफ देख कर के सब साफ हो गया, मैं जाकर अपने कमरे में लेट गया।

अब तो यह रोज़ का ही रूटीन हो गया, शायद गर्मी के कारण पर मौसी रोज़ नाइटी पहनती और रोज़ मैं उसकी नंगी देखता और लण्ड हिलाता और झड़ जाता… मतलब मौसी के चक्कर में मैं मुट्ठल बन रहा था।
जिस दिन मौसी किसी वजह से न सोती उस दिन मैं बहुत बेकरार महसूस करता।
अब तो मैं मौसी के कमरे में और बाथरूम में भी सुराख कर लिए थे और जब भी मौका मिलता तो मौसी को कपड़े बदलते, नहाते और मौसा से चुदते हुये देखता पर मेरी अपनी इच्छा थी मौसी को चोदने की वो पूरी नहीं हो रही थी।

फिर एक दिन भगवान मेरे पे मेहरबान हो गया, जब मैं मौसी की नाइटी ऊपर उठा कर उसकी चूत देखते हुये लण्ड हिला रहा था तो मौसी की नींद खुल गई।
मुझे तो यह लगता था कि मौसी बहुत गहरी नींद सोती है, सो मैं भी आराम से पूरा नंगा होकर मौसी के बेड के पास खड़ा होता था, पर आज अचानक मौसी जाग गई, मुझे देख कर बोली- यह क्या कर रहे हो?

मुझे काटो तो खून नहीं, मैं जल्दी से अपने कमरे के तरफ दौड़ने लगा गिर गया और मौसी ने उठ कर झट से मेरा हाथ पकड़ लिया।
मैं नंग धड़ंग वहीं फर्श पे ही बैठ गया- मौसीजी गलती हो गई, प्लीज़ माफ कर दो।
मैंने विनती की।

‘पहले यह बता, कर क्या रहा था?’ मौसी गरजी।

‘बस गलती हो गई, मौसी, आगे से नहीं करूंगा।’ मैं गिड़गिड़ाया।

‘कब से चल रहा है ये सब?’ मौसी ने थोड़ा नरमी से पूछा।

‘पिछले 20 एक दिन से, पर मौसी अब नहीं करूंगा।’ मेरी रोने वाली हालत हो रही थी।

‘चल उठ कर ऊपर बैठ और मुझे सब बता!’ मौसी ने मेरा पकड़ा हुआ हाथ खींच के बोली।

‘मौसी पहले कपड़े पहन लूँ?’ मैं फिर विनती की।

‘क्यों जब मेरे कपड़े उठा कर देख रहा था तब, मुझे बिना कपड़ों के देखता है और खुद नंगा शर्म महसूस करता है, चल बैठ…’ मौसी ने थोड़ा रोआब से कहा तो मैं मौसी के पास बेड पे बैठ गया और अपने लण्ड को अपने हाथ से ढकने के कोशिश कर रहा था।

मौसी क्योंकि बेड पे बैठी थी तो उनकी नाइटी अभी भी उनके घुटनों तक उठी हुई थी और घुटनों से नीचे उनके टांगें नंगी दिख रही थी। मगर मैं अब उन्हे नहीं देख रहा था।

‘किसने सिखाया तुम्हें ये सब?’ मौसी ने पूछा।
‘किसी ने नहीं।’ मैंने जवाब दिया।
‘तो, क्या देखते थे?’
‘जी कुछ नहीं!’
‘कुछ नहीं तो फिर देखते क्यों थे, अच्छा लगता है?’

मैं चुप रहा।

‘इधर देख और बात कर मुझसे, क्या देखते थे?’ मौसी ने ज़ोर देकर पूछा।
‘जी वो…’ मैंने हकलाते हुए कहा।
‘वो क्या?’ मौसी ने फिर पूछा।

मैं फिर चुप रहा।
मौसी उठ कर खड़ी हुयी और बिल्कुल मेरे सामने आ कर खड़ी हो गई- देख अगर सच बताएगा तो ठीक है, नहीं तो गाँव में तेरे घर में दीदी को बता दूँगी, कि तूने क्या बदतमीजी की है।’
मैं और डर गया- प्लीज़ मौसी किसी को मत बताना।’ मैं कहा।

‘ठीक हैं नहीं बताऊँगी, अगर तू यह बताएगा कि तो मेरी नाइटी उठा कर क्या देखता था।’
मैंने मौसी से नज़रें मिलाई और बोला- जी वो, आपकी…’
मेरे मुँह से हल्का सा निकला।
‘मेरी वो क्या?’ यह कह कर मौसी ने मेरा हाथ छोड़ा अपनी नाइटी उठाई और उतार के परे फेंक दी, मेरी ठुड्डी को पकड़ के मेरा मुँह ऊपर उठाया और बोली- ले अब देख और बता क्या कहते हैं इसे?

मैं मौसी के इस कारनामे से तो हैरान ही रह गया।
मौसी ने मेरे कंधों से पकड़ के मुझे बेड पे गिरा दिया और खुद मेरे ऊपर आ लेटी। ‘अब बता हरामखोर, क्या चाहता है मुझसे?’

मैं क्या कहता। मौसी की चूत मेरे लण्ड पे छू रही थी और उसके दोनों विशाल स्तन मेरी छाती से सटे थे। मैं तो जैसे हैरानी और आनंद के समंदर में गोते लगा रहा था। मुझे तो जैसे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था।

‘चोदना चाहता है मुझे?’ मौसी ने पूछा, तो मैंने हाँ में सर हिलाया।

‘तो ऐसे हाथ से करके क्या होता है, तू कहता तो सही मुझे!’
‘मैं क्या कहता?’
‘यही कि मौसी, तुझे चोदना है।’

‘मौसी आपको चोदना है।’ अब जब सब बात खुल गई थी तो मैंने भी खुल के बोल दिया।
मौसी ने करवट ली अब वो खुद नीचे हो गई और मुझे अपने ऊपर ले लिया- तो चल चोद न, किसने रोका है।

अब तो सब कुछ खुल्लम खुल्ला हो गया था, मौसी ने मेरा लण्ड पकड़ा और अपनी चूत पे रखा, मैंने अंदर डालना चाहा तो अंदर गया नहीं, मुझे तकलीफ हो रही थी।

‘क्या हुआ, डालता क्यों नहीं?’ मौसी ने कहा।
‘मौसी दर्द हो रहा है’ मैंने कहा।

‘दर्द, चल दिखा मुझे’ मौसी ने मेरा लण्ड पकड़ा और अपने हाथ में लेकर देखा- अरे तेरे तो अभी टांके भी नहीं टूटे हैं। तू तो बिल्कुल कुँवारा है, कच्ची कली!और मौसी हंस पड़ी।

मैंने हैरानी से मौसी की तरफ देखा- डर मत, तेरी सील तोड़नी पड़ेगी।
‘वो कैसे?’ मैंने पूछा।
‘वो मेरा काम है, कल रात को तेरा उदघाटन करना है, यह समझ कल तेरी सुहागरात है।’
‘कल क्यों?’
‘कल तेरे मौसा समान लाने बाहर जा रहे हैं, 2 दिन बाद लौटेंगे।’ वो बोली।
‘तो दो दिन अपनी मौज है फिर तो?’
‘बिल्कुल, खुल्ला खाओ नंगे नहाओ।’ मौसी ने मुझे आँख मार के कहा।

मैं मन ही मन बड़ा खुश हुआ कि ‘चलो ये काम तो सेट हुआ।’

‘तो अब क्या करें?’ मैंने पूछा।
‘अब चुस्का चुस्की करें?’ वो बोली।
‘वो क्या होता है?’ मैंने बेधड़क पूछा।
‘तू मेरी चूत चाटेगा और मैं तेरा लण्ड चूसूंगी, ठीक है?’
मुझे भला क्या ऐतराज हो सकता था।
कहानी जारी रहेगी।

(Apne Mamu Se Nikah Karna Chahti hun)


मेरा नाम खानम जां है, मेरी उम्र 22 साल है, मैं अजब पशोपश में हूँ इन दोनों…

मेरे घर वाले और रिश्तेदार मेरे निकाह की बात कर रहे हैं, रिश्ते भी कई आए हैं, हर लड़के पर घर के लोग खोज बीन करते हैं, अपनी रोज-मर्रा की जिन्दगी में फंसी मैं बेहद रूखे तरीके से यह सब देख सुन रही हूँ।

किसी को शायद नहीं लग रहा कि इस बारे में मेरे से भी कुछ पूछा जाए… मेरी दिलचस्पी है तो मेरे छोटे मामू जान में… वे पिछले सात साल से हमारे ही शहर में रहते हैं अकेले रह कर बढ़िया नौकरी कर रहे हैं, खुद पकाते खाते हैं, तीस पार कर चुके हैं और अभी तक निकाह को ना ना कर रहे हैं क्योंकि वो मुझसे और मैं उन से निकाह करना चाहती हूँ लेकिन हम दोनों किसी से कुछ भी कहने से डरते हैं।

हुआ यूं था कि मेरे वो मामू बहुत जहीन हैं, तो मैं अकसर उनसे पढ़ने जाया करती थी और उस नासमझ उम्र में उनकी काबलियत पर मर मिट कर मैंने अपना सब कुछ मन-तन उन्हें तब दे दिया था जब मुझे उस सब के मायने भी सही से नहीं पता थे।

हम आज भी एक दूसरे को चाहते हैं, आपस में निकाह करना चाहते हैं, लेकिन डरते हैं क्योंकि मेरे अब्बू बहुत कड़क किस्म के इंसान हैं,
यह जान लेने पर कि मैं अपने मामू के लिए और मेरे मामू मेरे लिए क्या चाहते हैं, वे हमें मरवा ही देंगे. मेरी अम्मी भी मेरे अब्बू के सामने थर थर कांपती हैं, ऐसा कोई नहीं जिससे हम अपना जाहिर कर सकें।
मुझ में इतनी हिम्मत नहीं कि मैं खुद से घर वालों के बिना कुछ कर सकूँ.

मेरी एक सहेली रुखसाना मेरी राजदार है, उसी ने मुझे अन्तर्वासना पर अपनी समस्या भेजने को कहा, उसने बताया कि पिछले काफी दिन से इसी तरह की समस्यायें इस प्यारी साईट पर प्रकाशित की जा रही हैं तो हम दोनों ने अपनी अपनी समस्या अन्तर्वासना पर भेजने का फैसला किया।
शायद आप में से कोई मेरी समस्या का हल बता सके…

शिक्षक इरफान- हमें मच्छरों को पैदा होने से रोकना है…

विद्यार्थी पप्पू- वो तो मुश्किल है सर..

इरफान- क्यों?

पप्पू- इतना छोटा कन्डोम बनायेगा कौन, अगर बना भी लिया तो सर मच्छर की लुल्ली ढूढेंगा कौन..!!

***

मास्टरनी सलमा- ओये… यहाँ आ…

चपड़ासी- मैडम जी मेरा नाम ओये नहीं है… आप मुझे मेरे नाम से बुलाया कीजिए..

सलमा- चल ठीक है … क्या नाम है तेरा?

चपड़ासी- प्राणनाथ…

मैडम सलमा हिचकिचा कर- नहीं.. मैं तुझे तेरे इस नाम से नहीं बुला सकती, तेरा सरनेम क्या है?

चपड़ासी- स्वामी

Padosan Aunty Ki Chut Chudai Ka Mitha Anubhav-2


वो मेरे गले में दोनों हाथ डाल करके बोलीं- कितनी फिकर है तुझे मेरी.. मुझे बहुत पसंद करते हो तुम..
कुछ देर हम दोनों चुप रहे और वो मेरी आँखों में यूँ ही कामुकता से देखती रहीं। उनकी निगाहें मुझे चूत चुदाई के लिए बुला रही थी..

मुझे उनकी और अपनी साँस तेज़ चलने की आवाज़ आ रही थी.. वो मुझे अब वो आंटी नहीं लग रही थीं.. जिनसे मैं रोज़ मिलता था.. वो मुझे हवस की प्यासी लग रही थीं।
अचानक ही वो मुझसे लिपट गईं और मुझे अपनी बाँहों में कस कर पकड़ लिया और अपना सिर मेरे सीने में रख दिया और मुझसे कहने लगीं- मुझे कभी भी छोड़ कर मत जाना.. मैं बहुत अकेली हूँ।

मैं तो हक्का-बक्का रह गया था.. मुझे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था.. यह कैसा लाड़ है, मैंने कहा- नहीं जाऊँगा..
उनके जिस्म की मादक खुश्बू मुझे आ रही थी.. मैंने भी उन्हें पकड़ लिया।

वो मेरे होंठों के पास अपने होंठ ले आईं और मेरे दिमाग ने काम करना बंद कर ही दिया था, वो मुझे बेतहाशा चूमने लगीं और मैं भी होश खो बैठा, अब हम दोनों को एक-दूसरे को चूमे जा रहे थे।
मैंने उनको गर्दन.. गालों.. होंठों.. हर जगह चूमा।

वो मेरी शर्ट उतारने लगीं और फिर उन्होंने अपनी साड़ी उतार दी, वो बहुत ही कामुक लग रही थीं। हम एक-दूसरे को चूमते रहे.. मैंने उनको उनके भरे हुए सीने पर खूब चूमा और उनके चिकने मुलायम पेट पर भी खूब चूमा..

उनकी नाभि में मैंने अपनी जीभ से खूब खेला और खूब चूमा और उनके चूतड़ों को अपने हाथों से दबाता रहा। उनके चूतड़ मेरे हाथ में नहीं आ रहे थे.. बहुत ही बड़े और मुलायम थे।

उन्होंने अपना पेटीकोट और ब्लाउज भी उतार दिया, अब वो ब्रा और पैन्टी में ग़ज़ब की खूबसूरत लग रही थीं.. मैं भी चड्डी में आ गया था और मेरा लण्ड एकदम खड़ा था।

मैंने उनको बिस्तर पर लिटा कर उनके ऊपर जा कर खूब चूमा और फिर उनकी जाँघों को चूमने लगा, वो मस्त हो चुकी थीं और मेरे बालों में हाथ फेर रही थीं, काफ़ी देर तक मैं उन्हें जाँघों के इर्द-गिर्द उनके नंगे जिस्म को चूमता रहा। वो सिसकियाँ भर रही थीं।

अब मैंने उनकी ब्रा को उतार दिया और उनके बड़े मुलायम मम्मों को चूमने-चूसने लगा, वो मेरे सर को पकड़ कर अपने मम्मों में दबा रही थीं। मैं उनके चूचुकों को खूब चूस रहा था और उनके चूचुक एकदम खड़े हो गए थे।

मैंने अपनी उंगलियों से उनकी चूत को पैन्टी के ऊपर से धीमे-धीमे रगड़ना चालू कर दिया था तो अब वो एकदम गरम हो कर कामातुर चुकी थीं और मैं भी चुदास की आग में भड़क उठा था, वो अपने मुँह से धीमी-धीमी मादक आवाजें निकाल रही थीं ‘आह.. ऊई..सीसी..’

फिर मैं अपना मुँह नीचे ले गया और पैन्टी को एक तरफ पकड़ कर ऊपर की ओर खींचा.. जिससे उनकी पैन्टी चूत पर एकदम कस गई और पैन्टी के ऊपर से ही बुर का उभार दिखने लगा। इसके साथ ही उनकी चूत का पानी भी पैन्टी के ऊपर से नज़र आ रहा था।
मैंने टाइट की हुई पैन्टी के ऊपर से चूत को ऊँगलियों से सहलाना और चाटना शुरू कर दिया दस मिनट तक मैंने उसे खूब चाटा, उनकी पैन्टी चूत के पानी से भीग गई..

इस बीच वो मेरे लण्ड को चूसती रही .. वो मेरे सुपारे को खूब चूस रही थी और अपने हाथ से मेरी गोटियों को दबा और मसल रही थीं, मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.. करीब 10 मिनट तक मैं उनकी चूत को और वो मेरे लण्ड को चूसती रहीं। उसके बाद मैंने उनके मुँह मे अपना पानी डाल दिया और सारा पानी पी गईं।

उनकी चूत से भी काफ़ी पानी आने लगा था.. मैंने भी सारा पानी पी लिया, उनकी चूत की खुश्बू ने मेरी चुदाई की भूख और बढ़ा दी।

अब मैंने उनको घुमाया और उनके ऊपर लेट कर उनके मम्मों और चूचुकों को चूमने लगा.. मैंने उनका एक चूचुक अपने होंठों के दबा लिया और किसी बच्चे के जैसे उसमें से दूध निचोड़ने की कोशिश करने लगा.. साथ ही जब दूध नहीं निकलता तो मैं उनके चूचे को होंठों से पकड़ कर अपनी तरफ खींचता तो उनकी एक मादक सिसकारी निकल जाती।

इस क्रिया में हमारे जिस्म एक-दूसरे से रगड़ रहे थे और हम एकदम मस्त हो चुके थे। मैं उनके ऊपर लेटा था और मेरा लण्ड उनकी चूत पर रखा था।

फिर उन्होंने मुझे 69 की अवस्था में किया और मेरे लण्ड को चूस कर एकदम खड़ा कर दिया..

अब मैंने सीधा होते हुए.. उनकी चूत की लाइन पर लण्ड के सुपारे को खूब रगड़ा.. चूंकि मेरा लण्ड एकदम टाईट था.. लौड़े की रगड़ से.. वो एकदम मस्ती में आ गईं, वो सीत्कार करते हुए बोलीं- आआआ.. अ…हह…. अब नहीं सहा जाता.. अपना लण्ड मेरी चूत में डाल दो..

मैंने एक झटके में ही अपना लण्ड उनकी चूत में डाल दिया.. उनकी तो चीख ही निकल पड़ी और आखों में हल्के आंसू आ गए। वो मेरे लण्ड की ठोकर से एकदम से उछल पड़ी थीं, फिर एक-दो पलों बाद वो बोलीं- धीरे-धीरे छूट चूत चुदाई की रफ़्तार बढ़ाना..

‘ठीक है..’ शुरू में मैंने आराम से चोदना शुरू किया.. फिर ज्यों ही उनके चूतड़ों ने लौड़े को ढंग से लेने का इशारा दिया.. मैंने अपने लण्ड को खूब तेजी से चूत में आगे-पीछे किया।
अब वो मस्ती में हिल रही थीं.. उनके बड़े-बड़े मम्मे उछल रहे थे और वो भी आगे-पीछे होकर चुद रही थीं और अपनी गाण्ड और कमर उठा-उठा कर मज़ा लेने लगीं।

फिर 10 मिनट के बाद मैंने चूत में लण्ड हिलाते हुए उन्हें उठाया और अपनी बाँहों में भर कर अपने सीने से उनके मम्मों चिपका लिया। वो भी मुझे अपनी बाँहों से कस कर पकड़ी हुए थीं और अपनी जाँघों से मेरी कमर को जकड़ रखा था।

अब मुझे ग़ज़ब का अहसास हो रहा था.. वो मेरे लण्ड पर ऊपर-नीचे कर रही थीं और उनको मैंने पीठ से दोनों हाथों से पकड़ रखा था, उनके कोमल चूचियाँ मेरे सीने पर रगड़ रही थीं और में उन्हें चूम भी रहा था।
वो तेज़-तेज़ ‘आआआह्ह..’ की आवाजें निकालने लगी थीं.. और कुछ ही देर बाद वो ढीली पड़ने लगीं.. उनकी पकड़ भी कमजोर पड़ गई.. उनकी चूत रो पड़ी थी।

अब कभी वो मुझे चूमतीं.. कभी मैं उनके सीने पर चूमता.. कभी चूचियों को चूसता..

कुछ देर बाद वो आआह्ह.. करते हुए झड़ गईं और उनकी चूत में पानी भर गया.. वो ढीली पड़ चुकी थीं। मेरा लौड़ा अभी तना हुआ था.. सो मैंने उन्हें लिटा दिया और ऊपर चढ़ कर उनकी चुदाई करने लगा।
चूत में रस का सैलाब होने के कारण.. अब बार-बार ‘फच्च-फच्च’ की आवाज़ आ रही थी और वो अपनी आँखें बंद करे हुए.. अपने होंठ दबा कर.. मेरे लवड़े की चोटों का मज़ा ले रही थीं।

कुछ देर बाद मैंने अपना पानी उनकी चूत में छोड़ दिया और मैं ‘आअहह’ की आवाज के साथ उनके ऊपर ही ढेर हो गया। मेरा लण्ड उनकी चूत में ही पड़ा रहा.. हम दोनों एक-दूसरे चिपके हुए पड़े रहे और चुम्बन करते रहे।
हम दोनों की चुदाई की आग बुझ चुकी थी.. और अब आंटी मुझसे खुल चुकी थीं.. उस पूरी रात मैंने और आंटी ने चुदाई के बहुत से आसन लगाए। इसके बाद तो आंटी की चूत को मेरे लौड़े का सहारा मिल गया था और मुझे उनकी चूत चुदाई में मजा आने लगा था।

दोस्तो.. यह मेरी एकदम सच्ची कहानी है.. इस कहानी पर आप मुझे अपने विचारों से अवगत अवश्य कराना!

(Maine Pure Parivar Ko Chod Diya)


मैं सुदर्शन इस बार अपने जीवन के काले और शर्मनाक राज ले आया हूँ। उम्मीद है इससे आपको शिक्षा मिलेगी। मेरे घर में एक किराएदार रहते थे.. जिनका नाम संजय था। वो 35 साल के थे। उनकी दो बार शादी हो चुकी थी पहली बीवी से एक बेटा और दूसरी से दो बेटियाँ थीं। पहली बीवी मर चुकी थी और दूसरी बीवी गाँव में रहती थी।

एक दिन मैं उनके साथ सो रहा था। रात में मेरी नींद खुली.. तो उनका पाँव मेरे ऊपर था और उनका लण्ड जो उत्तेजित अवस्था में था.. और मेरी टाँग से सटा हुआ था।
मैंने उनके लंगोट पर हाथ रखा.. मुझे उनका खड़ा लण्ड छू कर बड़ा मजा आया। मैंने लंगोट को थोड़ा सा खिसका कर लण्ड को हाथ में लेकर आगे-पीछे करने लगा।
उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.. थोड़ी देर बाद उनका वीर्य स्खलन हो गया।

अब रोज उनके सो जाने के बाद उनके लण्ड से खेलना मेरा शगल हो गया। एक दिन मेरी नींद खुली तो मैंने अपने आपको संजय के बाहुपाश में जकड़े हुए पाया। मेरी चड्डी मेरे घुटनों तक सरकी हुई थी और उनका मोटा.. पर छोटा सा लण्ड मेरे गुदा-द्वार में घुसने का प्रयास कर रहा था।

मैंने छूटने का प्रयत्न किया.. परंतु मैं उसकी पकड़ से छूट ना सका और मेरे गाण्ड में वो तब तक अपने लण्ड से धक्का मारता रहा.. जब तक उसका लौड़ा झड़ नहीं गया।
हालांकि उसका मोटा लण्ड मेरी छोटी सी गाण्ड के छिद्र में प्रवेश नहीं कर सका था फिर भी 4 दिन शौच करने में बहुत तकलीफ हुई।
अब मैं उसके पास नहीं सोता था। फिर कुछ दिनों बाद उन्हें कंपनी की तरफ से कॉलोनी में घर मिल गया.. जहाँ उनकी बीवी भी साथ रहने लगी।

एक दिन संजय के जीजाजी आए.. बातों-बातों में उन्होंने बताया- मैं संजय की बीवी को चोदता हूँ.. क्योंकि संजय गाँव में कम रहता है.. इसलिए उसकी बीवी की चुदास मैं ही मिटाता था।
मैंने कहा- मेरा भी जुगाड़ लगवा दो।
संजय के जीजाजी बोले- अरे वो तो पूरी छिनाल है.. तुमसे तो हँस कर चुदवा लेगी।
वे मुझे अपने साथ संजय की बीवी के पास ले गए।

वो कुछ ही पलों में चुदवाने को राजी हो गई। वास्तव में वो बहुत ही चुदासी औरत निकली.. उसने अपनी साड़ी उठाकर चूत के दर्शन कराए और इशारे में चूत चाटने को कहा।
मैं आगे बढ़ा और उसकी चूत चाटने लगा। उसने पेटीकोट से मुझे ढक लिया.. मैं अन्दर अंधेरे में उसकी बुर चूसता रहा।
फिर मुझे बाहर निकाल कर बोली- अपना हथियार तो दिखाओ।
मैंने अपना लण्ड खोला.. वो बोली- लंबा तो संजय से अधिक है.. पर जरा मोटा कम है.. चलो एक-दो महीने में मेरी चूत का पानी पी-पी कर मोटा हो जाएगा..

फिर उन्होंने अपनी झांट युक्त बुर को फैलाया… जो लसलसाहट से भर गई थी। मैंने लवड़ा चूत पर सैट करके धक्का मारा तो दो धक्के में ही पूरा लण्ड अन्दर घुस गया।
आखिर उसने दो पुत्रियों को इसी भोसड़े से तो पैदा किया था.. चूत ढीली होना स्वाभाविक था। अब मेरा लण्ड संजय की बीवी की बुर में बहुत आसानी से अन्दर आ-जा रहा था।

मुझे बहुत संतोष मिला की मेरी गाण्ड मारने की असफल कोशिश करने वाले की बीवी की चूत को मैंने कूट-कूट कर चोदा।
जब तक लण्ड ने मेरा साथ नहीं छोड़ा.. तब तक मैं उसकी चूत को चोदता रहा.. वो भी झड़ चुकी थी.. फिर मैं भी झड़ गया।

वैसे दोस्तों बुर कितनी भी ढीली हो हस्तमैथुन से कई गुना ज्यादा मजा देती है।

संजय की बीवी को मेरी चुदाई पसंद आई.. वो बोली- नंदोई जी.. आप तो कभी-कभी आते हैं गाँव में तो आप रोज ही चोदते थे..
संजय के जीजाजी बोले- इसी लिए तो तुम्हारी चुदास को शान्त करने के लिए ये लौड़ा ढूँढा है.. अब खूब मजे से चुदवाना।
संजय की बीवी मुझसे बोली- जब संजय डयूटी चले जाएं.. तो तुम मुझे रोज चोदना..
मैं उस छिनाल को 5 साल तक चोदता रहा।

चूंकि उस जमाने में गाँव में चुदाई के नाम पर औरतें टाँगें फैलाकर लेट जाती थीं और चुदाई शुरू हो जाती थी।
मैंने भाभी को चुदाई के नए आसन भी सिखा दिए।

कुछ दिनों बाद उनकी दो खुद की लड़कियाँ चमेली और सुमन और एक सौतेला लड़का अतुल शहर पढ़ने आ गए। अतुल बड़ा था उसकी मम्मी के मरने के बाद संजय ने दूसरी शादी की थी। तो इन बच्चों के आ जाने से अब उन्हें मुझसे चुदवाने का मौका कम मिलता था।

एक दिन संजय के पुत्र अतुल ने हम दोनों को चुदाई करते देख लिया। फिर बाद में अतुल मेरा राजदार बन गया था।
आगे की कहानी आप अतुल की जुबानी ही सुनिए।

एक दिन कॉलेज में जल्दी छुट्टी हो गई। मैं घर आया और दूसरी चाभी से दरवाजा खोला और अन्दर पहुँचने पर मम्मी के कमरे से मुझे किसी मर्द जैसी आवाज सुनाई दी.. मैंने सोचा पापा तो रात में आते हैं अभी कौन है।

मैंने स्टूल लगाकर रोशनदान से झाँका तो मम्मी सुदर्शन चाचा के नीचे नंगी लेटी थीं और वो धकापेल धक्के मार रहे थे, मम्मी नीचे से अपने चूतड़ों को उछाल-उछाल कर सुदर्शन को खींच रही थीं।
यह देख कर मेरे लण्ड में तनाव आने लगा। मुझे मम्मी की चिकनी बुर साफ दिखाई दे रही थी। मैं अपना लण्ड पकड़ कर हिलाने लगा।
कुछ देर बाद मेरे लण्ड ने पिचकारी छोड़ दी। मैं नीचे उतर कर अपने कमरे में चला गया।

माँ के प्रति आदर-सम्मान सब उनकी चुदाई देखकर खत्म हो गया था। मैं सोचने लगा.. मम्मी जब सुदर्शन से चूत रौंदवा रही हैं.. तो मुझे मौका क्यों नहीं देतीं।

मैं अपने कमरे में जा कर लेट गया.. मेरा मन अपनी बहन चमेली को पेलने को होने लगा।
तभी मम्मी मेरे कमरे में आईं.. उन्होंने मुझे हिलाया.. मैं जानबूझ कर नहीं उठा।

फिर कुछ सोच कर मम्मी ने मेरी लुंगी हटाकर मेरे लण्ड पर हाथ रखा.. मेरा पूरा शरीर गनगना गया। वे मेरे लण्ड को मुठ्ठी में भर कर मसलने लगीं। मैं पहली बार किसी औरत के स्पर्श को बर्दाश्त नहीं कर पाया और हिल गया।
मम्मी ने मेरा हिलना देखा तो वे कमरे से बाहर निकल गईं।
मैं पछताने लगा कि काश मैं हिला ना होता।

दूसरे दिन रात में मम्मी फिर आईं। मम्मी ने अपने पूरे वस्त्र निकाल फेंके। उसके बाद मम्मी ने मेरी खटिया पर बैठकर मेरी लुंगी को खोल दिया और मेरे लण्ड को सहलाने लगीं, मैं चुपचाप आंख बंद किए मजे ले रहा था।

जब उन्हें यकीन हो गया कि मैं सो रहा हूँ.. तब मेरे लण्ड को मुँह में भरकर अन्दर-बाहर करने लगीं।
जब मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ तो मैं उठ कर मम्मी को पकड़ कर चूमने लगा, उन्होंने ने मेरा एक हाथ चूत पर दूसरा चूची पर रख दिया। मेरी ऊँगलियाँ उनकी बुर की दरार में चलने लगीं, मैं तेजी से ऊँगली अन्दर-बाहर करने लगा।
मम्मी मुझसे बुरी तरह चिपकने लगीं और बोलीं- बेटा.. अब अपना लण्ड मेरी बुर में डाल दो..

मैं मम्मी की टाँगों के बीच बैठ कर लण्ड को बुर के अन्दर धकेलने लगा।
दो-तीन धक्के में ही उनकी गीली बुर में मेरा पूरा लण्ड समा गया।
पूरा कमरा ‘फच्च.. फच्च..’ की आवाजों से गूंज रहा था। मैंने उन्हें बाँहों में भींचते हुए अपना पूरा पानी उनकी बुर में छोड़ दिया।

अब मैं सुदर्शन अंकल के साथ मिलकर भी अपनी सौतेली मम्मी को खूब चोदता था.. पर अब मुझे अपनी छोटी बहन सुमन की फूटती जवानी भोगने का मन करता था।

एक दिन मम्मी नानी की बीमारी के कारण उनकी सेवा करने नानी के घर चली गईं।
मैं रात में सुमन के कमरे में गया.. वो सो रही थी। उसकी नाईटी ऊपर को उठी हुई थी और उसकी कच्छी बाहर से दिखाई पड़ रही थी।
मैं उसकी जाँघों को सहलाने लगा.. जब कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई तो.. मैंने अपना हाथ उसकी अनचुदी बुर पर रख दिया। मेरी सांसें तेज हो गईं। मैंने बुर को सहलाते हुए उसकी बुर में ऊँगली को अन्दर डाल दिया।

सुमन थोड़ी हिली.. पर मैं रूका नहीं.. मैं समझ गया कि यह साली सोने का नाटक कर रही है।
सुमन की सांसें भी तेज हो गई थीं, उसकी चूची ऊपर-नीचे होने लगी थीं, मैं उसकी चूचियों को मींजने लगा। उसने एकदम से उठ कर मेरे होंठ चूसना चालू कर दिए।

फिर क्या था.. सब कुछ खुलम्म-खुल्ला हो गया था.. कुछ ही पलों में हम दोनों नंगे हो चुके थे, मैं अपने मुँह से उसकी बुर को चूसने लगा.. सुमन नीचे से चूतड़ हिलाने लगी।
मैंने अपनी जीभ उसके बुर के छेद में सरका दिया। फिर उसकी चुदास बढ़ गई उसने अपनी टाँगें फैला दीं और बोली- अब पेल दो..
मैं उसकी बुर पर लण्ड सैट करके धक्का मारा.. लण्ड के आगे का भाग चूत के अन्दर घुस गया और धीरे-धीरे और अन्दर ठेलने लगा। सुमन अब दर्द से ऐंठने लगी और एक हाथ से मुझे पीछे धक्का देने लगी।
लेकिन मैंने उसको जकड़ कर पूरा मार्ग तय किया। फिर धीरे-धीरे लण्ड अन्दर-बाहर करने लगा।

जब सुमन का दर्द कम हुआ तो वो भी सहयोग करने लगी। मैं भी गति बढ़ाकर चोदने लगा।
सुमन जब झड़ने लगी तो बुरी तरह मुझसे चिपक गई, फिर मैं भी जोर से चोदते हुए ढेर हो गया।

सुमन बोली- मैं और दीदी दोनों ने तुम्हारी और मम्मी की चुदाई देखी है।
मैं मुस्कुराया तो सुमन बोली- अब चमेली दीदी को भी चोद दो।
मैं चमेली दीदी के कमरे में गया। वो स्कर्ट पहने लेटी थी, जब मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रखे तो उसका पूरा बदन काँप रहा था।
मैं सारे रिश्ते तो दो महीने पहले ही भूल चुका था, अब चमेली दीदी मुझे चोदने लायक ‘माल’ लग रही थीं।

मैंने उसकी स्कर्ट को उतार कर फेंक दिया… और एक ही झटके में उसकी कच्छी नीचे उतार दी, फिर उसके बुर में अपना लौड़ा पेल कर उसका कौमार्य भी भंग कर दिया।

मम्मी के आने पर जब उनको हम भाई-बहनों के खेल का पता चला तो.. मम्मी बोलीं- ठीक है.. पर इस खेल में सुदर्शन को भी शामिल करना पड़ेगा।
फिर सुमन, चमेली, मम्मी, मैं.. और सुदर्शन सब एक साथ चुदाई करते।

अब सुदर्शन की शादी हो गई। फिर मेरी दोनों बहनों की भी शादी हो गई। अब मेरी भी शादी हो गई। लेकिन मम्मी फूफा जी से अब भी संबंध बनाती हैं।
मैं पत्नी आने के बाद मम्मी को नहीं चोदना चाहता हूँ.. पर जब भी उनको एकांत मिलता है.. तो वे मुझसे संबध बना लेती हैं।

सुदर्शन- तो देखा मित्रों.. किस तरह मैंने अपनी गाण्ड मारने की असफल कोशिश करने वाले के पूरे परिवार को ‘चूतजाल’ में फंसाकर चोदू बना दिया।
आप कभी बिना सहमति के किसी की गाण्ड मत मारना।
अपने विचार मेरी ईमेल आईडी पर जरूर भेजिएगा।

(Bhabhi se Chudai Ka Secret Affair)


सबसे पहले सभी खड़े लण्ड और पानी छोड़ती चूतों को मेरा सलाम.. मेरा नाम राहुल है.. मैं अहमदाबाद का रहने वाला हूँ.. उम्र 20 साल है। मैं 5’ 10” का करीब 7″ लम्बे और 2″ मोटे लण्ड का मालिक हूँ।

आज मैं आपको मेरे जीवन की.. और अन्तर्वासना पर भी मेरी पहली कहानी सुनाने जा रहा हूँ, आशा करता हूँ कि आपको मेरी कहानी पसंद आएगी..
यह कहानी मेरी और मेरी पड़ोसन भाभी की है.. भाभी का नाम श्रेया है और वो करीब 5’5″ लम्बाई की हैं। उनका जिस्म लगभग 34-30-36 के कटाव वाला है… और वो बहुत ही तीखे और मदभरे नैन-नक्श वाली हैं।
मैं जब भी उसको पीछे से चलते हुए देखता हूँ तो उसकी हिलती और मटकती हुई गाण्ड देख कर मेरा हथियार तन कर पैन्ट से बाहर आने के लिए बेताब होकर अक्सर उत्तेजित हो जाता है.. शायद मोहल्ले के सारे मर्दों ने कम से कम एक बार तो उनका नाम लेकर मुठ मारी ही होगी।
उनके बारे में यदि कम शब्दों में लिखा जाए तो एक बार शॉट मारने लायक फटका हैं.. जिसे भगवन ने फुरसत से बनाया है।

बात आज से एक महीने पहले की है.. श्रेया भाभी के पति राजीव भैया.. जिनका टेक्सटाइल का बहुत बड़ा बिजनेस है.. वो किसी काम से दो हफ्तों के लिए दिल्ली गए हुए थे।
हमारे भाभी के परिवार से सम्बन्ध अच्छे थे.. तो मेरा उनके घर आना-जाना लगा रहता था।
अब घर पर भैया नहीं थे.. तो भाभी को अकेले घर पर मन नहीं लगता था.. इसलिए मैं रात को उनके पास चला जाता था और हम लोग काफी देर तक बातें करते रहते थे।

इसी बीच हम लोग एक-दूसरे में काफी घुल-मिल गए थे। भाभी को भी मेरा साथ और मेरी दोस्ती पसंद आने लगी थी। अब दोपहर में भी जब मैं कॉलेज जाता तब हम लोग WHATSAPP पर चैटिंग करने लगे थे।
आप लोगों को तो मालूम ही है कि आजकल व्हाट्सएप पर सभी तरह के जोक्स और फोटो शेयर की जाती हैं। इसी तरह बात आगे बढ़ी और अब हम खुल कर बात करने लगे।

मैंने एक दिन कहा- भाभी.. यार आज आप बड़ी सुन्दर लग रही हो।
वो बोलीं- तो रोज़ क्या बदसूरत दिखती हूँ?
मैं- नहीं.. ऐसा नहीं है.. यह गुलाबी साड़ी आप पर गजब ढा रही है।
भाभी- अच्छा.. तू भी बड़ा स्मार्ट लगता है.. तेरी गर्लफ्रेंड के तो नसीब ही खुल गए।

मैं- इसमें नसीब खुलने वाली क्या बात है?
भाभी- ले.. तू उसे बहुत प्यार करता होगा.. घुमाने ले जाता होगा… तो उसे अच्छा लगता होगा न।
मैं- भाभी.. करने को तो मैं बहुत कुछ करूँ.. मगर क्या करूँ कोई गर्लफ्रेंड भी तो होनी चाहिए।
भाभी- चल झुट्टा.. मैं नहीं मानती कि तेरे जैसे स्मार्ट लड़के की कोई गर्लफ्रेंड नहीं है।
मैं- अरे सच में… नहीं है भाभी… कोई आप जैसी मिलती ही नहीं।

भाभी- ओह.. तो नवाब साहब को मेरे जैसी गर्लफ्रेंड चाहिए।
मैं- ह्म्म्मम्म्म्म…
भाभी- अच्छा चल.. तो बस आज से मैं तेरी गर्लफ्रेंड।

मैं- क्या मजाक करती हो भाभी… आप तो पहले से ही भैया से रिजर्व हो..
भाभी- तो क्या हुआ.. आज से मेरा तेरे साथ सीक्रेट अफेयर..
मैं- अच्छा.. तो मेरा मन मेरी गर्लफ्रेंड के साथ डेट पर जाने का हो रहा है।

भाभी- हम्म्म्म डार्लिंग.. बाहर तो नहीं जा सकते.. पर चलो यहीं आपको बाहर से भी ज्यादा रोमांटिक केंडल-लाइट डिनर करवाती हूँ।
मेरे लिए यह सब मजाक जैसा था।

करीब 7 बजे मैं भाभी के घर पहुँचा.. भाभी ने आज एक बहुत ही भड़कीली सेक्सी सी लाल रंग की साड़ी पहनी हुई थी.. और स्लीवलेस ब्लाउज…
मेरा तो देख कर ही खड़ा हो गया… और मन में विचार आया कि आज या तो दोनों की सहमति से चुदाई होगी या भाभी का रेप होगा।

हम दोनों ने बड़े प्यार से खाना खाया फिर मैंने भाभी को बड़े ही रोमांटिक तरीके से प्रपोज किया।
मैंने घुटनों पर बैठ कर उनके हाथ पर चुम्बन किया…
भाभी ने मुझे खड़ा किया… और मेरे होंठों पर एक फ्रेंच-किस दी..

इस होंठों वाले चुम्बन से तो मैं सातवें आसमान पर पहुँच गया। करीब 15 मिनट तक हम लोग इस तरह ही एक-दूसरे में डूब कर चुम्बन करते रहे।

भाभी को भी बहुत मज़ा आ रहा था.. तब मुझे पता चला कि मुझसे ज्यादा आग तो भाभी की चूत में लगी हुई है।
अब मैं भाभी के सभी अंगों को धीरे-धीरे सहलाने में जुट गया था.. मैंने हमेशा जिसके सपने देखे.. जिसके नाम से मुठ मारी.. आज वो मेरी बाँहों में थी..
मैं कभी भाभी की गाण्ड दबाता.. तो कभी बोबे… वो भी मेरी पीठ पर.. मेरे चूतड़ों पर.. मेरे लण्ड पर.. लगातार हाथ फिरा रही थीं।
अब धीरे-धीरे भाभी जंगली हुई जा रही थीं…

यह मेरा पहला अनुभव था… तो मुझे घबराहट सी हो रही थी कि क्या करूँ.. पर भाभी ने मेरी सभी घबराहट दूर कर दी.. मुझे कुछ करने की जरूरत ही नहीं पड़ी.. सब कुछ भाभी ही कर रही थीं..
मैं उनके बोबों का बहुत बड़ा दीवाना था.. इस लिए पागलों के जैसे दबाए जा रहा था। भाभी ‘आह्ह..आह्ह्ह… आह्ह्ह..’ की आवाजें निकाले जा रही थीं.. जो मेरा जोश और बढ़ा रही थीं।

अब दस बज चुके थे.. मैंने सोचा घर नहीं गया… तो प्रॉब्लम हो जाएगी। इसलिए मैंने भाभी से कहा- डार्लिंग अभी मैं घर चला जाता हूँ.. कोई यहाँ मुझे ढूँढ़ता चला आया और हम दोनों को इस हालत में देख लिया.. तो प्रॉब्लम हो जाएगी।

भाभी ने इस बात पर सर हिलाया.. और एक सेक्सी सी चुम्मी की.. फिर मुझे घर भेज दिया।
मैंने जाते वक्त भाभी से कहा- ऊपर का दरवाजा खुला रखना.. पिक्चर अभी बाकी है… 12 बजे आ कर पूरी करूँगा..
भाभी मुस्कुरा दीं।

फिर मैं घर आ गया। मेरे पास कुछ पोर्न मूवीज पड़ी थीं.. उनमें से एक मूवी को लिया और करीब 12 बजे जब सब सो गए.. तब मैं चुपके से छत पर से भाभी की छत पर आ गया.. क्योंकि हमारे घरों की छतें एक-दूसरे से जुड़ी हुई थीं।

उधर भाभी मेरा बेसब्री से इंतजार कर ही रही थीं, मेरे आते ही अपनी बाँहें फैलाते हुए बोलीं- आओ देश के बांके जवान.. और लूट लो मेरी ये जवानी…

वो बेड़ पर लेटी थीं.. मैं जाते ही सीधे उन पर कूद गया।
उनकी साड़ी एक झटके में हटा कर ब्लाउज के ऊपर से ही मैंने उनके रसीले बोबे दबाने और चूसने लगा। वो मेरा सर अपने मस्त बोबों में दबाए जा रही थीं।
अब मैंने उनके ब्लाउज के बटन तोड़ दिए… उन्होंने ब्रा नहीं पहनी थी।

ब्लाउज का झंझट खत्म होते ही दूध की दो बड़ी-बड़ी टंकियां मेरे सामने थीं.. मैं लपक कर दोनों मम्मों पर टूट पड़ा और बारी-बारी से दोनों मम्मों को चूसने लगा।

फिर भाभी ने मेरे सारे कपड़े उतार दिए और मैंने भी उनके पेटीकोट का नाड़ा अपने दांतों से खोला.. फिर मुँह से ही उनकी पैन्टी खींच कर उन्हें नंगा कर दिया।
अब हम दोनों एक-दूसरे का पूरा जिस्म चाट रहे थे। भाभी मेरे लण्ड से खेलने लगीं.. और मुझे 69 की अवस्था में आने को कहा।

मैं तुरंत 69 की अवस्था में आ गया।

मैं पहली बार किसी की चूत देख रहा था… एकदम गुलाबी.. वो भी क्लीन शेव.. सफाचट.. झांट रहित.. आह्ह.. लौड़े ने एकदम से फुन्कारी मारी, मेरा हथियार पहले कभी ना हुआ उतना मोटा हो गया था.. मानो फटने ही वाला हो..
भाभी ने अपने गुलाबी होंठ जैसे ही मेरे लण्ड पर लगाए.. मैं एक अलग ही दुनिया में पहुँच गया। अब मैं चूत में अन्दर तक जीभ डाल कर चाट रहा था।

भाभी चूत चाटने से गरम हो गई थीं और चिल्ला रही थीं- हाँ.. चूस मेरी जान.. तेरे लिए ही एकदम साफ करके रखी है.. आह्ह.. जोरदार हथियार है तेरा… आज बहुत मज़ा आने वाला है मुझे.. चूस मेरे लाल.. कर दे मेरी चूत भी लाल.. ओह..

भाभी उत्तेजना में मेरी गाण्ड में उंगली डाल रही थीं तो मैंने भी वैसा ही करना आरम्भ कर दिया। कुछ पलों तक भाभी ने मेरा हथियार चचोरा तो मेरा लण्ड पानी छोड़ गया.. जिसे भाभी मजे से पूरा पी गईं।
फिर उनका नमकीन पानी निकल पड़ा जिसे मैंने भी एक-एक बूंद पी लिया। कुछ देर और चूम-चाटी करने के बाद हम दोनों फिर से तैयार हो गए।

अब भाभी पीठ के बल चित्त लेट गईं और उन्होंने अपनी गाण्ड के नीचे एक तकिया लगा लिया फिर मुझसे बोलीं- राहुल.. अपनी चुदासी भाभी पर सवार होने के लिए तैयार हो जा..
मैं अपना हथियार हिलाते हुए किसी अनुभवी चोदू की तरह उनकी चूत के मुहाने पर निशाना लगा कर बैठ गया.. मुझे लगा मैं सब कर लूँगा.. मैंने दो-तीन बार लण्ड घुसेड़ने की कोशिश की.. पर सफल नहीं हुआ…

इस पर भाभी ने मेरी तरफ देखा.. और हँस कर मेरे लण्ड को अपने हाथ में ले कर चूत के छेद पर रख दिया.. और बोलीं- अब डालो महारथी…

मैंने एक हल्का सा शॉट मारा तो लौड़े का क्राउन चूत के अन्दर चला गया… वास्तव में भाभी की चूत अब भी बहुत कसी हुई थी.. सो उन्हें थोड़ा दर्द हुआ।
इधर मेरा भी पहली बार था.. तो मुझे भी टांका टूटने का दर्द हुआ.. पर जो मज़ा मिल रहा था.. वो इस दर्द से कई गुना ज्यादा था…

इसलिए हम दोनों खूब मजे लेकर चुदाई कर रहे थे। अब लौड़ा चूत में फंसा था तो दर्द को भूलने के लिए हम दोनों थोड़ा रुक कर चुम्मा-चाटी करने लगे.. मैंने बोबे चूसे..

तो भाभी ने फिर मुझे और धक्के लगाने को कहा। पाँच-सात धक्कों में मेरा पूरा लण्ड उनकी चूत में दाखिल हो चुका था।
मित्रो.. आज भी मैं भाभी की चूत की वो गर्मी महसूस कर सकता हूँ…

अब दोनों को ही मज़ा आने लगा था, मैं जोर-जोर से शॉट मारने लगा.. भाभी भी कमर उठा कर साथ दे रही थीं, हम दोनों ‘आह्ह्ह… आह्ह्ह्ह… आह्ह्हह्ह..’ कर रहे थे।
भाभी की चूत ने एक बार पानी छोड़ दिया था जिससे लौड़े की चोटों से “फच..फच..” की आवाज़ हमारा जोश बढ़ा रही थी। बीस मिनट बाद मेरी रफ़्तार बढ़ गई … भाभी भी जोर से आवाज़ निकालने लगीं और चूतड़ों को उछाल-उछाल कर चुदाने लगीं।
करीब 5 मिनट बाद हम दोनों साथ ही झड़ गए… भाभी की चूत मेरे गरम-गरम माल से भर गई।

दस मिनट आराम करने के बाद हमने फिर से चुदाई चालू कर दी इस बार छेद बदल चुका था अब मैंने उनकी गाण्ड मारनी चालू कर दी थी।
भाभी भी गाण्ड मरवाने की अनुभवी थीं यह चुदाई का सिलसिला सुबह 5 बजे तक चलता रहा।इसी बीच भाभी ने बताया कि वो मुझसे बहुत पहले से ही चुदना चाहती थीं.. वो इसी दिन की तलाश में थीं.. राजीव भैया को बिजनेस के आगे कुछ नहीं दिखता.. और भाभी रोज़ ही प्यासी रह जाती थीं रोज़ उन्हें उंगली से या गाजर.. मूली.. आदि सब्जियों से काम चलाना पड़ता था।

सुबह फिर से मैं अपने घर आ गया।

दूसरे दिन जब मैं कॉलेज में था.. तब भाभी का मैसेज आया कि मैं जो मूवी ले गया था.. भाभी उसी को देख रही हैं और मुझे याद कर के अपनी चूत में उंगलियां डाल रही हैं.. मैं हँसने लगा।

बाकी के दस दिनों की कहानी फिर कभी लिखूंगा… जो इससे कई गुना ज्यादा मज़ेदार है…

जिसमें हमने उस मूवी में दिखाई गई हर स्टाइल में चुदाई की।

आपके ईमेल का मुझे इंतजार रहेगा.. जरुर बताइएगा कि आपको कहानी कैसी लगी।
आप चाहे तो मुझे yahoo messanger पर भी add कर सकते हैं

Kharbuje Se Chuche Tarbuj Se Chutad


मेरा नाम समीर है और मैं एक कॉल-ब्वॉय हूँ। अकेली और कामपिपासु महिलाओं और लड़कियों की चुदाई करना मेरा काम है। मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ मेरा लण्ड 8 इंच का है। मैं एक अच्छे सुडौल और कसरती जिस्म का मालिक हूँ।

अब मैं अपनी कहानी पर आता हूँ। यह एक सच्ची घटना है.. जो अभी 2 महीने पहले की ही है, मुझे कॉल आया.. उधर से एक महिला बोल रही थी.. उसने अपना नाम रूपाली (बदला हुआ नाम) बताया और उसने मेरी सर्विस लेने की बात कही।
मैंने पूछा- आपको मेरे बारे में कैसे पता चला?
तो उसने बताया- मुझे आपके बारे में आपकी कस्टमर नैना ने बताया है.. वो मेरी फ्रेंड है..
यहाँ मैं आपको बता दूँ कि नैना मेरी एक साल पुरानी ग्राहक है जो कि लगभग 30 वर्षीया महिला है.. उसकी मैंने अभी तक 20 बार चुदाई की है।
मैंने रूपाली से बातचीत फाइनल की और 2 दिन बाद मिलने की हमारी डील पक्की हुई। मुझे उससे मिलने के लिए उसके घर पर जाना था.. क्योंकि उस समय घर पर कोई नहीं था।

मैं उस दिन बताए पते पर पहुँचा.. मैंने दरवाजे पर जाकर घन्टी बजाई।
कुछ ही देर में दरवाजा खुला.. मैंने देखा तो वो एक 28 साल की महिला थी जिसका फिगर 34-28-34 का था.. उसने काले रंग की साड़ी और गहरे गले का ब्लाउज पहना हुआ था।
मैं उसे देखता ही रह गया.. उसने मुस्कुराते हुए मुझे अन्दर आने को कहा.. मैं अन्दर जाकर सोफ़े पर बैठ गया।

उसने मुझसे ठंडा गरम के लिए पूछा और मैंने चाय के लिए कहा.. वो मेरे लिए चाय बनाने अन्दर चली गई।
मैं उसके बड़े चूतड़ों को मटकते हुए देख रहा था.. जो मुझे चोदने के लिए निमंत्रित कर रहे थे।
मैं जब अन्दर आया था.. उस समय मैं उसकी बड़ी-बड़ी चूचियाँ देख रहा था.. क्योंकि मुझे बड़े चूचे ज्यादा पसंद हैं।
मैं बड़े चूचों वाली महिलाओं की चोदने से पहले खूब थन-चुसाई करता हूँ।

आप यह कहानी अन्तर्वासना.कॉम पर पढ़ रहे हैं।
वो अन्दर से चाय लेकर आई और मैंने चाय लेकर पीना शुरू की.. वो इस दौरान मेरे पास आकर बैठ गई और उसने पूछा- आने में कोई दिक्कत तो नहीं हुई?
मैंने बताया- नहीं.. कोई दिक्कत नहीं हुई।

मैं उसे देखे ही जा रहा था.. तभी मेरा एक हाथ उसकी जाँघों पर गया.. वो चौंक पड़ी।
उसने कहा- जल्दी क्या है.. चाय पी लीजिए.. फिर बेडरूम में चलते हैं।
मैंने जल्दी से चाय खत्म की और वो मुझे बेडरूम में ले जाने के लिए उठी। मैं उसके पीछे-पीछे चल दिया.. जैसे ही मैं बेडरूम में पहुँचा.. उसने मुझसे कहा- शुरू हो जाओ…

मैंने तुरंत उसे उठाकर बिस्तर पर लिटा दिया और उसके होंठों को चूसने लगा। उसने मेरा साथ देना शुरू किया.. मैंने उसके होंठों को चूमते-चूमते उसके सारे कपड़े खोल दिए। अब वो सिर्फ़ एक काली ब्रा और पैन्टी में थी।

मैंने उसके ब्रा को एक झटके में निकाल फेंका और उसके भूरे निप्पलों को अपने होंठों से निचोड़कर उनका रस पीने लगा।
वो गरम होने लगी.. उसने मेरे अंडरवियर के ऊपर से ही मेरा लण्ड मसलना शुरू कर दिया। फिर मैंने उसकी ब्रा-पैन्टी और अपना अंडरवियर निकाल दिया। वो मेरे लण्ड को मुँह में भरकर लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी। कुछ मिनट लण्ड चुसवाने से मेरा माल निकल गया, वो एक झटके में सारा पानी पी गई।

अब बारी मेरी थी.. मैंने अपना मुँह ले जाकर उसकी गुलाबी चूत पर रखा और चाटने लगा। मैं अपनी जीभ को चूत की फाकों में अन्दर-बाहर करने लगा।

‘आहह.. एसस्स.. उहह.. फाड़ डालो इस चूत को मेरे राजा.. अब मैं तुम्हीं से ही चुदवाऊँगी..’
वो ये सब सिसिया कर कहने लगी। फिर अंत उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया.. जो नमकीन न होकर खट्टा टाइप का था।

कुछ देर तक हम दोनों ने लेट कर एक-दूसरे के कामांगों को छेड़ा तो हम दोनों चुदाई के लिए तैयार हो उठे। उसने मुझसे जल्दी से लण्ड को चूत के अन्दर डालने को कहा। मैंने लण्ड को चूत के मुहाने पर रखा और हल्का सा एक झटका दिया।

क्योंकि मैं पेशेवर होने के कारण चोदने के तरीके जानता हूँ.. उसकी चूत में लौड़ा घुसते ही उसके मुँह से हल्की ‘आह..’ निकल गई। दूसरे झटके में पूरा लण्ड अन्दर डालकर धकापेल चुदाई करने लगा।
वो भी चूतड़ों को हिलाकर मेरा साथ दे रही थी- और तेज.. और तेज.. आहा.. आअहह.. आह.. मजा आ गया.. चोद मेरे चोदू..

वो मादक आवाजें निकाल रही थी। कुछ ही देर में वो झड़ चुकी थी।
इस देर तक चली चुदाई में मैं झड़ने वाला हुआ और वो इस बीच 2 बार झड़ चुकी थी। मैंने अपना लण्ड उसकी चूत से निकालकर उसके मुँह में झड़ गया।

उस रात मैंने उसकी 3 बार चुदाई की और वो भी मेरे साथ चुदाई में कई बार झड़ कर खूब संतुष्ट हो चुकी थी। मैं सुबह अपने पैसे लेकर चला गया। चूंकि मेरा व्यवसाय ही चुदाई का है इसलिए मैं अपने धंधे में पूरी गोपनीयता रखता हूँ।

आपको मेरी यह सच्ची घटना कैसी लगी.. ज़रूर बताना.. मेरे पास मेरे अनुभवों की अभी और भी कहानियाँ हैं।
अगली बार मैं आपको किसी और मस्त लुगाई की चुदाई की कहानी बताऊँगा, आप अपने ईमेल मुझे जरूर भेजिएगा

Aisi Mausi Sabko Mile-1


मेरा नाम विजय है, 24 बरस का हूँ। शहर में मेरी मौसी रहती थी, मौसाजी की किरयाने की दुकान थी, थोड़ा बहुत होलसेल का काम भी था।
बाकी सब तो ठीक था पर मौसी के कोई औलाद नहीं थी, हम 4 भाई बहन थे, और मौसी हम सबसे बहुत प्यार करती थी। मैंने भी उन्हें हमेशा अपनी माँ जैसा ही समझा था।

बात थोड़ी पुरानी है, जब मैं 12वीं क्लास पास कर चुका था, माँ बाप चाहते थे कि मैं और पढ़ूँ तो उन्होंने मुझे शहर मौसी के पास भेजने का विचार किया। असली खुशी तो मुझे इस बात की थी कि शहर में रहूँगा, कॉलेज में पढ़ूँगा और शहर में तो सुना है के लड़कियाँ भी बहुत जल्दी पट जाती हैं।

मैं शहर आ गया और कॉलेज में एड्मिशन भी ले ली, पर 3-4 महीने बीत जाने पर भी कोई भी लड़की नहीं पटी, दोस्त तो बन गई पर साली गर्लफ्रेंड कोई नहीं बनी।
रोज़ सुबह जब सो कर उठता तो लण्ड फुल टाइट तना होता, मगर उसको लेने वाली कोई नहीं मिल रही थी, मूठ मारने का ना मुझे शौक था और ना ही आदत, तो लण्ड भी एकदम मूसल की तरह सीधा और दमदार था, बस इशारा करते ही तन जाता था।

ऐसे ही दिन बीतते गए पर कोई बात ना बनी।
एक दिन ऐसे ही दोपहर के वक़्त मुझे लेटे लेटे प्यास सी लगी तो मैं उठ कर दूसरे कमरे में गया जहाँ मौसी लेटी थी, क्योंकि फ्रिज उनके कमरे में रखा था।
मैंने पानी पीते पीते ध्यान दिया, मौसी शायद टीवी देखते देखते सो गई थी, सोते में उनकी साड़ी उनके सीने से हट गई थी जिस कारण उनके भारी स्तन काफी सारे उनके ब्लाउज़ से बाहर दिख रहे थे।
बड़े बड़े दो गोल स्तन और भरा भरा सा उनका पेट, मेरी तो आँखें फटी की फटी रह गई। फिर मैंने सोचा, बदतमीज़ यह क्या देख रहा है, जिस औरत की तू इतनी इज्ज़त करता है उसका नंगापन देख रहा है?
मैं दूसरे कमरे में चला गया और बेड पे लेट गया। थोड़ी देर बाद मुझे भी नींद आ गई।

थोड़ी देर बाद मुझे मौसी ने जगाया- उठो विजय चाय पी लो, आज बहुत सो रहे हो?

मैं आँखें मलता हुआ उठा तो देखा- ओ तेरे दी…

लण्ड ने तो तन कर पायजामे का तम्बू बना दिया था… क्या मौसी ने भी देखा होगा? मुझे बड़ी शर्म आई, पर चलो। मौसी की आदत थी को वो अक्सर दोपहर को सो जाया करती थी।
धीरे धीरे मुझे इस बात की आदत सी पड़ने लगी के जब भी मौसी सो रही होती, मैं किसी ना किसी बहाने से जा कर उसके अंग प्रत्यंग को निहार आता। कभी मन में विचार आता नहीं ये तो मेरी माँ जैसी है तो कभी मन में बैठा शैतान कहता, माँ जैसी है पर माँ तो नहीं, उसके स्तन कितने बड़े हैं, कितने गोल और कितने गोरे, अगर उनसे खेलने का मौका मिल जाए तो, या चूसने का, वाह क्या मज़ा आए, पर मैं हमेशा अपने मन पे क़ाबू पा लेता।
मगर ये भी हो रहा था के मैं इसी फिराक में रहता के कब और कैसे मौसी के स्तनो के दर्शन कर सकूँ। कभी कभी रात को जब मौसाजी मौसी के साथ सेक्स करते तो मौसी की सिसकारियाँ और कराहटें मैं भी सुनता, मेरा लण्ड तन जाता पर क्या करता।

कुछ दिनों बाद ऐसे ही एक दिन मैं अपने बिस्तर पे लेटा था और इंतज़ार कर रहा था कि कब मौसी सो जाए और मैं उसके उरोजों के दर्शन कर सकूँ।

यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !
जब मैंने थोड़ी देर बाद देखा तो मौसी के हल्के हल्के खर्राटों की आवाज़ मैंने सुनी, मतलब मौसी सो गई थी, मैं उठ कर जाने लगा तो मन में से आवाज़ आई ‘रुक जा विजय, ऐसा मत कर!’
पर दूसरे ही क्षण ये आवाज़ आई ‘ऐसे गोल गोल स्तन देखने का मौका रोज़ रोज़ नहीं मिलता, चल चलके देखते हैं।’
मैं उठा और सीधा जा के मौसी के बेड पे उनकी बगल में बैठ गया।
मौसी के सांस लेने से उनके बड़े बड़े स्तन ऊपर नीचे हो रहे थे, मैंने देखा के आसमानी रंग के ब्लाउज़ ने नीचे आज मौसी ने ब्रा नहीं पहनी थी तो ब्लाउज़ में से उनके चूचुक भी थोड़ा बाहर उभरे हुए दिख रहे थे।
जितना मैं मौसी के स्तन देख रहा था मेरी हालत उतनी ही खराब होती जा रही थी। फिर न जाने क्या सोच कर मैंने, अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाए और बड़े ही धीरे से मौसी के ब्लाउज़ का एक हुक खोल दिया। मैंने देखा मौसी उसी तरह बेफिक्र सो रही थी। मैंने फिर हिम्मत की और दूसरा हुक भी खोल दिया। अब मौसी की छाती थोड़ी और खुल कर दिखने लगी।

ऐसे ही करते करते मैंने उनकी ब्लाउज़ के 4 हुक खोल दिये। अब सिर्फ नीचे के 2 हुक बचे थे, अगर मैं ये भी खोल दूँ मौसी ऊपर से पूरी नंगी हो जाएगी मेरे सामने। मगर मन ने मना कर दिया और मैं उठ कर फिर अपने कमरे में आ गया।

मगर जितनी छातियाँ मैं मौसी की देख आया था, वो दृश्य बार बार मेरी आखों के सामने घूम रहा था। मेरा मन फिर से बेईमान हो गया और मैं फिर जा कर मौसी के पास बैठ गया। मैंने फिर से हिम्मत की और मौसी के ब्लाउज़ का पांचवा हुक भी खोल दिया और फिर उसके बाद छठा हुक भी खोल दिया।

अब मौसी मेरे सामने नंगी थी, सिर्फ उनके ब्लाउज़ के दोनों पल्ले हटाने थे। मैंने बड़े आराम से दोनों पल्ले उठा कर साइड पे कर दिये।
‘वाह, सृष्टि की सबसे सुंदर चीज़ मेरे सामने थी।’ आज मैंने अपनी ज़िंदगी में पहली बार किसी स्त्री के स्तनों को बिल्कुल नंगा देखा था और वो भी इतनी करीब से।

मैं उन स्तनों को चूसना और सहलाना चाहता था, पर डर लग रहा था के मौसी न जग जाए।
खैर मैंने हिम्मत करके मौसी बाएँ स्तन पर अपना काँपता हुआ हाथ रखा। मौसी वैसे ही सो रही थी, थोड़ा आश्वस्त होने पर मैं स्तन पर अपने हाथ से पकड़ बनाई। मौसी का निप्पल मेरी हथेली के बीच में लग रहा था। जब मैंने एक दो बार हल्के से दबा के देखा और मौसी नहीं जगी तो मैंने अपने दोनों हाथों में मौसी के दोनों स्तन पकड़ लिये और दबाये।

इस बार मौसी थोड़ी कसमसाई, शायद मैंने थोड़ा ज़्यादा दबा दिया। मगर अब दबाने से बात नहीं बन रही थी, मैं तो चूसना चाहता था। जब मैंने मौसी का निप्पल अपने मुँह में लिया तो मौसी हिल पड़ी और मैं भाग कर अपने कमरे में जा के बेड पे लेट गया।
डर के मारे मेरी गाँड फटी पड़ी थी, अगर मौसी को पता चल गया, अगर वो गुस्सा कर गई, अगर उन्होंने मौसाजी को और मेरे घर पे बता दिया तो?

मैं बहुत घबरा गया और आँखें बंद करके ऐसे लेट गया जैसे सो रहा हूँ। थोड़ी देर बाद मुझे नींद आ गई। फिर जब जागा तो मौसी मेरे लिए चाय बना कर मुझे जगा रही थी, मैं बहुत शर्मिंदा था और मौसी से नज़र नहीं मिला पा रहा था। मैंने उनके चेहरे की तरफ भी नहीं देखा।

अगले दिन दोपहर को देखा कि मौसी तो पंजाबी सूट पहने हुये थी। मतलब अब मैं उनका ब्लाउज़ नहीं खोल सकता था, तो क्या मौसी को सब पता चल गया, मुझे बहुत ग्लानि हुई।

अगले 3-4 रोज़ मैंने देखा कि मौसी हमेशा पंजाबी सूट ही पहनती थी और इसी वजह से मैं कुछ नहीं देख पाता था। हाँ कभी कभी उनके झुकने से उनकी वक्ष रेखा ज़रूर दिख जाती थी पर मैं उनके साथ उस दिन की वारदात भूल नहीं पा रहा था।

रात को मौसा जी ने मौसी के साथ सेक्स किया। दोनों की खुसुर पुसुर और कराहटें मैं सुन रहा था। मेरा भी लण्ड पूरा तना हुआ था, पर मैं क्या कर सकता था।

अगले दिन सुबह उठा और तैयार हो कर कॉलेज चला गया।
कहानी जारी रहेगी।